गूगल पर इस बार भी लग सकता है 20 हजार करोड़ रुपये का जुर्माना

पिछले साल की तरह यूरोपियन यूनियन ने गूगल पर इस साल भी 20 हजार करोड़ का जुर्माना लगा सकता है। गूगल पर आरोप है कि वह मोबाइल निर्माता कंपनियों को सॉफ्टवेयर देती है और साथ ही अपने वेब ब्राउजर गूगल क्रोम जैसे ऐप को फोन में डिफॉल्ट रूप से देने के लिए बाध्य करती है। बता दें कि एंड्रॉयड ऑपरेटिंग सिस्टम गूगल का ही है। गूगल को इसी हफ्ते 20 हजार करोड़ रुपये जुर्माना के रूप में देना पड़ सकता है।
यूरोपियन यूनियन में मोबाइल निर्माता कंपनियों ने शिकायत की थी कि गूगल के दबाव में वे अपने फोन में अन्य कंपनियों के ब्राउजर या एप इंस्टॉल नहीं कर पाती हैं। वहीं गूगल ने कहा है कि वह फोन निर्माता कंपनियों पर ऐसा कोई दबाव नहीं डालती है।
गौरतलब है कि यूरोपियन कमीशन को गूगल के सालाना टर्नओवर के 10% तक जुर्माने का अधिकार है। पिछले साल गूगल का टर्नओवर 110 अरब डॉलर था और उस पर 11 अरब डॉलर यानि करीब 75,000 करोड़ तक का जुर्माना लग सकता है जो कि पिछले साल लगे जुर्माने से 2.8 अरब डॉलर यानि करीब 19,000 करोड़ से भी ज्यादा होगा।
दुनिया में बिकने वाले 80% स्मार्टफोन एंड्रॉयड आधारित
बता दें कि दुनियाभर में बिकने 80 प्रतिशत स्मार्टफोन एंड्रॉयड वाले हैं और एंड्रॉयड के साथ ईमेल, गूगल मैप, सर्च और ब्राउजर लेना जरूरी होता है। यूरोप में गूगल के कारोबार की बात करें तो वहां के एंड्रॉयड फोन के बाजार में गूगल की 74% हिस्सेदारी है और सर्ज इंजन में मार्केट शेयर 97% है। इससे पहले गूगल को रूस में भी जुर्माना देना पड़ा था और उस दौरान गूगल का मार्केट शेयर 63% से घटकर 52% रह गया था
आगे क्या हो सकता है
गूगल को फोन निर्माताओं के साथ समझौता खत्म करने के लिए कहा जा सकता है और अगर ऐसा होता है तो एंड्रॉयड फोन गूगल के एप के बिना ही लॉन्च होंगे। साथ ही ऐसा होने पर माइक्रोसॉफ्ट के बिंग और फायरफॉक्स जैसे सर्च इंजन को फायदा होगा।
गौरतलब है कि 2017 में कई सारी अमेरिकी कंपनियों पर यूरोप में जुर्माना लगाया गया था। उस दौरान गूगल पर 19,000 करोड़, इंटेल 7,500 करोड़, चिपसेट निर्माता कंपनी क्वॉलकॉम पर 6,800 करोड़ और माइक्रोसॉफ्ट पर 3,400 करोड़ रुपये का जुर्माना लगा था।