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Urdu Poetry: बंद पड़ा हूँ मुद्दत से

काव्य डेस्क

Urdu Adab
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                            एक सदी में बीता हूँ
        
                                                    
                            
मैं भी कैसा लम्हा हूँ

बिक जाता हूँ हाथों-हाथ
हद से ज़ियादा सस्ता हूँ

बंद पड़ा हूँ मुद्दत से
कहने को दरवाज़ा हूँ

मेरी शक्ल पे मत जाना
अंदर अंदर टूटा हूँ

मत समझा कर मुझ को तू
यार बहुत मैं उलझा हूँ

सब की नज़रें मुझ पर हैं
क्या लड़की का दुपट्टा हूँ

~ अक्स समस्तीपुरी

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3 महीने पहले
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