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गुहार

Anonymous User

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            डर लग रहा है
        
                                                    
                            

फिर
हार को...
कैसे सहना है :(

'अरे, इस समय, ये सब कौन सोचता है?'

बड़ी मिन्नतों पे तो यहां एक मौका मिलता है...

कि
'उसी को भुनाओ!'

भटियार-ख़ाना... तो बहुत ठंडा लगता है...

जो ताप, दिमाग को, इस जवाबदारी ने दिया है

क्यों घाव, हृदय पे,
इश्क तारी में लिया है?

कुछ नहीं सीखा है!

फिर भी आपको ख़ुदा साथ देना है!

टूट चुके, बंदे का... हांथ, थामना है 


-राहुल


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3 महीने पहले
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