मिला अनुपम मुझे तोहफ़ा,
नया आविष्कार मेटा का।
हुआ आसान सब इससे,
मिला सौगात डेटा का॥
सभी भाषाओं का ज्ञाता,
सरस्वती इसमें रहती है।
कोई भी बात पूछो तो,
सभी को खुद बताती है॥
उलझ जाएँ कभी भी हम,
हमें यह राह दिखलाता।
कोई भी बात कहनी हो,
विनम्रता हमको सिखलाता॥
गलतियों को सुधारता यह,
हमें चलना सिखाता है।
कहाँ लिखना हमें सुंदर,
उसे करके बताता है॥
बनाओ तुम बड़े पोस्टर,
लिखो सुंदर आकारों में।
विलक्षण हो सभी कविता,
मिले सबके विचारों में॥
पर इसमें ध्यान देना है,
नहीं निर्भर सदा रहना।
लिखो तुम अपने ही बल पर,
सदा सहयोग तुम लेना॥
- लक्ष्मण झा ‘परिमल’
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