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रूसी जेल में टूट गए थे स्टीफन हबर्ड: बेटे को था ये डर, रिहाई पर ट्रंप ने बाइडन को घेरा; क्या है पूरा मामला?
Thu, 22 Oct 2026 08:04 AM IST
राकेश कुमार
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला।
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला।
Published by: राकेश कुमार
Updated Thu, 22 Oct 2026 08:04 AM IST
रूस की जेल से रिहा हुए 74 वर्षीय अमेरिकी नागरिक स्टीफन हबर्ड के बेटे ने बताया कि हिरासत के दौरान उनके पिता जिंदगी से बेहद निराश हो गए थे। हबर्ड पर यूक्रेन की ओर से लड़ने का आरोप था, जिसे उनके परिवार ने खारिज किया और उनके वकील ने कहा कि आरोपों के समर्थन में उन्हें कोई सबूत नहीं मिला। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पुतिन से बातचीत को रिहाई का श्रेय दिया और व्हाइट हाउस ने इस मुद्दे पर जो बाइडन व डेमोक्रेट्स को निशाने पर लिया। रूस में अब भी करीब 20 अमेरिकी नागरिक कैद हैं।
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हबर्ड की रिहाई
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
रूस की जेल से रिहा हुए अमेरिकी नागरिक स्टीफन हबर्ड के बेटे जोसेफ कोलमैन ने बताया कि हिरासत के दौरान उनके पिता जिंदगी से बेहद निराश हो गए थे। पिछले साल फोन पर हुई बातचीत में पिता की हालत सुनकर उन्हें डर लगा था कि शायद वह उन्हें दोबारा कभी नहीं देख पाएंगे। कोलमैन ग्रीक ऑर्थोडॉक्स पादरी हैं। उन्होंने बुधवार को सीबीएस न्यूज को दिए अपने पहले टेलीविजन साक्षात्कार में पिता की मानसिक स्थिति के बारे में बताया।
कोलमैन ने कहा, 'वह उस समय जिस जिंदगी का सामना कर रहे थे, उससे बेहद थक चुके थे। मैं आत्महत्या के विचारों की बात नहीं कहना चाहता, लेकिन बातचीत से लगा कि उनकी निराशा कुछ उसी दिशा में बढ़ रही थी।' उन्होंने बताया कि रिहाई से पहले पिता से करीब एक मिनट फोन पर बात हुई। इस बार उनकी आवाज मई 2025 में हुई पिछली बातचीत के मुकाबले बेहतर लगी।
कौन हैं स्टीफन हबर्ड और रूस ने उन्हें जेल में क्यों रखा था?
74 वर्षीय स्टीफन हबर्ड अमेरिका के सेवानिवृत्त शिक्षक हैं। रूस ने 2022 में यूक्रेन पर बड़े पैमाने पर हमला शुरू करने के कुछ समय बाद उन्हें यूक्रेन में पकड़ लिया था। उन पर यूक्रेन की ओर से लड़ने और भाड़े के लड़ाकों के लिए एक चौकी पर तैनात रहने का आरोप लगाया गया था। बाद में बंद कमरे में हुई सुनवाई के बाद उन्हें लगभग सात साल की सजा सुनाई गई। उनके परिवार ने लगातार इन आरोपों को खारिज किया है। अमेरिकी सरकार ने भी उन्हें गलत तरीके से हिरासत में रखा गया नागरिक माना था।
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हबर्ड के वकील मार्टिन डी लुका के मुताबिक, फरवरी 2025 में जब उनकी कानूनी टीम ने मामला संभाला, तब परिवार और अमेरिकी दूतावास को भी ठीक से पता नहीं था कि उन्हें कहां रखा गया है। बाद में वकीलों ने उनका पता लगाया और मुलाकात के साथ भोजन व जरूरी सामान के लिए पैसे की व्यवस्था की।
हबर्ड की रिहाई कैसे हुई और ट्रंप ने बाइडन पर क्या आरोप लगाया?
स्टीफन हबर्ड की रिहाई की घोषणा 21 अक्तूबर को अमेरिकी राष्ट्रपति के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की मुलाकात के दौरान हुई। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि पुतिन उनकी मांग पर हबर्ड को रिहा करने के लिए राजी हुए और इसके लिए किसी कैदी की अदला-बदली नहीं करनी पड़ी। ट्रंप ने यह भी कहा कि रूस पर नए प्रतिबंध लागू नहीं करने के उनके फैसले ने रिहाई में भूमिका निभाई।
व्हाइट हाउस ने सोशल मीडिया पर हबर्ड की रिहाई को लेकर पोस्ट करते हुए पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडन और डेमोक्रेट्स पर निशाना साधा। पोस्ट में लिखा गया, 'स्टीफन हबर्ड और उनका परिवार रूस से घर लौट रहे हैं। यह काम स्लीपी जो बाइडन और डेमोक्रेट्स को बहुत पहले ही कर देना चाहिए था! इस बयान के जरिए ट्रंप ने रिहाई का श्रेय लेते हुए अपने राजनीतिक विरोधियों पर हमला बोला।
यह भी पढ़ें: संयुक्त राष्ट्र में भारत की दो-टूक: सांसद मनीष तिवारी बोले- युद्ध अपराधों और नरसंहार के खिलाफ जवाबदेही जरूरी
क्या हबर्ड के खिलाफ आरोपों के समर्थन में सबूत मिले?
हबर्ड के वकील ने कहा कि उनकी टीम ने उन लोगों से बातचीत की, जो उन्हें जानते थे। साथ ही, युद्ध शुरू होने से पहले की उनकी परिस्थितियों की भी जांच की गई। वकील के अनुसार, उन्हें ऐसा कोई सबूत नहीं मिला जिससे साबित हो कि हबर्ड यूक्रेनी सेना में शामिल थे। उन्होंने कहा कि रूस की केस फाइल का बड़ा हिस्सा गोपनीय था और उनकी टीम ने आरोपों के समर्थन में सबूत मांगे थे।
हबर्ड के बेटे ने भी पिता की रिहाई पर खुशी जताई। उन्होंने इसे बड़े संघर्ष के बीच शांति की दिशा में छोटा कदम बताया और पुतिन को रिहाई की मंजूरी देने के लिए धन्यवाद दिया। हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि रूसी सेना की चेतावनी के बावजूद उनके पिता का युद्ध क्षेत्र में बने रहना गलती हो सकती थी। उन्होंने साफ कहा कि इसका मतलब यह नहीं है कि पिता को हिरासत में रखना जायज था।
हबर्ड की रिहाई के बाद भी कितने अमेरिकी रूस की जेल में हैं?
हबर्ड की रिहाई के बावजूद रूस में करीब 20 अमेरिकी नागरिक अब भी कैद हैं। इनमें ऐसे लोग भी शामिल हैं जिनके परिवार उन पर लगाए गए आरोपों को गलत बताते हैं। अमेरिकी विदेश विभाग अपने नागरिकों को रूस की यात्रा से बचने की चेतावनी देता है, क्योंकि वहां गलत तरीके से हिरासत में लिए जाने का जोखिम बना हुआ है।
वहीं, विटकॉफ ने पुतिन को मानवीय बताते हुए उनकी तारीफ की, जिस पर अमेरिका के रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक सांसदों ने आलोचना की। पुतिन अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय के गिरफ्तारी वारंट का सामना कर रहे हैं। यह वारंट यूक्रेनी बच्चों को कथित तौर पर गैरकानूनी तरीके से निर्वासित करने के आरोपों से जुड़ा है।
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कोलमैन ने कहा, 'वह उस समय जिस जिंदगी का सामना कर रहे थे, उससे बेहद थक चुके थे। मैं आत्महत्या के विचारों की बात नहीं कहना चाहता, लेकिन बातचीत से लगा कि उनकी निराशा कुछ उसी दिशा में बढ़ रही थी।' उन्होंने बताया कि रिहाई से पहले पिता से करीब एक मिनट फोन पर बात हुई। इस बार उनकी आवाज मई 2025 में हुई पिछली बातचीत के मुकाबले बेहतर लगी।
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कौन हैं स्टीफन हबर्ड और रूस ने उन्हें जेल में क्यों रखा था?
74 वर्षीय स्टीफन हबर्ड अमेरिका के सेवानिवृत्त शिक्षक हैं। रूस ने 2022 में यूक्रेन पर बड़े पैमाने पर हमला शुरू करने के कुछ समय बाद उन्हें यूक्रेन में पकड़ लिया था। उन पर यूक्रेन की ओर से लड़ने और भाड़े के लड़ाकों के लिए एक चौकी पर तैनात रहने का आरोप लगाया गया था। बाद में बंद कमरे में हुई सुनवाई के बाद उन्हें लगभग सात साल की सजा सुनाई गई। उनके परिवार ने लगातार इन आरोपों को खारिज किया है। अमेरिकी सरकार ने भी उन्हें गलत तरीके से हिरासत में रखा गया नागरिक माना था।
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हबर्ड के वकील मार्टिन डी लुका के मुताबिक, फरवरी 2025 में जब उनकी कानूनी टीम ने मामला संभाला, तब परिवार और अमेरिकी दूतावास को भी ठीक से पता नहीं था कि उन्हें कहां रखा गया है। बाद में वकीलों ने उनका पता लगाया और मुलाकात के साथ भोजन व जरूरी सामान के लिए पैसे की व्यवस्था की।
हबर्ड की रिहाई कैसे हुई और ट्रंप ने बाइडन पर क्या आरोप लगाया?
स्टीफन हबर्ड की रिहाई की घोषणा 21 अक्तूबर को अमेरिकी राष्ट्रपति के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की मुलाकात के दौरान हुई। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि पुतिन उनकी मांग पर हबर्ड को रिहा करने के लिए राजी हुए और इसके लिए किसी कैदी की अदला-बदली नहीं करनी पड़ी। ट्रंप ने यह भी कहा कि रूस पर नए प्रतिबंध लागू नहीं करने के उनके फैसले ने रिहाई में भूमिका निभाई।
व्हाइट हाउस ने सोशल मीडिया पर हबर्ड की रिहाई को लेकर पोस्ट करते हुए पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडन और डेमोक्रेट्स पर निशाना साधा। पोस्ट में लिखा गया, 'स्टीफन हबर्ड और उनका परिवार रूस से घर लौट रहे हैं। यह काम स्लीपी जो बाइडन और डेमोक्रेट्स को बहुत पहले ही कर देना चाहिए था! इस बयान के जरिए ट्रंप ने रिहाई का श्रेय लेते हुए अपने राजनीतिक विरोधियों पर हमला बोला।
यह भी पढ़ें: संयुक्त राष्ट्र में भारत की दो-टूक: सांसद मनीष तिवारी बोले- युद्ध अपराधों और नरसंहार के खिलाफ जवाबदेही जरूरी
क्या हबर्ड के खिलाफ आरोपों के समर्थन में सबूत मिले?
हबर्ड के वकील ने कहा कि उनकी टीम ने उन लोगों से बातचीत की, जो उन्हें जानते थे। साथ ही, युद्ध शुरू होने से पहले की उनकी परिस्थितियों की भी जांच की गई। वकील के अनुसार, उन्हें ऐसा कोई सबूत नहीं मिला जिससे साबित हो कि हबर्ड यूक्रेनी सेना में शामिल थे। उन्होंने कहा कि रूस की केस फाइल का बड़ा हिस्सा गोपनीय था और उनकी टीम ने आरोपों के समर्थन में सबूत मांगे थे।
हबर्ड के बेटे ने भी पिता की रिहाई पर खुशी जताई। उन्होंने इसे बड़े संघर्ष के बीच शांति की दिशा में छोटा कदम बताया और पुतिन को रिहाई की मंजूरी देने के लिए धन्यवाद दिया। हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि रूसी सेना की चेतावनी के बावजूद उनके पिता का युद्ध क्षेत्र में बने रहना गलती हो सकती थी। उन्होंने साफ कहा कि इसका मतलब यह नहीं है कि पिता को हिरासत में रखना जायज था।
हबर्ड की रिहाई के बाद भी कितने अमेरिकी रूस की जेल में हैं?
हबर्ड की रिहाई के बावजूद रूस में करीब 20 अमेरिकी नागरिक अब भी कैद हैं। इनमें ऐसे लोग भी शामिल हैं जिनके परिवार उन पर लगाए गए आरोपों को गलत बताते हैं। अमेरिकी विदेश विभाग अपने नागरिकों को रूस की यात्रा से बचने की चेतावनी देता है, क्योंकि वहां गलत तरीके से हिरासत में लिए जाने का जोखिम बना हुआ है।
वहीं, विटकॉफ ने पुतिन को मानवीय बताते हुए उनकी तारीफ की, जिस पर अमेरिका के रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक सांसदों ने आलोचना की। पुतिन अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय के गिरफ्तारी वारंट का सामना कर रहे हैं। यह वारंट यूक्रेनी बच्चों को कथित तौर पर गैरकानूनी तरीके से निर्वासित करने के आरोपों से जुड़ा है।