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                                                                           घोर निर्जन में परिस्थिति ने दिया है डाल!
याद आता है तुम्हारा सिंदूर तिलकित भाल!
कौन है वह व्यक्ति जिसको चाहिए न समाज?
कौन है वह एक जिसको नहीं पड़ता दूसरे से काज?
चाहिए किसको नहीं सहयोग?
चाहिए किसको नहीं सहवास?
...और पढ़ें
20 hours ago
                                                                           'हिंदी हैं हम' शब्द शृंखला में आज का शब्द है- अर्चा, जिसका अर्थ है- पूजा, प्रतिमा। प्रस्तुत है जानकीवल्लभ शास्त्री की कविता- यह पीर पुरानी हो !

यह पीर पुरानी हो !
मत रहो हाय, मैं, जग में मेरी एक कहानी हो।

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21 hours ago
                                                                           कभी गोकुल कभी राधा कभी मोहन बन के
मैं ख़यालों में भटकती रही जोगन बन के

हर जनम में मुझे यादों के खिलौने दे के
वो बिछड़ता रहा मुझ से मिरा बचपन बन के

मेरे अंदर कोई तकता रहा रस्ता उस का
मैं हमेशा के लिए...और पढ़ें
21 hours ago
                                                                           सच बोलने के तौर-तरीक़े नहीं रहे
पत्थर बहुत हैं शहर में शीशे नहीं रहे

वैसे तो हम वही हैं जो पहले थे दोस्तो
हालात जैसे पहले थे वैसे नहीं रहे

ख़ुद मर गया था जिन को बचाने में पहले बाप
अब के फ़साद में वही...और पढ़ें
21 hours ago
                                                                           ज़ख्म वह अब तलक नासाज़ है।
किंतु रोता नहीं, जांबाज़ है।

यार! तुम और मत खोदो उसे;
वहाँ नासूर का अब राज है।

दिये हैं ज़ख्म काफ़ी बज़्म ने,
किंतु तेरा दिया सरताज़ है।

भुलाया है बहुत कुछ अब तलक...और पढ़ें
1 hour ago
                                                                           तुम्हारी जुल्फों की तारीफ करते करते मेरे अल्फ़ाज़ कम पर गये,
जब मैं ने तुम्हें साड़ी देखा तो मेरे होशो हवास उड़ गए...और पढ़ें
1 hour ago
                                                                           घमंड में इंसान
ख़ुद को सबसे,
जुदा समझने लगता है।

जो ज़मीं पर खिलने के
क़ाबिल नहीं होते,
वो भी ख़ुद को,
ख़ुदा समझने लगते हैं।।

-ममता तिवारी...और पढ़ें
1 hour ago
                                                                           किसी को ध्यान ही आया न रुत बदलने का
था इंतिज़ार हर इक को हवा के चलने का

वही पुराने मुसाफ़िर मिले नई रह पर
था इफ़्तिख़ार हमें जिन से बच निकलने का

अब एक दूसरे को मुड़ के देखते भी नहीं
कभी था ज़ो'म...और पढ़ें
15 minutes ago
                                                                           कौन कहता है जिंदगी एक बार मिलती है,तेरे बहाने वो मुझे हर रोज मिलती है,
कौन कहता है मौत एक बार मिलती है, तेरे बहाने वो मुझे हर रोज मिलती है...और पढ़ें
3 hours ago
                                                                           करता हूं मैं स्वदेश से प्यार
करता हूं मैं स्वभेष से प्यार
करता हूं मैं अपनी संस्कृति से प्यार
करता हूं मैं अपने संस्कार से प्यार
करता हूं मैं अपने इतिहास से प्यार
करता हूं मैं अपने साहित्य से प्यार
है हमारी स...और पढ़ें
1 hour ago
                                                                           मैं ने अपनी मर्जी नहीं बदला है अपने आप को,
तुम ने मजबूर कर दिया मुझे बदलने पर...और पढ़ें
1 hour ago
                                                                           हर इक बात के मायने नहीं होते
सतह पर रहा करतीं हैं कुछ बातें
चोट करती हैं कुछ गहरा बहुत
उतर जाती हैं दिल में कुछ बातें .
-दिनेश चौहान...और पढ़ें
2 hours ago
                                                                           है ईमानदार, इसीलिए तन्हा है अकेला है
कितना सीधा भोला है

इसकी ईमानदारी का निकला यही बोल
सीधा तो है ही, है बड़ा बकलोल

जितने मिले सब गुरु, मिला ना कोई चेला
सबसे उपदेश के सिवा उसे कुछ नही मिला
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3 hours ago
                                                                           मंजुल मंजुल देखि परै सिगरी वसुधा तन पै हरियाली।
धानन का रँग पीत हुआ जनु स्वर्ण छटा छिटकी मतवाली।
है सरदी गरमी गबड़ी नभ में दिन रात दिखै उजियाली।
मारग सूखि गए सब ही मिटि गै बरिखा कचड़ा बदहाली।
-इन्द्र प्रसाद लोधी 'रत्ने...और पढ़ें
2 hours ago
                                                                           करवा चौथ का दिन है आया,
सोलह श्रृंगार करने का सम्मान मैने पाया,
माँग में सिंदूर सजा कर,
हाथों में मेहंदी लगा कर,
बालों में गजरे सजा कर,
न भूख लगी है, न प्यास,
सिर्फ तुम्हारे लम्बी उम्र की ,
मन में कामन...और पढ़ें
3 hours ago
                                                                           वो मेहनत ही क्या, जिसमें कठिनाइयाँ न हों,
वो मंज़िल ही क्या, जिसमें संघर्ष न हो,
वो दिन ही क्या, जिसमें प्रकाश न हो,
वो मित्र ही क्या, जिस पर विश्वास न हो,
वो प्रकृति ही क्या, जिसमें हरियाली न हो,
वह विद्यालय ही क्य...और पढ़ें
3 hours ago
                                                                           जब आम बहुत बौराए थे, भौंरों ने कुछ गीत सुनाए,
महकी-महकी बगिया में फिर, मौसम ने संदेश सुनाए।
डाली-डाली झूम उठी थी, पत्तों ने सुर ताल मिलाए,
धरती ने चादर ओढ़ी थी, अम्बर ने सपने बरसाए।

कोयल ने जब तान छेड़ी, पुरवाई भी...और पढ़ें
2 hours ago
                                                                           तू सच्चे प्रेम की भाषा है ,
तू मेरे जीवन की आशा है
तेरे प्रेम के बारे मे ,गुणगान करने को शब्द नहीं
तेरे प्रेम के बिना, जीवन का कोई अस्तित्व नहीं
सच्चे प्रेम की भाषा, मैने तुमसे ही सीखी है
जीने की अभिलाषा, मैने तुमसे...और पढ़ें
1 hour ago
                                                                           सच्चा प्रेम नहीं है केवल, रूप-रंग का आकर्षण,
यह तो दो आत्माओं का, एक पवित्र समर्पण।
इसमें न कोई दिखावा है, न कोई झूठा वादा है,
यह तो गंगा जल जैसा, बिलकुल पावन और सादा है।
जहाँ न कोई शर्त छुपी हो, ना ही कोई बंधन हो,
...और पढ़ें
1 hour ago
                                                                           मैं चाह कर जरा भी संगदिल नहीं होता
फूलों की ओर देखूं मुनासिब नहीं होता
कितने दिनों से दिल भी मेरा मुझसे खफा है
कुल दिन हुए ये मुझसे मुताखिब नहीं होता
गर्दिश जमाने भर की हँसा करती है मुझपर
कुछ जिंदगी में मेरे मुताबिक...और पढ़ें
2 hours ago
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