OpenAI ने लॉन्च किया 'Prism': वैज्ञानिकों को रिसर्च पेपर लिखने और जांचने में मदद करेगा नया AI टूल

नीतीश कुमार
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीनीतीश कुमार
Thu, 29 Jan 2026 07:06 AM IST
सार

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब वैज्ञानिक रिसर्च की रफ्तार बढ़ाने को तैयार है। OpenAI ने Prism नाम का नया AI वर्कस्पेस लॉन्च किया है, जो रिसर्च पेपर लिखने, दावे जांचने और पुराने अध्ययनों को समझने में वैज्ञानिकों की मदद करेगा।

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ओपनएआई ने लॉन्च किया 'प्रिज्म' एआई मॉडल - फोटो : OpenAI

    विस्तार

    आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब सिर्फ चैट करने या कोड लिखने तक सीमित नहीं रह गया है। रिसर्च की दुनिया में भी AI तेजी से अपनी जगह बना रहा है। इसी कड़ी में OpenAI ने Prism नाम का एक नया वैज्ञानिक वर्कस्पेस लॉन्च किया है, जिसे कोई भी ChatGPT अकाउंट वाला यूजर मुफ्त में इस्तेमाल कर सकता है।

    क्या है Prism और क्यों है खास?

    'प्रिज्म' को आप एक ऐसे 'स्मार्ट वर्ड प्रोसेसर' के रूप में देख सकते हैं जो न केवल टाइपिंग में मदद करता है, बल्कि खुद भी एक शोधकर्ता की तरह सोच सकता है। यह OpenAI के सबसे आधुनिक मॉडल GPT-5.2 पर आधारित है।

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    इसकी मदद से वैज्ञानिक अपने दावों की जांच कर सकते हैं, अपनी भाषा को और बेहतर बना सकते हैं और पुराने शोधों को पलक झपकते ही खोज सकते हैं। OpenAI का कहना है कि यह टूल खुद से रिसर्च नहीं करेगा, बल्कि वैज्ञानिकों के काम करने की गति को बढ़ाएगा। यह ठीक उसी तरह जैसे कोडिंग करने वालों के लिए विशेष AI टूल काम करते हैं।

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    ChatGPT पर रिसर्च से जुड़े सवालों की बाढ़

    OpenAI के अनुसार, ChatGPT जैसे उसके कंज्यूमर प्रोडक्ट्स पर हार्ड साइंस से जुड़े सवाल तेजी से बढ़े हैं। हर हफ्ते औसतन 84 लाख मैसेज एडवांस्ड साइंटिफिक टॉपिक्स पर आते हैं, हालांकि इनमें से कितने सवाल पेशेवर वैज्ञानिकों के होते हैं, यह कंपनी ने साफ नहीं किया है।

    अकादमिक दुनिया में भी AI का इस्तेमाल बढ़ रहा है। गणित के क्षेत्र में AI मॉडल्स की मदद से कई पुराने एर्डोस समस्याओं के हल सामने आए हैं। वहीं दिसंबर में प्रकाशित एक स्टैटिस्टिक्स पेपर में GPT-5.2 Pro की मदद से सांख्यिकी सिद्धांत के एक अहम सिद्धांत के नए प्रूफ तैयार किए गए, जिनकी जांच इंसानी शोधकर्ताओं ने की।

    Prism की कुछ खास खूबियां

    • वैज्ञानिक दस्तावेजों को लिखने के लिए इस्तेमाल होने वाले 'LaTeX' सिस्टम के साथ यह गहराई से जुड़ा है, जिससे कठिन फॉर्मूले लिखना आसान हो जाता है।
    • शोधकर्ता अक्सर बोर्ड पर चित्र बनाकर अपनी बात समझाते हैं। Prism एआई की विजुअल क्षमता का इस्तेमाल करके उन चित्रों को डिजिटल डायग्राम में बदल सकता है।
    • जब आप Prism में चैट विंडो खोलते हैं, तो एआई को आपके पूरे प्रोजेक्ट की जानकारी होती है। इससे वह जो भी जवाब देता है, वह आपके काम से पूरी तरह जुड़ा और सटीक होता है।

    OpenAI का मानना है कि जैसे बेहतर मॉडल और गहरे वर्कफ्लो इंटीग्रेशन ने सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग को नई रफ्तार दी, वैसे ही Prism आने वाले समय में वैज्ञानिक रिसर्च को भी नई दिशा दे सकता है।

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