अंकिता भंडारी हत्याकांड में पहले दी थी अनुमति बाद में लगी रोक
अंकिता भंडारी हत्याकांड में वीआईपी का पता लगाने के लिए न्यायालय से आरोपियों के पॉलीग्राफ और नार्को टेस्ट की अनुमति मांगी गई थी। मुख्य आरोपी पुलकित आर्य ने अपनी स्वीकृति दी तो स्थानीय कोर्ट ने 25 जनवरी 2023 को आदेश दे दिए थे। इसे बाद वह अपनी स्वीकृति से मुकर गया और हाईकोर्ट ने इस टेस्ट पर रोक लगा दी। लिहाजा किसी भी आरोपी का नार्को या पॉलीग्राफ टेस्ट नहीं कराया जा सका।
2008 सामुहिक दुष्कर्म केस
इंटरमीडिएट की छात्रा को नौकरी का झांसा देकर 2008 में हुए सामुहिक दुष्कर्म के मामले में आरोपी पूर्व भाजपा नेता प्रमोद कुमार गुप्ता का पॉलीग्राफ टेस्ट कराया गया था। वर्ष 2013 में प्रमोद कुमार गुप्ता को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी।
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आंचल पांधी केस में आरोपियों ने नहीं दी थी अनुमति
वर्ष 2017 में फैशन डिजाइनर आंचल पांधी की संदिग्ध हालात में मौत हो गई थी। परिजनों ने हत्या का आरोप पति राहुल पांधी पर लगाया। पुलिस जांच में मामला आत्महत्या के लिए उकसाने का पाया गया। आरोपियों के पॉलीग्राफ टेस्ट की अनुमति मांगी गई लेकिन आरोपियों ने कोर्ट में अपनी रजामंदी देने से इन्कार कर दिया।
पॉलीग्राफ और नार्को टेस्ट की व्यवस्था करने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया था। इसमें से शासन ने पॉलीग्राफ टेस्ट के लिए स्वीकृति दी है। जल्द ही इस व्यवस्था को शुरू करने के लिए प्रक्रिया शुरू की जाएगी। - डॉ. नीलेश आनंद भरणे, डॉयरेक्टर, एफएसएल