ओटीटी एप पर नियम बनाने में और समय लेगा ट्राई, सुरक्षा पर रहेगा फोकस

भारत में तेजी से बढ़ रहे ओवर द टॉप (ओटीटी) कारोबार पर नियम बनाने के लिए दूरसंचार नियामक ने कुछ और समय लेने की बात कही है। ट्राई के एक अधिकारी ने बुधवार को बताया कि वैध रोकथाम और सुरक्षा जैसे मुद्दों पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
अधिकारी के मुताबिक, ट्राई अभी ओटीटी से जुड़े अंतरराष्ट्रीय नियमन और कानूनों का अध्ययन कर रहे हैं और नए मानकों को अंतिम रूप देने में करीब एक महीने का समय लग सकता है। ट्राई का विशेष जोर सुरक्षा से जुड़ी सेवाओं पर है। स्काइप, वाइबर, व्हाट्सएप और हाइक जैसे कई पसंदीदा एप हैं, जो ओटीटी सेवाओं का सबसे ज्यादा इस्तेमाल करते हैं।
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ट्राई के अधिकारी ने कहा कि नियामक इस बारे में व्यवहारिक पहुंच बनाना चाहता है। ओटीटी के इस्तेमाल ने दूरसंचार कंपनियों के कारोबार को काफी सहूलियत दी है। इससे डाटा खपत बढ़ने के साथ उपभोक्ताओं की संख्या में भी तेजी से इजाफा हो रहा है।
ट्राई के अधिकारी ने कहा कि अभी हमारा सबसे ज्यादा जोर सुरक्षा के मुद्दे पर है और हम इस बात की पड़ताल कर रहे हैं कि दुनिया के अन्य देशों में इसे लेकर किस तरह के कानून बनाए गए हैं। शुरुआत में यह समस्या काफी गंभीर थी, लेकिन अब इसमें काफी कुछ सुधार किया गया है।
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गंभीरता से पड़ताल कर रही सरकार
ट्राई ने पिछले साल ओटीटी सेवाओं के मुद्दे पर सभी सेवा प्रादाताओं को नियामकीय ढांचे से जुड़ा सुझाव पत्र जारी किया था। इसके बाद सरकार ने कई ओटीटी प्लेटफॉर्म की स्क्रूटनी शुरू कर दी और आईटी नियमों के वर्तमान कानून में बदलाव पर भी विमर्श शुरू कर दिया है, ताकि इन फर्मों की जिम्मेदारी तय की जा सके। सरकार को सबसे ज्यादा चिंता इस प्लेटफॉर्म से गलत खबरें और सूचनाओं के प्रसारित होने को लेकर है।
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