दिल्ली विश्व पुस्तक मेला 2026 का फेस्टिवल ऑफ फेस्टिवल्स 3.0 भारत मंडपम को एक ऐसे मंच के रूप में प्रस्तुत कर रहा है जहाँ देश के प्रतिष्ठित साहित्यिक उत्सव एवं सांस्कृतिक मंच एक साथ आ गए हैं। विविध साहित्यिक परंपराओं, विचारों और स्वरों को एक साथ लाने की मंशा के साथ शुरु हुआ फेस्टिवल ऑफ फेस्टिवल्स 3.0 विविध दृष्टियों को नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला के विशाल बैनर तले ले आया है, जो इसके देश के सर्वाधिक समावेशी एवं विशाल साहित्यिक जुटान की स्थिति को और सुदृढ़ कर रहा है। पुस्तक लोकार्पण, समूह चर्चा और विशेष सत्रों में 100 से ज्यादा वक्ता इसमें शामिल हो रहे हैं।
इनमें शामिल पुरी लिटरेचर फेस्टिवल (पीएलएफ), ने भारत के इतिहास, स्मृति, आस्था, जेंडर और समकालीन जीवन से जुड़े विषयों पर बौद्धिक रूप से समृद्ध सत्रों की एक श्रृंखला का संयोजन किया है। ‘रेल्स, रिपब्लिक, एंड दि लाइव्स वी इनहेरिट’ शीर्षक सत्र में भारतीय रेलवे को देश के एक जीवंत अभिलेख के रूप में प्रस्तुत किया गया। यहां आयोजित अन्य सत्रों में शहरी अकेलापन, प्रेम और जिजीविषा, सौर मिथकों की स्त्रीवादी पुनर्व्याख्या, तथा प्रवासन और पहचान जैसे विषयों पर बात की गई।
नालंदा इंटरनेशनल लिटरेचर फेस्टिवल प्राचीन नालंदा की उस विरासत से प्रेरित है, जो कभी वैश्विक ज्ञान का प्रमुख केंद्र हुआ करता था। यह महोत्सव वेदों, संस्कृत, योग, आयुर्वेद और भारतीय ज्ञान परंपराओं में निहित भारत की बौद्धिक परंपराओं को रेखांकित करता है।
द ग्रेट इंडियन बुक टूर के अंतर्गत आयोजित साहित्यिक संवादों ने फेस्टिवल ऑफ फेस्टिवल्स 3.0 के दायरे को और विस्तार दिया। इसके सत्रों में, ‘किस प्रकार कथा साहित्य साधारण जीवन से अर्थ ग्रहण करता है, वास्तविक जीवन के संघर्ष प्रेरक कथाओं में कैसे रूपांतरित होते हैं, और कुछ पुस्तकें स्थायी प्रभाव क्यों छोड़ पाती हैं’, जैसी प्रमुख साहित्यिक जिज्ञासाओं पर बात हुई।
महोत्सव की सहयोगपूर्ण भावना इसमें शामिल आयोजकों से भी झलकती है। एशियन लिटरेरी सोसाइटी के मनोज कृष्णन ने इस मेले को एशियाई साहित्य को व्यापक भारतीय पाठक वर्ग तक पहुँचाने का अवसर बताया, विशेष रूप से एशियन लिटरेरी कॉन्फ्लुएंस और इंडोनेशिया व सिंगापुर में आयोजित एएलएस कारवां जैसी पहलों के माध्यम से। पुरी लिटरेचर फेस्टिवल के शशांक शेखर ने एनडीडब्ल्यूबीएफ को सबसे बड़ा बी2बी मंच बताया, जहाँ पाठक सीधे लेखकों और प्रकाशकों से जुड़ते हैं और ‘बैडास बेगम्स से लेकर द लाइव्स वी इनहेरिट’ जैसे विविध विषयों की खोज करते हैं। नालंदा लिटरेचर फेस्टिवल की वैशाली ने इस मंच को नालंदा की उस परिकल्पना को प्रस्तुत करने का अवसर बताया, जिसके माध्यम से भारत की ‘विश्वगुरु’ के रूप में पुनः कल्पना की जा सके। साथ ही राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर पहचान भी मिले।
इनमें भारत लिटरेचर फेस्टिवल भी शामिल है, जो नेतृत्व, आध्यात्मिकता, संस्कृति और समकालीन मुद्दों पर संवाद प्रस्तुत करता है। इसमें स्मृति ईरानी, हेमा मालिनी, रिकी केज, कैलाश सत्यार्थी सहित अनेक प्रतिष्ठित वक्ता शामिल रहे।
एशियन लिटरेरी सोसाइटी, एपीजे कोलकात्ता लिटरेरी फेस्टिवल, भारत लिटरेचर फेस्टिवल, पुरी लिटरेचर फेस्टिवल, नालंदा लिटरेचर फेस्टिवल, द ग्रेट इंडियन बुक टूर, एनेकडोट पब्लिशिंग हाउस और वर्ल्डलीवाइज़ पब्लिकेशंस की सहभागिता के साथ फेस्टिवल ऑफ फेस्टिवल्स 3.0 नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला 2026 की एक विशिष्ट पहचान के रूप में निरंतर विकसित हो रहा है। विविध साहित्यिक स्वरों को एक सूत्र में पिरोते हुए संवाद, मार्गदर्शन तथा नई चीजों की खोज के लिए एक साझा मंच प्रदान करते हुए, यह महोत्सव न केवल साहित्य के सभी रूपों का उत्सव मना रहा है, बल्कि तेजी से बदलते सांस्कृतिक परिदृश्य में स्थायी प्रासंगिकता को भी रेखांकित करता है।
7 महीने पहले