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वैसे तो, हरदम ही, पास ही उसका डेरा है...

Anonymous User

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            समझाइश में ही
        
                                                    
                            
ख़लिश है

पर, ख़लिश की ही
गुज़ारिश है

कैसी बुरी गुत्थी है!
कितनी बार पड़ी पोथी है...

प्रभु, आप ही संभाल दो 
जैसे भी हो सके...

एक हारे, बिखरे, लड़के से
खुदसे ना करते बने

बढ़ाऊं और कविता
पर वक़्त कहां है?

तन्हाई में
कितना रक्त बह जाता है

झट से वो बादल... सियाह आता है...

वैसे तो, हरदम ही, पास ही उसका डेरा है...

-राहुल



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1 सप्ताह पहले
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Rabindra Aman

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