रुख़-ए-बिसात देखकर क़दम उठे,
तो क़दम अच्छा है,
वज़ीर के क़दमों को प्यादे से रोक दे,
वो क़दम और भी अच्छा है,
शह से आंख मिलाकर मात बचा जाना
सबके बस का खेल नहीं,
क़दम जो ए'तमाद-ए-ज़ाती से लिया जाय,
यह क़दम सबों से अच्छा है.
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