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आँखों जैसा कोई रंग किधर है

                
                                                         
                            जज़्बात इधर है, बात उधर है,
                                                                 
                            
दिल पूछ रहा है, मुलाक़ात किधर है।

नागपुरी मैंडरिन संतरे की मिठास तो है,
पर उस मौसम वाली पहली बात किधर है।

रोक सकोगे अमावस की रात भला तुम,
जब चाँद के बिना भी उसकी बात इधर है।

प्रकृति के कैनवास पर रंग तो बहुत हैं,
मगर तेरी आँखों जैसा कोई रंग किधर है।

हमसे कह दो अपने मन की बात खुलकर,
इतनी चुप्पी में फिर वो बेकरारी किधर है।

हवा भी आज सवालों में उलझी हुई है,
बताओ उस खुशबू की सौगात किधर है।

हमने तो रख दी है हथेली पर अपनी धड़कन,
अब तुम्हारी तरफ़ से कोई शुरुआत किधर है।

जज़्बात इधर है, बात उधर है,
तुम सामने हो फिर भी मुलाक़ात किधर है।
-रतंन कुमार कैथवास
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8 घंटे पहले

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