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जीवन का मूल दर्शन

Jivan ka mul darshan
                
                                                         
                            वो मेहनत ही क्या, जिसमें कठिनाइयाँ न हों,
                                                                 
                            
वो मंज़िल ही क्या, जिसमें संघर्ष न हो,
वो दिन ही क्या, जिसमें प्रकाश न हो,
वो मित्र ही क्या, जिस पर विश्वास न हो,
वो प्रकृति ही क्या, जिसमें हरियाली न हो,
वह विद्यालय ही क्या, जिसमें अनुशासन न हो,
वह मंदिर ही क्या, जिसमें भक्त न हो,
वह दीप ही क्या, जिसमें रोशनी न हो,
वह देश ही क्या, जिसमें शान्ति न हो,
वो गुरु ही क्या, जिसमें ज्ञान न हो,
वह छात्र ही क्या, जिसमें सिखने की लगन न हो,
वह परिवार ही क्या, जिसमें एकता न हो,
वह राज्य ही क्या, जिसमें देश प्रेम न हो,
वह शहर ही क्या, जिसमें शिक्षा न हो,
वह भामाशाह ही क्या, जिसमें दान देने की शक्ति न हो।

 
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8 घंटे पहले

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