Economic Survey 2026: एआई में अमेरिका-चीन की नकल नहीं करेगा भारत, आर्थिक सर्वे में दिखा देश का AI विजन
Economic Survey 2025-26:
आर्थिक सर्वे 2025-26 ने भारत के लिए एक नई और व्यावहारिक AI रणनीति का ब्लूप्रिंट पेश किया है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत को एआई के क्षेत्र में अमीर देशों की नकल करने के बजाय अपनी जरूरतों और संसाधनों के हिसाब से 'एप्लीकेशन-बेस्ड' AI पर ध्यान देना चाहिए। सर्वे में उत्पादन में घट रही इंसानी हिस्सेदारी पर भी चेतावनी दी गई है।

विस्तार
दुनियाभर में इस समय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर एक होड़ मची है। हर देश चाहता है कि उसके पास सबसे शक्तिशाली एआई मॉडल हो। लेकिन क्या भारत को भी उसी रास्ते पर चलना चाहिए जिस पर अमेरिका या चीन चल रहे हैं? संसद में पेश किए गए आर्थिक सर्वे 2025-26 ने इस पर एक बेहद चौंकाने वाला लेकिन तार्किक नजरिया पेश किया है। सर्वे का कहना है कि अगर भारत आंख मूंदकर दुनिया के बड़े एआई मॉडल्स के पीछे भागेगा, तो यह घाटे का सौदा साबित हो सकता है। आखिर भारत के लिए एआई का भविष्य कैसा होगा? आइए समझते हैं।
अमीर देशों की नकल करना पड़ेगा महंगा
आर्थिक सर्वे में साफ कहा गया है कि बड़े एआई मॉडल बनाना बहुत महंगा काम है। इसके लिए अरबों डॉलर का निवेश, दुनिया की सबसे तेज कंप्यूटर चिप्स (GPUs) और भारी मात्रा में बिजली की जरूरत होती है। वर्तमान में, दुनिया के 70% डेटा सेंटर अमीर देशों में हैं, जबकि भारत की हिस्सेदारी केवल 3% है।
सर्वे का तर्क है कि भारत के पास पूंजी और कंप्यूट पावर की कमी है। ऐसे में 'फ्रंटियर मॉडल्स' बनाने में अपनी ऊर्जा बर्बाद करने के बजाय, हमें उन एआई टूल्स पर ध्यान देना चाहिए जो सीधे तौर पर आम लोगों की समस्याओं को सुलझा सकें। इसे सर्वे ने 'बॉटम-अप' यानी नीचे से ऊपर की ओर बढ़ने वाली रणनीति कहा है।
खेती और अस्पताल में दिखेगा एआई का कमाल
भारत की असली ताकत उसके डेटा और उसके लोगों में है। सर्वे ने सिफारिश की है कि भारत को एआई का इस्तेमाल कृषि, स्वास्थ्य सेवा, मैन्युफैक्चरिंग और सरकारी कामकाज को बेहतर बनाने के लिए करना चाहिए। उदाहरण के लिए, एक ऐसा एआई जो किसान को उसकी फसल की बीमारी के बारे में बताए, वह किसी भारी-भरकम चैटबॉट से ज्यादा कीमती है। भारत के पास 2025 के अंत तक 100 करोड़ से ज्यादा ब्रॉडबैंड यूजर्स हैं, जो एआई के लिए सबसे जरूरी ईंधन यानी डेटा पैदा कर रहे हैं।
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रोजगार और मशीनीकरण की चुनौती
सर्वे में एक गंभीर चेतावनी भी दी गई है। रिपोर्ट के अनुसार, 2022 के बाद से उत्पादन में इंसानी मेहनत की हिस्सेदारी कम होने लगी है। इसका मतलब है कि कंपनियां अब काम के लिए मशीनों और एआई पर ज्यादा निर्भर हो रही हैं। अगर हमने अपने वर्कफोर्स को समय रहते नई स्किल्स नहीं सिखाईं, तो भविष्य में रोजगार के संकट खड़े हो सकते हैं। भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी युवा आबादी है, और एआई को इस तरह लागू करना होगा कि वह इंसानों को रिप्लेस करने के बजाय उनकी मदद करे।
भारत की सबसे बड़ी ताकत है डेटा
सर्वे ने डेटा को भारत का 'रणनीतिक संसाधन' बताया है। रिपोर्ट में प्रस्ताव दिया गया है कि जो कंपनियां भारत के डेटा से करोड़ों रुपये कमा रही हैं, उन्हें बदले में भारतीय एआई ईकोसिस्टम में योगदान देना चाहिए। यह योगदान रिसर्च फंड, कंप्यूटर पावर शेयरिंग या लोगों को ट्रेनिंग देने के रूप में हो सकता है।
एआई के लिए कठोर कानूनों से बचने की सलाह
एआई को कंट्रोल करने के लिए सर्वे ने यूरोप जैसे कड़े और जटिल कानूनों से बचने की सलाह दी है। सर्वे का मानना है कि बहुत ज्यादा पाबंदियां इनोवेशन का गला घोंट सकती हैं। इसके बजाय, भारत को एक 'जोखिम-आधारित' तरीका अपनाना चाहिए। सरकार जल्द ही एक 'एआई सेफ्टी इंस्टीट्यूट' बनाने की तैयारी में है, जो यह सुनिश्चित करेगा कि एआई का इस्तेमाल सुरक्षित हो और इससे किसी को नुकसान न पहुंचे।
कुल मिलाकर, आर्थिक सर्वे 2025-26 का संदेश साफ है कि भारत को एआई की रेस में अपनी रफ्तार खुद तय करनी होगी। हमें अपनी चुनौतियों को अपनी ताकत बनाना होगा, तभी हम इस डिजिटल क्रांति का असली फायदा उठा पाएंगे।
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