चंदे से जीता चुनाव: इन दिग्गजों पर मेहरबान रहे समर्थक, चुनावी खर्च से ज्यादा दिया दान
Lok Sabha Elections: आंकड़ों के मुताबिक बरेली, आंवला और बदायूं लोकसभा सीट पर भाजपा, सपा और कांग्रेस के प्रत्याशियों को चुनावी खर्च की चिंता नहीं रही। समर्थकों ने अपने प्रत्याशियों को दिल खोलकर चंदा दिया। पिछले चुनाव में बरेली के संतोष गंगवार तो चंदे की रकम भी खर्च नहीं कर पाए थे और चुनाव जीत लिया।
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सियासत के लिए बेहद उपजाऊ रुहेलखंड की धरती पर लोकसभा चुनाव में खम ठोकने वालों पर राजनीतिक दल और समर्थक भी खूब मेहरबान रहे हैं। पिछले आंकड़े बताते हैं कि बरेली, आंवला और बदायूं लोकसभा सीट पर भाजपा, सपा और कांग्रेस के प्रत्याशियों को चुनावी खर्च की चिंता नहीं रहती। चुनावी खर्च से कहीं ज्यादा रकम उन्हें चंदे में मिल जाती है। ऐसे में 70 लाख रुपये अधिकतम खर्च की सीमा वाले लोकसभा चुनाव में भी ज्यादातर प्रत्याशियों को अपनी एक पाई भी नहीं खर्च करनी पड़ी है।
संतोष ने चंदे की रकम से जीता चुनाव
वर्ष 2019 में बरेली लोकसभा सीट से प्रत्याशी रहे पूर्व केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार को समर्थकों ने दिल खोलकर चंदा दिया। इन्हें 161 लोगों ने 43.57 लाख रुपये का चंदा चेक व अन्य माध्यमों से चुनाव लड़ने के लिए दिया था। चुनाव अभियान में महज 37.55 लाख रुपये खर्च कर वह जीत दर्ज करने में कामयाब रहे थे। माना जा रहा है कि तगड़े चंदे की वजह से पार्टी की ओर से इन्हें कोई सहयोग राशि नहीं दी गई होगी। इसके बावजूद आठवीं बार सांसद बनने के लिए उन्हें निजी संपत्ति से एक रुपये भी निकालने की जरूरत नहीं पड़ी।
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इसी चुनाव में संतोष के प्रतिद्वंद्वी रहे सपा प्रत्याशी भगवत सरन गंगवार को भी पार्टी और समर्थकों ने हाथोंहाथ लिया। इन्हें पार्टी ने चुनाव अभियान की शुरुआत के लिए 10 लाख रुपये दिए तो जनता से इन्हें 11.03 लाख रुपये का दान भी मिला। वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी रहे पूर्व सांसद प्रवीण सिंह ऐरन ने सबसे ज्यादा 60.19 लाख रुपये खर्च किया था। इसमें उन्हें पार्टी की ओर से 50 लाख रुपये मिले थे और 10 लाख रुपये उन्होंने कर्ज के रूप में एकत्र किया था। इसके बावजूद वह चुनाव हार गए थे।
आंवला लोकसभा सीट से भाजपा प्रत्याशी रहे धर्मेंद्र कश्यप को जनता के बीच से 43 लाख रुपये से ज्यादा का चंदा मिला था। पार्टी ने इन्हें 20 लाख रुपये का सहयोग भी किया था। इन्होंने चुनाव में जीत के लिए 63.62 लाख रुपये खर्च किए थे। तीनों लोकसभा क्षेत्रों में किसी भी प्रत्याशी की ओर से यह सर्वाधिक खर्च है। इनकी प्रतिद्वंद्वी बिजनौर से यहां चुनाव लड़ने आईं बसपा-सपा गठबंधन की प्रत्याशी रुचिवीरा को पार्टी और समर्थकों से 27.43 लाख रुपये दान के रूप में मिले। इसके अलावा उन्होंने 31.99 लाख रुपये अपने निजी कोष से खर्च किया। उधर, कांग्रेस प्रत्याशी कुंवर सर्वराज को भी पार्टी फंड से 50 लाख और समर्थकों से 50 हजार रुपये चंदे में मिले थे।
संघमित्रा को पिता ने दिया था चंदा
बदायूं सीट से सांसद संघमित्रा मौर्य ने 2019 के चुनाव में 53.12 लाख रुपये खर्च किए थे। पार्टी से इन्हें 20 लाख रुपये का सहयोग मिला था। बाकी रुपये इनके पिता स्वामी प्रसाद मौर्य ने दिए थे। यहां से सपा प्रत्याशी रहे धर्मेंद्र यादव को भी पार्टी की ओर से 35 लाख रुपये का सहयोग मिला था। इसके अलावा 16.50 लाख रुपये समर्थकों ने चंदा दिया था। इन्होंने 48.72 लाख रुपये खर्च किए थे। कांग्रेस प्रत्याशी रहे पूर्व सांसद सलीम शेरवानी को भी पार्टी की ओर से 50 लाख रुपये का चुनावी चंदा मिला था। इसके अलावा उन्होंने शाद शेरवानी से 10 लाख रुपये कर्ज लिया था। उनके चुनाव में 55.69 लाख रुपये खर्च हुए थे।