पुस्तक: Power, Policy, Politics: Inside Modi’s Bharat 2014–2026
लेखक: विक्रम कपूर
भूमिका: यशवंत देशमुख
पत्रकार विक्रम कपूर की पुस्तक Power, Policy, Politics: Inside Modi’s Bharat 2014–2026 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राज...और पढ़ें
समीक्षक - कुमारी उर्वशी
सहायक प्राध्यापिका,
हिंदी विभाग, रांची विमेंस कॉलेज
उपासना की पुस्तक ‘उड़ने वाला फूल’ को पढ़ना दरअसल उन चीज़ों को पहली बार सचमुच देखना है, जिन्हें हम रोज़ देखते हुए भी देख नहीं पाते। यह पुस्तक...और पढ़ें
लेखिका : सोनाली डेरनियागाला
प्रकाशक : अल्फ्रेड ए. नॉफ
मूल्य : 6,860 रुपये (हार्डकवर)
एक पल, जिसमें सब कुछ तबाह हो गया
नेपाल की यह त्रासदी 2013 की श्रीलंका सुनामी की भयावह याद दिलाती है। उसमें अपना पूरा परि...और पढ़ें
हमनशीं आनंद कौशल का पहला ग़ज़ल एवं शायरी संग्रह है। इसे पढ़कर पाठकों को सबसे अच्छी बात यह लगेगी कि इसमें ज़्यादातर ग़ज़ल और शायरी सीधे दिल से निकले हुए लगते हैं। भाषा बिल्कुल आसान है, इसलिए हर ग़ज़ल को आसानी से समझ सकते हैं। कहीं भी शब्दों में बनावटीपन न...और पढ़ें
किताब - बारिश के पिंजड़े में
लेखक - चन्दन सिंह
समीक्षक - प्रवीण प्रणव
कुछ कविताएँ ऐसी होती हैं, जिन्हें केवल पढ़ा नहीं जाता, बल्कि धीरे-धीरे जिया जाता है। वे पहली ही बार में अपना सम्पूर्ण अर्थ नहीं खोलतीं। उनके भीतर छि...और पढ़ें
किसी भी देश में घुसपैठ की समस्या विश्व-व्यापी है लेकिन भारत जैसे संवेदनशील और बड़ी जनसंख्या वाले देश में ये मामला और भी गंभीर हो जाता है। भारत देश के संदर्भ को लेकर ही पूर्णिमा शर्मा ने किताब लिखी है घुसपैठिए। लेखिका का कहना है कि - देश में अगर जनसां...और पढ़ें
द मैन हू रीड एवरीथिंगः द लिटरेरी लेटर्स ऑफ हेरोल्ड ब्लूम
संपादक : हीथर कैस व्हाइट
वह आदमी, जिसने सब कुछ पढ़ डाला
हाल ही में प्रकाशित यह चर्चित पुस्तक बताती है कि ब्लूम शुरू से ही साहित्य के बहुत बड़े शौकीन थे। उन्...और पढ़ें
समीक्षक - प्रत्युष प्रशांत
मैं दीवारों पर खिड़कियां लिख रही हूं (कविता संग्रह) - अनामिका अनु
वाणी प्रकाशन, पहला संस्करण 2026
विनोद कुमार शुक्ल के चर्चित उपन्यास 'दीवार में एक खिड़की रहती थी' से बिल्कुल अल...और पढ़ें
नवनीत नीरव की पकड़ फिक्शन और नॉन-फिक्शन, दोनों विधाओं में समान रूप से सशक्त है। बच्चों, युवा पाठकों और वयस्कों के लिए लिखी गई उनकी रचनाएँ सहज ही पाठक को अपने साथ जोड़ लेती हैं। उनकी किसी भी रचना को पढ़ना शुरू कीजिए, उसे अंत तक पढ़ने के लिए आपको अतिरि...और पढ़ें
साल 1967 - कश्मीर घाटी से एक 17 साल की नाबालिग हिन्दू लड़की परमेश्वरी हांडू गायब हो गई। जब सामने आई तो बालिग शादीशुदा परवीन अख़्तर बनकर। जब वो गायब हुई तो लोगों के बीच अफ़वाहों का दौर भी शुरु हो गया। किसी ने कहा कि वो अपने मुस्लिम सहकर्मी के साथ भाग...और पढ़ें