हाँ में हाँ करते जाएँगे
तब तो रिश्ते निभ पाएँगे।
वर्ना तो स्थित नहीं है ठीक
बे-मतलब ही पिट जाएँगे।
सोच समझ कर दीप बचाना
हाथ तुम्हारे जल जाएँगे।
इस दुनिया के रंग बहुत हैं
धोके पे धोके खाएँगे।
हम तो लड़के ठहरे पत्थर
हिस्से में ठोकर आएँगे।
-पंडित अनिल
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