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Hasya: काका हाथरसी की हास्य-व्यंग्य से भरपूर तीन चुनिंदा कविताएं

काव्य डेस्क

Kavita
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                                                  1- 

भोंदूमल बेकार थे, हुआ पिलपिला हाल।
फ़ाक़े होने लगे तब, पहुँच गए ससुराल॥
पहुँच गए ससुराल, बीस दिन करो चराई।
पाँच किलो बढ़ गया वज़न, आई चिकनाई॥
घर आए तो देखा, छह मेहमान डट रहे।
उनके दर्शन करते ही, छह किलो घट गए॥

2- 
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प्रथम करूँ खल-वंदना, श्रद्धा से सिर नाय।
मेरी कविता यों जमे, ज्यो कुल्फ़ी जम जाय॥
ज्यो कुल्फ़ी जम जाय, आप जब कविता नापें।
बड़े-बड़े कविराज, मंच पर थर-थर कापें॥
करें झूठ को सत्य, सत्य को झूठ करा दें।
रूठें जिस पर आप, उसी को हूट करा दें॥

3- 

कभी ग़लती नहीं करता, उसे ‘भगवान’ कहते हैं।
करे ग़लती ओ’ स्वीकारे, उसे ‘इंसान’ कहते हैं॥
न अपनी ग़लती पहचाने, उसे ‘हैवान’ कहते हैं।
करे ग़लती, नही माने, उसे ‘शैतान’ कहते हैं॥
करे जो जानकर ग़लती पे ग़लती, और फिर ग़लती।
तो उस शैतान के दादा को, ‘पाकिस्तान’ कहते है॥

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