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पंचम स्वर में गला फाड़कर कला दिखाओ  : काका हाथरसी

काव्य डेस्क

Hasya
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                            हड़तालों पर कर रहे प्रवचन काक-भुशुंड
        
                                                    
                            
मैनेजर की मेज पर, कीर्तन करो अखंड 
कीर्तन करो अखंड साथ माइक ले जाओ
पंचम स्वर में गला फाड़कर कला दिखाओ 
'काका' जो प्राणी इस नुस्खे को अजमाए 
अर्थ-धर्म औ काम मोक्ष चारों पद पाए।

बीड़ी का कश खींचकर, मोले बांकेलाल 
सर्वश्रेष्ठ है आजकल, कलम-छोड़ हड़ताल
कलम छोड़ हड़ताल, शान से दफ्तर जाओ 
भरो हाजिरी, चाय पियो, फिर गप्प लड़ाओ 
'काका' यह हड़ताल शुद्ध 'निष्काम' कहाती 
बिना काम के ही तनुखा सीधी हो जाती।

साभार : बेस्ट ऑफ काका हाथरसी (सं- लक्ष्मीनारायण गर्ग, प्रभात प्रकाशन) 

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