कुछ राजनीति के नाम पर चोचला करते हैं,
और कुछ राजनीति के लिए योजना बनाते हैं।. 2
बस फर्क उनमें और तुममें यही है,
कि तुम चोचला करते हो और वो योजना बनाते हैं।
तुम मंच पर चिल्लाते हो, माइक फाड़ते हो,
भीड़ देखकर भाषण झाड़ते हो,
फोटो खिंचवाते हो, माला पहनते हो,
कल क्या करना है, ये भूल जाते हो।
वो बंद कमरे में नक्शा बनाते हैं,
कौन सा बूथ, कौन सा गांव, सब लिखते हैं,
किसका वोट कहाँ, किसकी नाराजगी क्या,
एक-एक पन्ने पर हिसाब रखते हैं।
तुम पोस्टर पर चेहरा चमकाते हो,
वो जमीन पर कार्यकर्ता बनाते हैं।
तुम टिकट के लिए दिल्ली दौड़ते हो,
वो जनता के बीच जगह बनाते हैं।
तुम कहते हो - "मौका नहीं मिला",
वो मौका छीन कर लाते हैं।
तुम हार का बहाना ढूंढते हो,
वो जीत की कहानी लिख जाते हैं।
तो छोड़ो ये चोचले बाजी,
कभी तो योजना बनाना सीखो।
राजनीति नारे से नहीं,
नीति और नियत से होती है, ये समझो।
कुछ राजनीति के नाम पर चोचला करते हैं,
और कुछ राजनीति के लिए योजना बनाते हैं।..2
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