विज्ञापन

फौलाद के उस्ताद

Anonymous User

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            लोहा पिघलाकर सांचे में ढालना, हर किसी के बस की बात नहीं ।
        
                                                    
                            
बख्तरबंद की रफ्तार संभालना, हर किसी की औकात नहीं ।।

किताबों का ज्ञान तो दुनिया बांटती फिरती है महफिलों में,
पर जो टैंकों की दहाड़ सिखा दे, उस से बड़ा उस्ताद नहीं ।।

जब रेगिस्तानों के सीने में 'अजेय' बनकर हम कड़कते हैं ।
उस्ताद! आपकी दी हुई कड़क ट्रेनिंग की बदौलत ही हम रणभूमि में भड़कते हैं।।

दुश्मन का काल बनकर जब 'भीष्म' मैदान में उतरता है ।
तो गीदड़ों का वो पूरा झुंड मौत के खौफ से डरता है ।।

चाहे 'अर्जुन' सा अचूक निशाना लेकर दुश्मन पर छा जाना हो ।
या हल्के और घातक 'जोरावर' से पहाड़ों का सीना चीर कर आना हो।।

इन लोहे के शेरों को उस्ताद, आपने ही तो साक्षात् काल बनाया है ।
मौत के सामने भी बेखौफ होकर लड़ना, आपने ही हमें सिखाया है ।।

एक कड़क आवाज गूंजती है जब रेडियो से कानों में ।
जोश का तूफान दौड़ जाता है तब 'टैंक कमांडर' के अरमानों में।।

कांप उठती है रूह दुश्मन की, देख कर वो खूंखार मंजर ।
जब 'ड्राइवर' देता है रेस, और धुआं उड़ाकर बढ़ता है बख्तर ।।

सटीक निशाने से जो उड़ा दे परखच्चे, वो जांबाज 'गनर' कहलाता है ।
और जो जोड़ कर रखे हर एक कड़ी को, वो 'ऑपरेटर' ढाल बन जाता है।।

कमांडर, ड्राइवर, गनर और ऑपरेटर की ये फौलादी जो चौकड़ी है ।
उस्ताद! इसे अभेद्य दीवार बनाने में आपकी मेहनत सबसे बड़ी है ।।

अल्फा, ब्रावो, चार्ली की गूंज में जो हमारी जिंदगी बुनते हैं ।
आराम की दुनिया छोड़, जो सिर्फ बारूद की खुशबू चुनते हैं।।

सलामी है आर्मर्ड के उन गुरुओं को, जो लोहे को भी मोम कर दें ।
दुश्मन अगर आंख उठाए, तो पल भर में उसे खत्म कर दें।।

गर्व है हमें कि हम ऐसे शूरवीरों के शागिर्द कहलाते हैं ।
तभी तो आज सीना ठोक कर, हम शिक्षक दिवस मनाते हैं ।।
 
एक महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Parul Bhaktani

1636 कविताएं

View Profile

Updesh Kumar

13423 कविताएं

View Profile