साइबर फ्रॉड से निपटने के लिए एकजुट हुईं ये सात कंपनियां, गूगल से भी लेंगी मदद

देश में तकनीक के बढ़ने के साथ ऑनलाइन धोखाधड़ी (Online Fraud) भी तेजी से बढ़ रही है। हैकर्स लोगों को ठगने के लिए रोज नए-नए तरीके निकाल रहे हैं। ऐसे में आए दिन साइबर क्राइम (Cyber Crime) की घटनाएं सामने आ रही हैं, जिनमें लोगों को खातों से लाखों रुपये उड़ा लिए जाते हैं। इस तरह के मामलों पर लगाम लगाने के लिए मेक माई ट्रिप ग्रुप, पेटीएम, ओयो, स्विगी और ऊबर ने हाथ मिलाया है। रिपोर्ट के मुताबिक देश में साइबर क्राइम 22, फंड ट्रांसफर 15, डाटा चोरी 15, पहचान चोरी 12 और कार्ड स्किमिंग 17 फीसदी तक बढ़ गई है।
रिपोर्ट के अनुसार, इन कंपनियों ने साइबर क्राइम के मुद्दे को लेकर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के साथ बैठक की है। इस बैठक में कंपनियों के साथ आरबीआई ने ऑनलाइन धोखाधड़ी को रोकने को लेकर चर्चा की थी। हैकर्स साइबर क्राइम के लिए फर्जी टोल-फ्री नंबर्स और सीरियल बैंक अकाउंट नंबर अकाउंट जेनेरेटर्स जैसे तरीकों का उपयोग करते हैं। इसके अलावा कंपनियों ने 4,000 सिम कार्ड और 350 से 400 बैंक अकाउंट नंबर आरबीआई, एसबीआई और टेलीकॉम कंपनियों के साथ साझा की हैं जिनके जरिए फ्रॉड हुए हैं। दूसरे शब्दों में कहें तो इन सभी नंबर्स को ऑनलाइन धोखाधड़ी के लिए इस्तेमाल किया गया है।
मेक माई ट्रिप ग्रुप से लेकर ऊबर तक ने साइबर क्राइम पर लगाम लगाने के लिए दिग्गज सर्च इंजन कंपनी गूगल से मदद की मांग की है। हैकर्स गूगल के फीचर का उपयोग कर अपने नकली टोल-फ्री नंबर को सर्च लिस्ट में सबसे ऊपर दिखाते हैं। इसकी वजह से आम ग्राहक फ्रॉड के झांसे में फस जाते हैं। इसके अलावा कई हैकर्स तो बैंक की नकली साइट बनाकर आपराधिक गतिविधियों को अंजाम देते हैं।
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