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Bahraich News: चिलवरिया चीनी मिल संचालन की जगी उम्मीद, निवेशकों की तलाश
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बहराइच। दिवालिया घोषित होने के बाद से बंद चल रही चिलवरिया चीनी मिल के संचालन को लेकर एक बार फिर उम्मीद जगी है। सिंभावली शुगर्स लिमिटेड की दिवाला समाधान प्रक्रिया अब अगले चरण में पहुंच गई है। कंपनी ने समाधानकर्ता यानी निवेशकों से रुचि पत्र मांगे हैं। इसके लिए आठ सितंबर 2026 तक आवेदन करना होगा। पात्र आवेदकों को मिल से जुड़े दस्तावेज दिए जाएंगे और उनसे पांच नवंबर तक समाधान योजना मांगी जाएगी। इस पूरी प्रक्रिया से चिलवरिया चीनी मिल के दोबारा संचालन और किसानों के बकाये के भुगतान को लेकर नई उम्मीद बनी है।
गन्ना समिति के अध्यक्ष राजन सिंह ने बताया कि चीनी मिल के अंतरिम समाधान अधिकारी अनुराग गोयल की ओर से इस मामले में 14 अगस्त को सूचना जारी की गई है। रोस्टर के मुताबिक संभावित आवेदकों को आठ सितंबर तक अपना रुचि पत्र जमा करना होगा। इसके बाद 16 सितंबर को संभावित आवेदकों की अस्थायी सूची जारी होगी। इस सूची पर 21 सितंबर तक आपत्तियां ली जाएंगी और 30 सितंबर को अंतिम सूची जारी की जाएगी। इसके बाद पात्र आवेदकों को कंपनी से जुड़ी जरूरी जानकारी और समाधान योजना तैयार करने से संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराए जाएंगे।
पांच नवंबर तक देनी होगी योजना
पात्र आवेदकों को अपनी समाधान योजना पांच नवंबर 2026 तक जमा करनी होगी। इसके बाद इन योजनाओं के आधार पर ही मिल के संचालन की स्थिति तय होगी। फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि चिलवरिया चीनी मिल बिक गई है या उसका नया मालिक तय हो गया है। अभी केवल संभावित निवेशकों से रुचि पत्र मांगने की प्रक्रिया शुरू हुई है।
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दस्तावेज के मुताबिक सिंभावली शुगर्स के सिंभावली और बृजनाथपुर के साथ बहराइच स्थित चिलवरिया चीनी मिल परिसर को भी इस प्रक्रिया में शामिल किया गया है। तीनों मिलों की कुल गन्ना पेराई क्षमता 19,500 टन प्रतिदिन है। कंपनी ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में चीनी की बिक्री से 591.53 करोड़ रुपये और शराब बनाने के कारखाने से 215.47 करोड़ रुपये की बिक्री दर्ज की थी।
गन्ना किसानों की बकाया भुगतान पर रहेगी नजर
चिलवरिया चीनी मिल से जुड़े गन्ना किसानों के लिए समाधान प्रक्रिया इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि कंपनी पर किसानों समेत कई पक्षों की देनदारियां हैं। किसानों की गन्ना बकाया भुगतान की योजना पर नजर रहेगी। नई समाधान योजना में उनके बकाये के भुगतान का क्या प्रावधान होगा है और मिल के संचालन को लेकर पेश किए जाने वाले प्रस्ताव को लेकर उनकी दिलचस्पी बढ़ गई है।
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गन्ना समिति के अध्यक्ष राजन सिंह ने बताया कि चीनी मिल के अंतरिम समाधान अधिकारी अनुराग गोयल की ओर से इस मामले में 14 अगस्त को सूचना जारी की गई है। रोस्टर के मुताबिक संभावित आवेदकों को आठ सितंबर तक अपना रुचि पत्र जमा करना होगा। इसके बाद 16 सितंबर को संभावित आवेदकों की अस्थायी सूची जारी होगी। इस सूची पर 21 सितंबर तक आपत्तियां ली जाएंगी और 30 सितंबर को अंतिम सूची जारी की जाएगी। इसके बाद पात्र आवेदकों को कंपनी से जुड़ी जरूरी जानकारी और समाधान योजना तैयार करने से संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराए जाएंगे।
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पांच नवंबर तक देनी होगी योजना
पात्र आवेदकों को अपनी समाधान योजना पांच नवंबर 2026 तक जमा करनी होगी। इसके बाद इन योजनाओं के आधार पर ही मिल के संचालन की स्थिति तय होगी। फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि चिलवरिया चीनी मिल बिक गई है या उसका नया मालिक तय हो गया है। अभी केवल संभावित निवेशकों से रुचि पत्र मांगने की प्रक्रिया शुरू हुई है।
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दस्तावेज के मुताबिक सिंभावली शुगर्स के सिंभावली और बृजनाथपुर के साथ बहराइच स्थित चिलवरिया चीनी मिल परिसर को भी इस प्रक्रिया में शामिल किया गया है। तीनों मिलों की कुल गन्ना पेराई क्षमता 19,500 टन प्रतिदिन है। कंपनी ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में चीनी की बिक्री से 591.53 करोड़ रुपये और शराब बनाने के कारखाने से 215.47 करोड़ रुपये की बिक्री दर्ज की थी।
गन्ना किसानों की बकाया भुगतान पर रहेगी नजर
चिलवरिया चीनी मिल से जुड़े गन्ना किसानों के लिए समाधान प्रक्रिया इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि कंपनी पर किसानों समेत कई पक्षों की देनदारियां हैं। किसानों की गन्ना बकाया भुगतान की योजना पर नजर रहेगी। नई समाधान योजना में उनके बकाये के भुगतान का क्या प्रावधान होगा है और मिल के संचालन को लेकर पेश किए जाने वाले प्रस्ताव को लेकर उनकी दिलचस्पी बढ़ गई है।