{"_id":"6ad95035864a3185330c4927","slug":"france-protest-slogan-controversy-macron-hits-back-at-trump-and-netanyahu-2026-10-22","type":"story","status":"publish","title_hn":"फ्रांस में 'बिस्मिल्लाह, से ले तेनब्र' नारे पर विवाद: मुस्लिम प्रवासियों पर बहस; आरोपों पर मैक्रों का पलटवार","category":{"title":"World","title_hn":"दुनिया","slug":"world"}}
फ्रांस में 'बिस्मिल्लाह, से ले तेनब्र' नारे पर विवाद: मुस्लिम प्रवासियों पर बहस; आरोपों पर मैक्रों का पलटवार
Thu, 22 Oct 2026 05:27 AM IST
शिवम गर्ग
जेन इनविन, द न्यूयॉर्क टाइम्स
जेन इनविन, द न्यूयॉर्क टाइम्स
Published by: शिवम गर्ग
Updated Thu, 22 Oct 2026 05:27 AM IST
फ्रांस में 'बिस्मिल्लाह, से ले तेनब्र' नारे को लेकर विवाद के बीच ट्रंप और नेतन्याहू ने मुस्लिम प्रवासियों तथा कट्टरपंथी इस्लाम पर सवाल उठाए हैं, जबकि मैक्रों ने इन टिप्पणियों का विरोध किया है। ग्रीस और अल्बानिया में भी प्रदर्शन जारी हैं। क्या यह विवाद यूरोप की राजनीति को और प्रभावित करेगा? जानिए...
विज्ञापन
'बिस्मिल्लाह, से ले तेनब्र' से शुरू हुआ विवाद
- फोटो : Amar Ujala Graphics
विस्तार
बिस्मिल्लाह, से ले तेनब्र...फ्रांस में छात्र आंदोलन के दौरान चर्चा में रहा यह अजीबोगरीब नारा विवाद का विषय बन गया है। इसका शाब्दिक अर्थ है-अल्लाह के नाम पर...यहां अंधेरा है। पहली नजर में इसका कोई स्पष्ट मतलब नहीं निकलता, लेकिन फ्रांस के युवाओं ने इसे सरकार और पुलिस पर निशाना साधने का तरीका बना लिया।
विज्ञापन
यह वाक्य सबसे पहले स्नैपचैट पर सामने आया। बताया जाता है कि किसी व्यक्ति ने छात्र आंदोलन के आयोजकों के निजी चैट ग्रुप में शामिल होने की कोशिश करते हुए यह संदेश लिखा था। उसने अरबी अभिवादन बिस्मिल्लाह और फ्रेंच वाक्यांश से ले तेनब्र को मिलाकर लिखा। इसके बाद संदेश में कहा गया, हम सब कुछ तोड़ देंगे। यह संदेश अलग-अलग प्रोफाइल से कई बार भेजा गया। कुछ खातों पर मामादू और अब्देल्लाह जैसे नाम थे, जबकि उनमें अल्जीरिया के झंडे वाले इमोजी भी दिखे। कुछ यूजर्स को संदेश की भाषा इतनी अटपटी लगी कि उन्होंने इसके स्क्रीनशॉट लेकर सोशल मीडिया पर साझा कर दिए। हालांकि, इन संदेशों का मूल स्रोत स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हो सका है।
विज्ञापन
ट्रंप के दावों को मैक्रों ने बताया बेवकूफाना
राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने बुधवार को अटलांटिक के दूसरी तरफ के देशों (खासकर अमेरिका) के नेताओं पर आरोप लगाया कि वे अपने राजनीतिक एजेंडे के लिए फ्रांस के तनावपूर्ण सामाजिक माहौल का फायदा उठाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा, हिंसक प्रदर्शनों के कारणों को लेकर कई नेताओं की ओर से ऐसे टिप्पणियां आई हैं जो जितनी अस्वीकार्य हैं, उतनी ही बेवकूफाना भी हैं। जब एक रिपोर्टर ने उनसे पूछा कि क्या उनका इशारा राष्ट्रपति ट्रंप की ओर है, तो मैक्रों ने जवाब दिया-अन्य लोगों के साथ-साथ।
विज्ञापन
क्या बोले थे ट्रंप: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक दिन पहले ही कहा था कि फ्रांस में इस अशांति के लिए मुस्लिम प्रवासी जिम्मेदार हैं। ट्रंप ने इससे पहले मैक्रों से यह भी कहा था कि अपनी सीमाएं बंद करो और देर होने से पहले स्थिति नियंत्रित करो।
एथेंस में 10 हजार लोगों ने किया प्रदर्शन
ग्रीस में बुधवार को हजारों छात्र और शिक्षक सड़कों पर उतरे। पुलिस के मुताबिक, राजधानी एथेंस और उसके आसपास करीब 10 हजार लोगों ने प्रदर्शन किया। उन्होंने संसद के बाहर ग्रीस से फ्रांस तक...हमें सार्वजनिक और मुफ्त शिक्षा चाहिए, के नारे लगाए। लोगों ने मध्य एथेंस के सिंटाग्मा चौक पर तंबू लगाकर रातभर प्रदर्शन किया और बुधवार को मार्च निकाला।
क्यों सड़क पर उतरे लोग: प्रदर्शनकारियों ने शिक्षा पर सरकारी खर्च बढ़ाने, बेहतर सुविधाएं देने, कक्षाओं में छात्रों की भीड़ घटाने और वेतन में सुधार की मांग की। ग्रीस में 2027 मध्य में चुनाव होने हैं। वर्ष 2018 तक ऋण संकट के बाद ग्रीस की अर्थव्यवस्था सुधरी है लेकिन बढ़ते किराये और महंगाई ने शहरों में रहना मुश्किल कर दिया है।
बेल्जियम व जर्मनी तक सुनाई दे रही नारे की गूंज
कई युवाओं को संदेह है कि ये संदेश पुलिस या सरकारी एजेंसियों के उन अधिकारियों ने भेजे होंगे, जो छात्र आंदोलन के भीतर घुसपैठ करने की कोशिश कर रहे थे। प्रदर्शनकारियों ने इसी अटपटे वाक्य को व्यंग्यात्मक नारे के रूप में अपनाना शुरू कर दिया। यह नारा अब फ्रांस से बाहर भी प्रदर्शनकारियों के बीच दिखाई दे रहा है। बेल्जियम और जर्मनी में कुछ प्रदर्शनों में भी इसका इस्तेमाल हुआ।
अल्बानिया में नहीं थम रहा युवाओं का आक्रोश
अल्बानिया की राजधानी तिराना में सरकार विरोधी प्रदर्शन आठवें दिन जारी रहे। शिक्षा व्यवस्था, फीस घटाने और सरकारी निवेश बढ़ाने की मांग के साथ शुरू हुआ विरोध व्यापक प्रदर्शन में बदल गया है। प्रदर्शनकारी पीएम एदी रामा के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। रामा का आरोप है कि कुछ लोग महंगाई, आवास आिद पर लोगों की चिंताओं का इस्तेमाल हिंसा भड़काने के लिए कर रहे हैं।
यह कट्टरपंथी इस्लाम का हमला : नेतन्याहू
इस्राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने फ्रांस की हिंसा को कट्टरपंथी इस्लाम का हमला बताया। उन्होंने एक फ्रांसीसी न्यूज चैनल को दिए इंटरव्यू में कहा, फ्रांस सरकार ने समय पर तैयारी नहीं की। उसने बस हार मान ली और कट्टरपंथी इस्लाम के हमले के आगे झुक गई। नेतन्याहू ने कहा कि कट्टरपंथियों के खिलाफ लड़ना चाहिए और तुष्टीकरण की नीति नहीं अपनानी चाहिए। उन्होंने खुलासा किया कि 7 अक्तूबर 2023 को हमास के हमले के बाद उन्होंने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से कहा था, अगर हम उन्हें यहां खत्म नहीं करेंगे तो वे आपके पास पेरिस में होंगे। उनके मुताबिक, ठीक यही हो रहा है। नेतन्याहू ने अगस्त में ब्रिटेन को इस्लामिक गणराज्य कहा था। इस पर ब्रिटेन ने कड़ी आपत्ति जताई थी। एजेंसी
यूरोप को थक चुका महाद्वीप बताया
यह पूछे जाने पर कि क्या मुस्लिम प्रवासी फ्रांस को जला रहे हैं, नेतन्याहू ने सीधा जवाब दिया-हां। उन्होंने कहा, यूरोप एक थका हुआ महाद्वीप है। उनमें लड़ने की इच्छाशक्ति नहीं है। वो इस्लामी वोटबैंकों और वोक वामपंथियों के आगे घुटने टेक रहा है। भविष्य में फ्रांस में उग्र-दक्षिणपंथी ताकतों की जीत होगी।
इस्राइल में फ्रांस के प्रति ये रुख हालिया कूटनीतिक घटनाक्रम से जुड़ा है। सितंबर 2025 में कई अन्य देशों के साथ फ्रांस ने फलस्तीन राज्य को औपचारिक मान्यता दी थी। 27 अक्तूबर को होने वाले इस्राइली चुनावों के बीच कई नेता फ्रांसीसी यहूदियों से देश छोड़कर इस्राइल में बसने का आह्वान कर रहे हैं।