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क़मर जलालाबादी की ग़ज़ल: चाँदनी में गुलाब देखा है

काव्य डेस्क

Urdu Adab
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                            इक हसीन ला-जवाब देखा है
        
                                                    
                            
रात को आफ़्ताब देखा है

गोरा मुखड़ा ये सुर्ख़ गाल तिरे
चाँदनी में गुलाब देखा है

नर्गिसी आँख ज़ुल्फ़ शब-रंगी
बादलों का जवाब देखा है

झूमते जाम सा छलकता बदन
एक जाम-ए-शराब देखा है

हम तो मिल कर न मिल सके तुम को
तुम को देखा कि ख़्वाब देखा है

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