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शेश...

Anonymous User

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                            एकांत मुझसे
        
                                                    
                            
नाख़ुश है

तन्हाई कहने की
साजिश है

बीते ग़मों के
अवशेष हैं...

राहुल,
कम ही दिन अब शेश हैं!

प्रभु के दर पर
क्यों नहीं शीश है?

इसलिए तो
पल पल अंदर रोष है...

भगवान,
आपको ही करवाना है!

बार बार गिरते को...
संभलवाना है

मैने हर इच्छा का
त्याग कर दिया है

खुदको, नई चुनौती के लिए
तैयार कर लिया है

अब कुछ...

बाद में ही लिखना है...



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5 दिन पहले
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Ankit Kumar

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