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पथिक का संघर्ष

                
                                                         
                            नवसंघर्ष जीवन-पथ पर जो चलता है, चलता जाए,
                                                                 
                            
अपने को कर्तव्य-धरा पर कर्म करे, करता जाए।
राह कठिन हो, पथ हो दुर्गम,  पग-पग पर तुफां आए,
हिम्मत लेकर बढ़ता जाए, मन में दीप जलाता जाए।

नवसंघर्ष जीवन-पथ पर जो चलता है, चलता जाए,
अपने को कर्तव्य-धरा पर कर्म करे, करता जाए

ठोकर खाकर गिरना लेकिन फिर उठकर मुस्काता जाए,
हार मिले तो हार न माने, जीत का पथ अपनाता जाए।
आँधी आए, वर्षा आए,या तपता सूरज सिर छा जाए
सत्य-धर्म की राह पकड़कर पथिक निरंतर बढ़ता जाए।

नवसंघर्ष जीवन-पथ पर जो चलता है, चलता जाए,
अपने को कर्तव्य-धरा पर कर्म करे, करता जाए
अपने श्रम पर विश्वास रखे, मन में आशा जगाता जाए,
बीते कल को भूल हमेशा नव-प्रभात अपनाता जाए।
                               ~शशि भूषण
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56 मिनट पहले

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