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ईपीएफ बनाम पीपीएफ: ईपीएफ और पीपीएफ अकाउंट में क्या अंतर है? जानें किसमें मिलता है अधिक ब्याज

Mon, 07 Sep 2026 05:50 PM IST
Shikhar Baranawal यूटिलिटी डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
यूटिलिटी डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Shikhar Baranawal Updated Mon, 07 Sep 2026 05:50 PM IST
सार
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Provident Fund Comparison: बहुत से लोग पीपीएफ में निवेश करने के बारे में सोचते हैं, इसका सबसे अच्छा और बड़ा कारण ये है कि इसमें हर महीने कोई मोटी रकम जमा करने की जरूरत नहीं होती है। वहीं कुछ लोग अपनी सैलरी से ईपीएफ कटवाते हैं, जिससे उनके लिए भविष्य में एक मोटी रकम तैयार होती है, जो बुढ़ापे में या उनके जरूरत पर काम आ सकती है।

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EPF vs PPF Account: Interest Rates, Tax Benefits and Key Differences Explained in hindi
ईपीएफ बनाम पीपीएफ - फोटो : AI

EPF vs PPF Interest Rates: अपने भविष्य और रिटायरमेंट को सुरक्षित करने के लिए बचत करना बेहद जरूरी है। भारत में भविष्य निधि से जुड़ी दो योजनाएं सबसे ज्यादा लोकप्रिय हैं ईपीएफ यानी कर्मचारी भविष्य निधि और पीपीएफ यानी पब्लिक प्रॉविडेंट फंड। हालांकि, कई लोग अक्सर इन दोनों योजनाओं के बीच के अंतर और मिलने वाले ब्याज को लेकर उलझन में रहते हैं। 



इन दोनों के बीच की अंतर की बात करें तो मुख्य रूप से नौकरीपेशा लोगों के लिए ईपीएफ और सभी नागरिकों के लिए पीपीएफ का विकल्प होता है। आइए इस लेख में आसान भाषा में समझते हैं कि ईपीएफ और पीपीएफ में से किसमें ज्यादा ब्याज मिलता है और आपके लिए कौन सी योजना ज्यादा फायदेमंद है।

EPF vs PPF Account: Interest Rates, Tax Benefits and Key Differences Explained in hindi
ब्याज दर की तुलना - फोटो : AdobeStock

ब्याज दर की तुलना

  • ईपीएफओ यानी कर्मचारी भविष्य निधि संगठन द्वारा निर्धारित ईपीएफ की वर्तमान ब्याज दर आमतौर पर 8.15% से 8.25% के आसपास रहती है।
  • वहीं पीपीएफ में सरकार द्वारा तय ब्याज दर फिलहाल 7.1% प्रति वर्ष है, जिसकी समीक्षा हर तिमाही होती है।
  • ब्याज दर के मामले में ईपीएफ का पलड़ा पीपीएफ से भारी और ज्यादा फायदेमंद होता है।
EPF vs PPF Account: Interest Rates, Tax Benefits and Key Differences Explained in hindi
Investment - फोटो : AdobeStock

निवेश की पात्रता और दायरा

  • ईपीएफ के नियम की बात करें तो यह सिर्फ संगठित क्षेत्र के नौकरीपेशा कर्मचारियों के लिए उपलब्ध है।
  • वहीं पीपीएफ की बात की जाए तो भारत का कोई भी नागरिक (चाहे स्वरोजगार हो, छात्र हो या बिजनेसमैन) पीपीएफ खाता खोल सकता है।
  • पीपीएफ खाता आप किसी भी पोस्ट ऑफिस या बैंक में आसानी से खुलवा सकते हैं।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला प्रिंट

अंशदान और नियोक्ता का योगदान

  • ईपीएफ की अच्छी बात यह है कि इसमें जितना पैसा आपकी बेसिक सैलरी से कटता है उतना ही योगदान आपकी कंपनी भी करती है।
  • सामान्य तौर पर ईपीएफ में आपकी बेसिक सैलरी का 12% रुपया कटता है।
  • इसमें पूरा पैसा आपको ही जमा करना होता है, जहां न्यूनतम 500 रुपये और अधिकतम 1.5 लाख रुपये सालाना जमा कर सकते हैं।
  • चुकी ईपीएफ में कंपनी का भी अंशदान मिलता है इसलिए फंड में तेजी से बढ़ोतरी होती है।
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टैक्स लाभ और निकासी के नियम - फोटो : Adobe Stock

टैक्स लाभ और निकासी के नियम

  • दोनों ही योजनाओं में धारा 80C के तहत टैक्स छूट और टैक्स-फ्री रिटर्न का लाभ मिलता है।
  • मैच्योरिटी समय की बात करें तो पीपीएफ में 15 साल का लॉक-इन पीरियड होता है, जबकि ईपीएफ नौकरी बदलने या रिटायरमेंट तक चलता है।
  • देखा जाए तो नौकरीपेशा के लिए ईपीएफ सबसे बेहतर है, जबकि गैर-नौकरीपेशा के लिए पीपीएफ ही सबसे बेहतरीन विकल्प है।
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