सीजी: छत्तीसगढ़ में बनेगी पूरी मिनरल वैल्यू चेन, खनिज उत्पादन से एडवांस मैन्युफैक्चरिंग तक होगा काम: CM साय
छत्तीसगढ़ में क्रिटिकल मिनरल्स के पांच ब्लॉक्स की नीलामी होगी। CM विष्णुदेव साय ने अन्वेषण से प्रसंस्करण, वैल्यू एडिशन, एडवांस मैन्युफैक्चरिंग और रिसाइक्लिंग तक पूरी मिनरल वैल्यू चेन विकसित करने पर जोर दिया। राज्य में 40 एक्सप्लोरेशन प्रोजेक्ट शुरू हुए हैं।
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विस्तार
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा है कि छत्तीसगढ़ का लक्ष्य सिर्फ खनिज उत्पादन तक सीमित नहीं है। राज्य में अन्वेषण और उत्खनन से लेकर खनिजों के प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन, एडवांस मैन्युफैक्चरिंग और रिसाइक्लिंग तक पूरी मिनरल वैल्यू चेन विकसित की जाएगी। इससे प्रदेश में निवेश और उद्योगों को बढ़ावा मिलने के साथ युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। मुख्यमंत्री सोमवार को नवा रायपुर स्थित मेफेयर लेक रिजॉर्ट में केंद्रीय खान मंत्रालय की ओर से आयोजित क्रिटिकल एवं स्ट्रेटेजिक मिनरल ब्लॉक्स की नीलामी की आठवीं किश्त के रोड शो को संबोधित कर रहे थे।
क्रिटिकल मिनरल्स में आत्मनिर्भरता जरूरी
मुख्यमंत्री ने कहा कि क्रिटिकल एवं स्ट्रेटेजिक मिनरल्स आने वाले समय में भारत की आर्थिक प्रगति, तकनीकी आत्मनिर्भरता और सामरिक सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण होंगे। रक्षा उद्योग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्लीन एनर्जी, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, इलेक्ट्रॉनिक्स और एडवांस मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में इनकी जरूरत लगातार बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए भारत के लिए इन खनिजों की सुरक्षित और निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करना आर्थिक जरूरत के साथ राष्ट्रीय सुरक्षा का विषय भी है।
छत्तीसगढ़ के 5 क्रिटिकल मिनरल ब्लॉक्स नीलामी में
मुख्यमंत्री ने बताया कि क्रिटिकल एवं स्ट्रेटेजिक मिनरल्स की नीलामी की आठवीं किश्त में देश के सात राज्यों के 20 खनिज ब्लॉक्स शामिल हैं। इनमें छत्तीसगढ़ के पांच ब्लॉक्स हैं। उन्होंने निवेशकों से इन ब्लॉक्स की नीलामी में सक्रिय भागीदारी करने की अपील की। साय ने कहा कि यह केवल खनिज ब्लॉक हासिल करने का अवसर नहीं है, बल्कि अन्वेषण, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन, नवाचार और नए उद्योग स्थापित करने का अवसर भी है।
लिथियम, ग्रेफाइट और निकेल समेत कई खनिजों की संभावनाएं
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ देश के प्रमुख खनिज संपन्न राज्यों में शामिल है और अब क्रिटिकल मिनरल्स के क्षेत्र में भी अपनी पहचान बना रहा है। कटघोरा और बस्तर में लिथियम एवं दुर्लभ मृदा तत्व, बलरामपुर में ग्रेफाइट, वैनेडियम एवं गैलियम, बालोद में फास्फोराइट तथा महासमुंद में निकेल, क्रोमियम और ग्लाकोनाइट की संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि खनिजों को केवल प्रदेश से बाहर भेजने के बजाय उनका प्रसंस्करण और वैल्यू एडिशन राज्य में ही किया जाना चाहिए। इससे प्राकृतिक संसाधनों का अधिक आर्थिक लाभ छत्तीसगढ़ और यहां के लोगों को मिलेगा।
नवा रायपुर और राजनांदगांव में विकसित हो रहे औद्योगिक क्लस्टर
मुख्यमंत्री ने बताया कि नवा रायपुर में एआई आधारित डेटा सेंटर पार्क और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर विकसित किए जा रहे हैं। राजनांदगांव में भी इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण क्लस्टर विकसित किया जा रहा है। इन आधुनिक उद्योगों में क्रिटिकल मिनरल्स की जरूरत होगी। राज्य में खनिज संसाधनों की उपलब्धता इन उद्योगों के लिए प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त दे सकती है।
उन्होंने कहा कि नई औद्योगिक नीति के तहत भविष्य की अर्थव्यवस्था से जुड़े क्षेत्रों के लिए विभिन्न प्रोत्साहन दिए जा रहे हैं। वन क्लिक सिंगल विंडो सिस्टम 2.0 और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस व्यवस्था के जरिए निवेशकों के लिए अनुमतियों और एनओसी की प्रक्रिया को आसान बनाया गया है।
खनिज राजस्व बढ़कर 16 हजार करोड़ रुपये से अधिक
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य गठन के समय छत्तीसगढ़ का खनिज राजस्व करीब 400 करोड़ रुपये था। ढाई वर्ष पहले यह लगभग 12 हजार करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर 16 हजार करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। उन्होंने कहा कि खनिजों से मिलने वाले राजस्व का इस्तेमाल प्रदेश के विकास और जनकल्याण में किया जा रहा है। जिला खनिज संस्थान न्यास के माध्यम से खनन प्रभावित क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल और अन्य बुनियादी सुविधाओं के लिए काम किए जा रहे हैं।
ई-रेत संगवारी और टिन पोर्टल लॉन्च
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने ई-रेत संगवारी और टिन पोर्टल का शुभारंभ किया। ई-रेत संगवारी के जरिए प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राहियों को रियायती दर पर रेत उपलब्ध कराने की व्यवस्था को अधिक सुगम और पारदर्शी बनाया जाएगा। वहीं दंतेवाड़ा क्षेत्र में टिन से जुड़े आदिवासी समुदायों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने और व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से टिन पोर्टल शुरू किया गया है।
खनिज क्षेत्र में वित्तीय सहयोग और कौशल विकास को गति
कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम की ओर से इंडियन ओवरसीज बैंक और पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के साथ एमओयू भी किए गए। इनके जरिए वित्तीय सहयोग और कौशल विकास से जुड़ी गतिविधियों को गति मिलने की उम्मीद है।
क्रिटिकल मिनरल्स में आत्मनिर्भरता आर्थिक और सामरिक जरूरत
केंद्रीय कोयला एवं खान राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे ने कहा कि क्रिटिकल एवं स्ट्रेटेजिक मिनरल्स में आत्मनिर्भरता भारत की आर्थिक और रणनीतिक शक्ति के लिए जरूरी है। उन्होंने कहा कि इन खनिजों का इस्तेमाल वाहनों, इनवर्टर, ई-रिक्शा, जहाजों और आधुनिक रक्षा उपकरणों तक में होता है।
उन्होंने निवेशकों, युवाओं और स्टार्टअप्स से इस क्षेत्र में मौजूद अवसरों का लाभ उठाने की अपील की। साथ ही सतत और जिम्मेदार खनन पर जोर दिया। केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू ने कहा कि खनिज ब्लॉक्स की नीलामी की सफलता केवल आवंटन से नहीं मापी जानी चाहिए। इसका वास्तविक प्रभाव अन्वेषण, निवेश, प्रोसेसिंग, तकनीकी विकास, वैल्यू एडिशन और रोजगार के रूप में दिखाई देना चाहिए।
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निवेशकों को मिलेगा हैंडहोल्डिंग सपोर्ट
मुख्य सचिव विकास शील ने कहा कि राज्य सरकार खनिज क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देने के साथ पूरी वैल्यू चेन विकसित करने पर काम कर रही है। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के तहत 43 सेवाओं को रिस्क रेटेड अप्रोच के तहत अधिसूचित किया गया है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण, वन, भूमि अधिग्रहण और अन्य जरूरी स्वीकृतियों में निवेशकों को हैंडहोल्डिंग सपोर्ट दिया जा रहा है। खनिज ब्लॉक्स की नीलामी लैंड शेड्यूलिंग के बाद किए जाने से निवेशकों को भूमि और वन क्षेत्र से जुड़ी जानकारी पहले उपलब्ध हो सकेगी।
अब तक 56 क्रिटिकल मिनरल ब्लॉक्स की सफल नीलामी
खान मंत्रालय के सचिव केशव चंद्र ने बताया कि केंद्र सरकार की ओर से अब तक 88 क्रिटिकल एवं स्ट्रेटेजिक मिनरल ब्लॉक्स की नीलामी प्रक्रिया शुरू की गई है। इनमें 56 ब्लॉक्स की सफलतापूर्वक नीलामी हो चुकी है। उन्होंने बताया कि भारत के पहले लिथियम युक्त खनिज ब्लॉक की नीलामी छत्तीसगढ़ के कटघोरा लिथियम एवं रेयर अर्थ एलिमेंट ब्लॉक से हुई थी। आठवीं किश्त में शामिल 20 ब्लॉक्स में पांच छत्तीसगढ़ के हैं।
ढाई साल में 40 एक्सप्लोरेशन प्रोजेक्ट शुरू
खनिज विभाग के संचालक एवं सीएमडीसी के प्रबंध संचालक रजत बंसल ने बताया कि पिछले ढाई वर्षों में प्रदेश में 40 एक्सप्लोरेशन प्रोजेक्ट शुरू किए गए हैं और 2800 किलोमीटर से अधिक जियोलॉजिकल सर्वे पूरा किया गया है।
उन्होंने बताया कि पिछले वित्तीय वर्ष में प्रदेश को करीब 16,700 करोड़ रुपये का खनिज राजस्व प्राप्त हुआ, जो निर्धारित लक्ष्य का लगभग 98 प्रतिशत है। खनिज राजस्व में साल-दर-साल करीब 14 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में अब तक 65 खनिज ब्लॉक्स की नीलामी की गई है, जिनसे करीब चार लाख करोड़ रुपये के संभावित राजस्व की उम्मीद है।
डिजिटल व्यवस्था से पारदर्शिता बढ़ाने पर जोर
खनिज विभाग की ओर से खनिज ऑनलाइन 2.0, डीएमएफ 2.0 और ई-नीलामी जैसी डिजिटल व्यवस्थाओं का विस्तार किया गया है। खदानों और माइनर मिनरल्स की निगरानी के लिए ड्रोन सर्वे का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। खनिज सचिव पी. दयानंद ने कहा कि राज्य सरकार वैज्ञानिक अन्वेषण, पारदर्शी नीलामी और निवेशकों के लिए अनुकूल माहौल तैयार करने पर लगातार काम कर रही है। भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण सहित विभिन्न संस्थाओं के सहयोग से सर्वेक्षण, भू-आंकड़ों के संकलन और मैपिंग को मजबूत किया जा रहा है।