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Dengue: बारिश के मौसम में बढ़ रहा डेंगू का खतरा, बुखार के साथ ये लक्षण दिखें तो तुरंत जाएं डॉक्टर के पास

Fri, 21 Aug 2026 08:21 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Fri, 21 Aug 2026 08:21 PM IST
सार
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डेंगू में कमजोरी होना सामान्य है। लेकिन अगर मरीज अचानक इतना कमजोर हो जाए कि उठने-बैठने में परेशानी हो, बहुत ज्यादा सुस्ती या बेचैनी महसूस हो या उसकी हालत तेजी से बिगड़ती नजर आए तो डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना चाहिए।
 

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dengue risk in monsoon symptoms of dengue fever to notice early
डेंगू के कारण होने वाली समस्याएं - फोटो : Amarujala.com/AI

राजधानी दिल्ली-एनसीआर सहित देश के ज्यादातर हिस्सों में इन दिनों मौसमी बुखार, सर्दी-जुकाम के साथ स्वाइन फ्लू की दिक्कत देखी जा रही है। बारिश के इस मौसम में स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों को मच्छरों के कारण होने वाली बीमारियों को लेकर भी अलर्ट करते रहे हैं। जुलाई-अक्तूबर के महीने में डेंगू-मलेरिया जैसी मच्छरों के काटने से होने वाली बीमारियों के कारण अस्पतालों में भीड़ बढ़ने लग जाती है।



डॉक्टर कहते हैं, शुरुआत में डेंगू और सामान्य वायरल बुखार में फर्क करना आसान नहीं होता। तेज बुखार, सिरदर्द, शरीर टूटने, कमजोरी और कभी-कभी उल्टी जैसी शिकायतें दोनों में हो सकती हैं। यही वजह है कि कई लोग डेंगू को सामान्य बुखार समझकर घर पर ही इंतजार करते रहते हैं।

लेकिन डेंगू कई बार खतरनाक रूप भी ले सकती है जिसको लेकर सभी लोगों को अलर्ट रहना चाहिए। आइए जानते हैं कि शरीर में कौन से संकेत दिखते ही तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए?

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डेंगू के कारण होने वाली समस्याएं - फोटो : Amarujala.com/AI

डेंगू और इसका खतरा

डेंगू संक्रमित एडीज मच्छर के काटने से फैलने वाली बीमारी है। यह मच्छर दिन के समय ज्यादा काटता है। बारिश के बाद जमा साफ पानी इनके पनपने के लिए अच्छी जगह बन जाता है। इसीलिए डॉक्टर बारिश के दिनों में घर के आसपास साफ-सफाई रखने और पानी न जमा होने देने की सलाह देते हैं। 
 

  • डॉक्टर कहते हैं, डेंगू की शुरुआत अक्सर अचानक तेज बुखार से हो सकती है।
  • इसके साथ सिरदर्द, आंखों के पीछे दर्द, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द, जी मिचलाने, उल्टी और शरीर पर लाल चकत्ते जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं।
  • कुछ लोगों को बहुत ज्यादा थकान भी महसूस होती है। लेकिन सिर्फ लक्षण देखकर यह पक्का नहीं कहा जा सकता कि बुखार डेंगू ही है। 
  • वायरल बुखार और दूसरी संक्रमण वाली बीमारियों में भी मिलते-जुलते लक्षण हो सकते हैं। इसलिए तेज बुखार या डेंगू का शक होने पर डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी हो जाता है।
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डेंगू में पेट दर्द की समस्या - फोटो : Freepik.com

बुखार के साथ पेट में तेज दर्द की समस्या

डेंगू में बुखार और शरीर में दर्द के साथ पेट दर्द भी हो सकता है। गंभीर स्थितियों में डेंगू में शरीर की छोटी रक्त नलियों से लीकेज जैसी समस्या हो सकती है। इससे शरीर का संतुलन बिगड़ सकता है और गंभीर स्थिति पैदा हो सकती है। इसलिए डेंगू के मरीज को अगर पेट में तेज दर्द, पेट दबाने पर ज्यादा दर्द या लगातार बेचैनी हो तो घर पर इंतजार करने के बजाय डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना चाहिए।

तेजी से सांस चलने की दिक्कत

अगर बुखार वाले मरीज की सांस सामान्य से बहुत तेज चल रही है या सांस लेने में परेशानी महसूस हो रही है, तो इसपर भी गंभीरता से ध्यान देने की जरूरत है। गंभीर स्थिति में डेंगू में शरीर में रक्त का प्रवाह बाधित होने जैसी समस्याएं हो सकती हैं, जिससे सांस लेने में परेशानी हो सकती है। तेजी से सांस चलने को गंभीर डेंगू के संकेतों में से एक माना जाता है। 

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नाक से खून आना - फोटो : Adobe Stock

नाक या मसूड़ों से खून आए तो तुरंत सावधान

डेंगू के गंभीर मामलों में ब्लीडिंग की समस्या हो सकती है। नाक और मसूड़ों से खून आना, उल्टी या मल में खून दिखाई देना ऐसे संकेत हैं जिन्हें बिल्कुल नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

अगर आपको डेंगू या तेज बुखार है और साथ में शौच या नाक से खून आने की समस्या शुरू हुई है, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है। गंभीर डेंगू में अत्यधिक रक्तस्राव जानलेवा हो सकता है।

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डेंगू का इलाज कैसे होता है? - फोटो : Freepik.com

डेंगू में क्या सावधानी रखें?

डॉक्टर कहते हैं, डेंगू की कोई ऐसी खास दवा नहीं है जो सीधे वायरस को खत्म कर दे। इसके इलाज में मुख्य रूप से लक्षणों को कंट्रोल करने, शरीर में पर्याप्त तरल बनाए रखने और रक्तस्राव के खतरे को कम करने पर ध्यान दिया जाता है। बुखार और दर्द के लिए डॉक्टर की सलाह के अनुसार पैरासिटामोल दी जा सकती है। एस्पिरिन और आइबुप्रोफेन जैसी दवाओं से बचना चाहिए, क्योंकि ये ब्लीडिंग का खतरा बढ़ा सकती हैं।





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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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