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तो सिर्फ़ एक नाम बनकर मत जाना

                
                                                         
                            "कुछ ऐसा…"
                                                                 
                            

कुछ ऐसा कहो,
जो रूठे हुए दिलों को भी रिझा जाए,
कुछ ऐसा रहो,
जो खामोशियों को भी समझा जाए....

कुछ ऐसा बहो,
जैसे नदी प्यासे किनारों को छू जाए,
कुछ ऐसा जियो,
कि तुम्हारी ज़िंदगी किसी
और को भी जीना सिखा जाए....

कुछ ऐसा मुस्कुराओ,
कि उदास आँखों में भी
उजाला उतर आए,
कुछ ऐसा बनो,
कि तुम्हें देखकर कोई
अपना खोया हुआ
हौसला फिर पा जाए।

कुछ ऐसा चलो,
कि राहें तुम्हारे कदमों से
मंज़िल पहचान लें,
कुछ ऐसा जलो,
कि अँधेरे भी तुम्हारी रोशनी से
अपना अर्थ जान लें।

और जब विदा हो इस दुनिया से,
तो सिर्फ़ एक नाम बनकर मत जाना
"एक एहसास बनकर जाना,
एक विश्वास बनकर जाना,
कि तुम जिए थे तो
किसी और की ज़िंदगी भी
थोड़ी बेहतर हो गई थी।"

"कुछ ऐसा कहो…
कुछ ऐसा रहो…
कुछ ऐसा बहो…
कुछ ऐसा जियो
कि तुम अकेले न जियो,
तुमसे होकर
कई दिल जी उठें।"
-आचार्य अमित
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40 मिनट पहले

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