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हार नहीं मानूँगा

                
                                                         
                            उसूलों की राह पर चलूँ, चाहे काँटों से सामना हो,
                                                                 
                            
आदर्शों के लिए लड़ूँ, चाहे मुश्किलों का सिलसिला हो।
गिरूँ अगर तो उठ खड़ा होऊँ, दिल में वही जुनून रहे,
हार सामने खड़ी हो फिर भी जीत का ही खून रहे।
भगवान भी अगर राह रोके, उससे भी टकराऊँगा,
अपनी मेहनत और विश्वास से, एक दिन जीत मैं जाऊँगा।
ईश्वर का वरदान मुझे स्वीकार नहीं , मै खुद अपनी राह बनाऊंगा
हारूंगा जीतूंगा गिरूंगा संभलूंगा धूल में मिल जाऊंगा तू हर बार हार देगा यदि मुझे मै हर बार तुझसे टकराऊंगा , ईश्वर मै तुमसे जीत जाऊंगा ।
मै कर्म अच्छे करता हु तेरी पुण्यों की मुझे लालसा नहीं , तुझे याद करु अब ऐसी भी मेरी चाह नहीं , एक विराम से राह छोड़ दु इतने कच्चे मेरे अरमान नहीं ।
उठूंगा , तोडूंगा , जीतूंगा तुझसे मै ईश्वर ये मेरा संकल्प है मेरा अभिमान नहीं ।
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27 मिनट पहले

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