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माता देती मनोवांछित वर सुख वैभव से झोली भरती हैं।।

                
                                                         
                            शक्ति का छठा स्वरूप मां कात्यायनी कहलाता है।
                                                                 
                            
नवरात्रि के छठे दिन इनको ही पूजा जाता है।।
पुत्री रूप पाने को महर्षि कात्यायन ने तपस्या की।
प्रसन्न् होकर माता ने पूरी उनकी इच्छा की।।
त्रिदेवों ने अपने तेज व शक्ति से था इनको गढ़ा।
महर्षि कात्यायन की पुत्री नाम कात्यायनी पड़ा।।
मां कात्यायनी ज्योतिर्मय चार भुजाओं वाली हैं।
दुष्टो की संहारक भक्तों को निडर बनाने वाली हैं।।
महिषासुर का अत्यातार बढ़ा त्रैलोक में चारों ओर।
मां ने धरकर रौद्र रूप खड्ग से काटा शिर कठोर।।
जो कुवारियां मां की लाल-सफेद वस्त्र में पूजा करती हैं।
माता देती मनोवांछित वर सुख वैभव से झोली भरती हैं।।
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3 घंटे पहले

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