Curved Display: 'कर्व्ड डिस्प्ले' वाले स्मार्टफोन का क्यों खत्म हो गया ट्रेंड? वजह जानकर कहेंगे- फैसला सही था!

Nitish Kumar
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीNitish Kumar
Tue, 23 Jun 2026 07:00 AM IST
सार

Why Curved Display Failed:

क्या आपने ध्यान दिया है कि आजकल नए स्मार्टफोन्स में किनारे से मुड़े हुए 'कर्व्ड डिस्प्ले' आने कम हो गए हैं? कभी प्रीमियम फोन्स के लुक में चार चांद लगाने वाले इस डिस्प्ले से आज फोन कंपनियों ने दूरी बना ली है। आइए जानते हैं क्यों स्मार्टफोन्स में अब ये डिस्प्ले कम दिख रहे हैं।

why smartphone companies are moving away from curved display phones
कर्व्ड डिस्प्ले वाले फोन्स में थीं कई कमियां - फोटो : अमर उजाला (एआई जनरेटेड)

    विस्तार

    कुछ साल पहले तक कर्व्ड डिस्प्ले वाले स्मार्टफोन प्रीमियम सेगमेंट की पहचान हुआ करते थे। स्क्रीन का किनारों तक मुड़ना न सिर्फ फोन को आकर्षक बनाता था, बल्कि इसे भविष्य की तकनीक के तौर पर भी पेश किया जाता था। सैमसंग, वनप्लस, वीवो और कई दूसरी कंपनियों ने इस डिजाइन को खूब अपनाया। लेकिन अब तस्वीर बदल चुकी है। आज ज्यादातर स्मार्टफोन कंपनियां फ्लैट डिस्प्ले पर वापस लौट रही हैं।

    सवाल यह है कि जिस तकनीक को कभी स्मार्टफोन का भविष्य बताया गया था, वह अचानक बाजार से गायब क्यों होने लगी? इसकी वजह सिर्फ एक नहीं, बल्कि कई हैं।

    1. खूबसूरती ही बन गई सबसे बड़ी कमजोरी

    कर्व्ड डिस्प्ले के बंद होने की सबसे बड़ी वजह इसका बेहद नाजुक होना है। चपटी यानी फ्लैट स्क्रीन के मुकाबले मुड़ी हुई स्क्रीन के डैमेज होने का खतरा कहीं ज्यादा रहता है। चूंकि इसका डिस्प्ले किनारों से मुड़ा होता है, इसलिए फोन के हाथ से छूटकर किसी सख्त चीज से टकराने पर सबसे पहले इसका किनारा ही टूटता है।

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    इस महंगे नुकसान से बचने के लिए अगर आप स्क्रीन प्रोटेक्टर या टेम्पर्ड ग्लास लगाने की सोचें, तो वहां भी निराशा ही हाथ लगती है। कर्व्ड डिजाइन की वजह से कोई भी स्क्रीन गार्ड इस पर पूरी तरह से फिट नहीं बैठता और किनारों से उठने लगता है। आसान शब्दों में कहें तो, लाख कोशिशों के बाद भी इस तरह की स्क्रीन को टूटने से बचाना लगभग नामुमकिन था। यही कारण है कि मोबाइल कंपनियों ने धीरे-धीरे फ्लैट स्क्रीन की तरफ वापस लौटना ही सही समझा।

    2. एक्सीडेंटल टच बन गया सिरदर्द

    कर्व्ड डिस्प्ले की एक और बड़ी समस्या थी एक्सीडेंटल टच। फोन को सामान्य तरीके से पकड़ने पर भी कई बार हथेली या उंगलियां स्क्रीन के किनारों को छू लेती थीं। इस वजह से अनचाहे एप खुल जाते थे, गलत कमांड एक्टिव हो जाती थीं या स्क्रीन पर ऐसे फंक्शन शुरू हो जाते थे जिनकी जरूरत ही नहीं होती थी। रोजमर्रा के इस्तेमाल में यह परेशानी कई यूजर्स के लिए झुंझलाहट का कारण बन गई।

    3. धूप में खराब हो जाता था एक्सपीरियंस

    कर्व्ड स्क्रीन का एक नुकसान ग्लेयर यानी लाइट रिफ्लेक्शन भी था। दिन के समय या तेज रोशनी में फोन इस्तेमाल करते वक्त स्क्रीन के मुड़े हुए किनारों पर रोशनी परावर्तित होती थी। इससे कंटेंट देखने में दिक्कत आती थी और कई बार स्क्रीन पर मौजूद जानकारी साफ दिखाई नहीं देती थी। खासकर बाहर इस्तेमाल के दौरान यह समस्या और ज्यादा महसूस होती थी।

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    क्या मुड़ी हुई स्क्रीन का दौर पूरी तरह खत्म हो गया है?

    भले ही ज्यादातर कंपनियों ने कर्व्ड डिस्प्ले से मुंह मोड़ लिया है, लेकिन यह तकनीक अभी पूरी तरह से इतिहास नहीं बनी है। मोटोरोला आज भी अपनी 'एज सीरीज' के स्मार्टफोन में कर्व्ड डिस्प्ले का इस्तेमाल कर रही है। इसके साथ ही, टेक बाजार में यह चर्चा भी जोरों पर है कि दिग्गज कंपनी एपल अगले साल अपनी iPhone 20 सीरीज को कर्व्ड डिस्प्ले के साथ लॉन्च कर सकती है। अगर एपल ऐसा कोई कदम उठाती है, तो इसमें कोई शक नहीं कि बाकी एंड्रॉइड कंपनियां भी इस पुराने ट्रेंड को एक बार फिर से अपनाना शुरू कर देंगी।

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