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जब काका हाथरसी से डाकुओं ने कहा, “हमें अपनी हास्य-कविता सुनाइए”

काव्य डेस्क

Mud Mud Ke Dekhta Hu
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                            यह किस्सा है प्रसिद्ध हास्य कवि काका हाथरसी और बालकवि बैरागी के बारे में जिसे अमर उजाला काव्य को सुनाया काका हाथरसी के पौत्र अशोक गर्ग ने, पढ़ें वह किस्सा। 
        
                                                    
                            

काका हाथरसी प्रसिद्धि के शिखर पर थे और मुरैना में डाकुओं का बोलबाला था। मुरैना के एक कवि सम्मेलन में काका हाथरसी और बालकवि बैरागी सम्मिलित होने गए थे। कवि सम्मेलन के ख़त्म होने के बाद वहां कुछ डाकू आए और दोनों का अपहरण कर, आंख पर पट्टी बांध अपने अड्डे पर ले गए। वहां ले जाकर उन्होंने दोनों ही हास्य कवियों से कहां, "आप हमारे साथियों को कविताएं सुनाइए"।

उसके बाद काका हाथरसी और बालकवि बैरागी ने अपनी कविताएं वहां सुनाईं। इसके बाद डाकुओं ने उन्हों 100 रुपए दिए और उन्होंने उसे लेने से मना कर दिया लेकिन डाकुओं के काफ़ी कहने के बाद वह रुपए उन्होंने ले लिए।


साभार- अशोक गर्ग
3 वर्ष पहले
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