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इंतज़ार में ठहरी ज़िंदगी

Anonymous User

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            ऐसा नहीं कि तुमसे बात करने का दिल नहीं करता,
        
                                                    
                            
ऐसा नहीं कि तुमसे मोहब्बत नहीं है,

ऐसा भी नहीं कि तुम्हारी याद नहीं आती…
बहुत दिल करता है तुमसे बात करूँ,

तुम्हें कस के गले लगाकर ये कहूँ—
मुझे तुमसे ज़्यादा किसी से मोहब्बत नहीं,
और शायद कभी हो भी नहीं सकती…

क्योंकि तुम्हारे अलावा
किसी और को कभी देखा ही नहीं,
अपने दिल को कभी बाज़ार बनने दिया ही नहीं…

तुमसे मिलकर भी
तुमसे ही शिकायत रहती है—

हर बार इतना इंतज़ार करना,
क्या सच में ठीक है…?
जो एहसास तुमसे जुड़ा है,

वो किसी और से जुड़ ही नहीं सकता…
मुझे पता है तुम इन एहसासों को नहीं समझते,
शायद मेरी मोहब्बत तुम्हें बोझ लगने लगी है…

तुम हर बार कहते हो—
“जैसा चल रहा है, चलने दो…”

पर सच ये है—
तुम चल रहे हो…
और मैं कहीं रुक सी गई हूँ…

तुम्हारे इंतज़ार में,
मैं खुद से ही दूर हो गई हूँ…
 
2 सप्ताह पहले
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Updesh Kumar

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