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एक्सप्लेनर: ट्रंप लगातार कैसे बदल रहे जंग रुकवाने के आंकड़े, सच्चाई कितनी; क्या मिल सकता है शांति का नोबेल?
Fri, 09 Oct 2026 09:00 AM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Fri, 09 Oct 2026 09:00 AM IST
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आठ युद्ध रुकवाने का दावा कर एक बार फिर नोबेल शांति पुरस्कार की मांग की है। जानिए उनके दावों में कितनी सच्चाई है और नोबेल समिति के नियमों के तहत उनकी संभावना कितनी मजबूत है।
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का युद्ध रुकवाने का दावा।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
नॉर्विजियन नोबेल समिति आज (शुक्रवार) शांति के नोबेल पुरस्कार के विजेता का एलान करेगी। इससे पहले ही अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अपने लिए नोबेल शांति पुरस्कार की मांग की है। ट्रंप ने एक दिन पहले ही व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा, "मैंने कई ऐसी चीजें की हैं, जो किसी और ने नहीं की। मैंने आठ युद्धों का अंत करवाया है।" हालांकि, इसके साथ ही ट्रंप ने यह भी कहा कि उन्हें नहीं पता कि नोबेल शांति पुरस्कार देने वाली समिति 2026 के पुरस्कार के लिए उनका नाम चुनेगी या नहीं।
ट्रंप के इन बयानों के बाद एक बार फिर उनके दुनियाभर में 'जंग का अंत' करवाने वाले दावों पर चर्चाएं शुरू हो गई हैं। ट्रंप जनवरी 2025 में अमेरिका के राष्ट्रपति का पद संभालने के बाद से ही लगातार एक के बाद एक युद्ध रुकवाने के दावे करते जा रहे हैं। एक समय तो उन्होंने 10 युद्ध का अंत कराने का दावा तक कर दिया था। हालांकि, अपने हालिया बयान में वे एक बार फिर दुनिया के आठ युद्ध रुकवाने के दावे पर लौट आए हैं।
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ट्रंप के इन बयानों के बाद एक बार फिर उनके दुनियाभर में 'जंग का अंत' करवाने वाले दावों पर चर्चाएं शुरू हो गई हैं। ट्रंप जनवरी 2025 में अमेरिका के राष्ट्रपति का पद संभालने के बाद से ही लगातार एक के बाद एक युद्ध रुकवाने के दावे करते जा रहे हैं। एक समय तो उन्होंने 10 युद्ध का अंत कराने का दावा तक कर दिया था। हालांकि, अपने हालिया बयान में वे एक बार फिर दुनिया के आठ युद्ध रुकवाने के दावे पर लौट आए हैं।
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ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से नोबेल शांति पुरस्कार की मांग कब से की जा रही है? वे अब तक कब और कितनी जंगों को रुकवाने का दावा कर चुके हैं? उनके दावों में कौन-कौन से युद्धों का जिक्र लगातार रहा है? कैसे उनके जंग रुकवाने का आंकड़ा आठ से 10 और फिर वापस आठ पर आ गया है? नोबेल शांति पुरस्कार के लिए उनकी दावेदारी कितनी मजबूत रही है? यह पुरस्कार मिलता कैसे है और ट्रंप के लिए संभावना क्या है? आइये जानते हैं...
पहला कार्यकाल (2019 – 2020)
पहले जानें- ट्रंप कब से कर रहे नोबेल शांति पुरस्कार की मांग?
डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से अपने लिए नोबेल शांति पुरस्कार की मांग पहली बार नहीं हुई है। वे अपने पहले कार्यकाल (2017–2021) से ही इस प्रतिष्ठित सम्मान की मांग करते आ रहे हैं।पहला कार्यकाल (2019 – 2020)
- ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से कहना शुरू किया था कि वे इस पुरस्कार के हकदार हैं। उन्होंने दावा किया था कि उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन के साथ हुई शिखर वार्ता के बाद जापान के तत्कालीन प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने नोबेल समिति को उनके नाम का पत्र भेजा था। इसी दौरान उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा को 2009 में नोबेल पुरस्कार मिलने की आलोचना भी की थी।
- जब इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद को नोबेल शांति पुरस्कार दिया गया, तो ट्रंप ने चुनावी रैलियों में नाराजगी जताते हुए कहा था कि शांति समझौता उन्होंने करवाया था, लेकिन श्रेय किसी और को मिल गया।
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दूसरा कार्यकाल (2025–2026)
व्हाइट हाउस में वापसी के बाद ट्रंप ने अलग-अलग मौकों पर दावा किया कि उनके प्रशासन ने दुनिया भर में कई युद्धों को खत्म किया है। इस्राइल, पाकिस्तान, कंबोडिया, आर्मेनिया, अजरबैजान और रवांडा जैसे देशों के नेताओं ने उनका नाम नोबेल पुरस्कार के लिए प्रस्तावित करने का दावा किया।
हालांकि, जब 2025 का नोबेल शांति पुरस्कार वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरीना माचाडो को दिया गया, तो ट्रंप और व्हाइट हाउस ने नोबेल समिति के फैसले पर सवाल उठाए थे। बाद में माचाडो ने खुद यह पुरस्कार ट्रंप को समर्पित करने की बात कही थी।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने अब एक बार फिर नोबेल शांति पुरस्कार की मांग की है। उन्होंने व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा, "मैंने वो काम किए हैं जो आज तक किसी और ने नहीं किए। मैं डींग नहीं मार रहा हूं, सिर्फ आपको सच बता रहा हूं। शायद किसी भी राष्ट्रपति ने कभी कोई युद्ध नहीं सुलझाया, लेकिन मैंने आठ युद्ध सुलझाए हैं।"
व्हाइट हाउस में वापसी के बाद ट्रंप ने अलग-अलग मौकों पर दावा किया कि उनके प्रशासन ने दुनिया भर में कई युद्धों को खत्म किया है। इस्राइल, पाकिस्तान, कंबोडिया, आर्मेनिया, अजरबैजान और रवांडा जैसे देशों के नेताओं ने उनका नाम नोबेल पुरस्कार के लिए प्रस्तावित करने का दावा किया।
हालांकि, जब 2025 का नोबेल शांति पुरस्कार वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरीना माचाडो को दिया गया, तो ट्रंप और व्हाइट हाउस ने नोबेल समिति के फैसले पर सवाल उठाए थे। बाद में माचाडो ने खुद यह पुरस्कार ट्रंप को समर्पित करने की बात कही थी।
नोबेल शांति पुरस्कार पर अब क्या बोले ट्रंप?
अमेरिकी राष्ट्रपति ने अब एक बार फिर नोबेल शांति पुरस्कार की मांग की है। उन्होंने व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा, "मैंने वो काम किए हैं जो आज तक किसी और ने नहीं किए। मैं डींग नहीं मार रहा हूं, सिर्फ आपको सच बता रहा हूं। शायद किसी भी राष्ट्रपति ने कभी कोई युद्ध नहीं सुलझाया, लेकिन मैंने आठ युद्ध सुलझाए हैं।"
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप।
- फोटो : अमर उजाला
उन्होंने आगे कहा, "मुझे नहीं पता कि उनका निर्णय क्या होने वाला है... उनकी ऐसी छवि रही है कि वे शायद मेरे जैसे लोगों को यह पुरस्कार नहीं देते। लेकिन मुझे यह मिले या न मिले, मैंने (पुरस्कार की तुलना में) कहीं ज्यादा काम किया है। और अगर वे इसे मुझे नहीं देते, तो यह उनके लिए एक बड़ा अनादर होगा।"
ट्रंप ने नोबेल समिति से अपनी खीझ जाहिर करते हुए कहा, "पिछली बार जिस युवा महिला (मारिया कोरीना माचाडो) को यह पुरस्कार दिया गया, वह शानदार इंसान हैं, लेकिन उन्होंने खुद कहा कि वे इसकी हकदार नहीं थीं, बल्कि मैं इसका हकदार था, और उन्होंने (माचाडो ने) पुरस्कार मुझे दे दिया।"
ये भी पढ़ें: ट्रंप की नोबेल शांति पुरस्कार पर फिर दावेदारी, बोले- आठ युद्ध रुकवाए, सम्मान नहीं मिला तो समिति की होगी बदनामी
ट्रंप ने नोबेल समिति से अपनी खीझ जाहिर करते हुए कहा, "पिछली बार जिस युवा महिला (मारिया कोरीना माचाडो) को यह पुरस्कार दिया गया, वह शानदार इंसान हैं, लेकिन उन्होंने खुद कहा कि वे इसकी हकदार नहीं थीं, बल्कि मैं इसका हकदार था, और उन्होंने (माचाडो ने) पुरस्कार मुझे दे दिया।"
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ट्रंप अब तक कितनी जंगों को रुकवाने का दावा कर चुके हैं?
डोनाल्ड ट्रंप मुख्य रूप से आठ अंतरराष्ट्रीय युद्धों को रुकवाने का दावा करते आ रहे हैं। हालांकि, उनके भाषणों और सोशल मीडिया पोस्ट्स के मुताबिक, यह संख्या नौ से 10 जंग-संघर्षों तक दर्ज की जा चुकी है।
अमेरिका के राष्ट्रपति ने लगातार बदले युद्ध सुलझाने के आंकड़े।
- फोटो : अमर उजाला
चौंकाने वाली बात यह है कि ट्रंप ने जब 10वां युद्ध रुकवाने का दावा किया था, तब उनकी तरफ से उन नौ युद्धों के बारे में नहीं बताया गया, जिन्हें उन्होंने रुकवाया है। इससे पहले उनकी तरफ से कभी नौंवे युद्ध को रुकवाने की बात नहीं कही गई थी। यानी आठवें युद्ध के बाद ट्रंप ने इस साल सीधा 10 युद्ध रुकवाने का दावा कर दिया।
किन संघर्षों का अंत करवाने का दावा करते हैं ट्रंप, क्या थी उनकी भूमिका?
1. इस्राइल और हमास (गाजा)
ट्रंप ने युद्धविराम और बंधकों की रिहाई के लिए एक 20-सूत्रीय शांति योजना पेश की। उन्होंने इस्राइली नेतृत्व पर कूटनीतिक दबाव बनाया और अरब सहयोगियों के जरिए हमास को समझौते के लिए सहमत किया। गाजा के पुनर्विकास और व्यवस्था के लिए उन्होंने 'बोर्ड ऑफ पीस' पहल की शुरुआत भी की। हालांकि, ये युद्ध अब तक पूरी तरह से समाप्त नहीं हुआ है।
2. इस्राइल और ईरान
जून 2025 में दोनों देशों के बीच हुए 12-दिन चले युद्ध को खत्म कराने का श्रेय ट्रंप लेते हैं। इस दौरान उन्होंने अमेरिकी युद्धक विमानों को ईरान के परमाणु ठिकानों (फोर्दो, इस्फहान, नतांज) पर हमले का निर्देश दिया और फिर दोनों पक्षों को युद्धविराम स्वीकार करने का अल्टीमेटम दिया।
3. भारत और पाकिस्तान
4. थाईलैंड और कंबोडिया
दोनों देशों के बीच सीमा पर भड़के सैन्य संघर्ष को रुकवाने के लिए ट्रंप ने चेतावनी दी कि जब तक युद्धविराम नहीं होता, अमेरिका उनके साथ व्यापार या टैरिफ में कटौती पर कोई बातचीत नहीं करेगा। इसके बाद मलयेशिया में आयोजित शांति वार्ता में दोनों देशों ने समझौते पर हस्ताक्षर किए।
- ट्रंप लगातार दावा करते हैं कि जम्मू-कश्मीर में हुए आतंकी हमले के बाद मई 2025 में दोनों देशों के बीच शुरू हुए चार दिन के सैन्य संघर्ष को रोकने के लिए ट्रंप और उनके शीर्ष अधिकारियों- विदेश मंत्री मार्को रुबियो और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कूटनीतिक मध्यस्थता की।
- ट्रंप ने दावा किया कि उन्होंने व्यापार बंद करने की धमकी देकर युद्धविराम कराया। पाकिस्तान ने माना कि भारत के हमलों के बाद उसने ट्रंप से मदद मांगी। बाद में पाकिस्तान ने युद्ध रुकवाने के लिए ट्रंप का आभार जताया और उन्हें नोबेल के लिए नामित किया।
- हालांकि, भारत की ओर से ट्रंप के दावों को लगातार नकारा गया है। भारत ने युद्ध रोकने के पीछे अमेरिकी दबाव या व्यापारिक शर्तों के दावों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि बातचीत दोनों देशों की सेनाओं के बीच सीधे हुई थी और भारत ने अपने लक्ष्य पूरे होने के बाद युद्ध रोका था।
4. थाईलैंड और कंबोडिया
दोनों देशों के बीच सीमा पर भड़के सैन्य संघर्ष को रुकवाने के लिए ट्रंप ने चेतावनी दी कि जब तक युद्धविराम नहीं होता, अमेरिका उनके साथ व्यापार या टैरिफ में कटौती पर कोई बातचीत नहीं करेगा। इसके बाद मलयेशिया में आयोजित शांति वार्ता में दोनों देशों ने समझौते पर हस्ताक्षर किए।
5. अर्मेनिया और अजरबैजान
नागोर्नो-काराबाख क्षेत्र को लेकर दशकों पुराने विवाद के बाद अगस्त 2025 में ट्रंप ने दोनों देशों के प्रमुखों को व्हाइट हाउस आमंत्रित किया। उन्होंने व्यापार समझौतों की शर्त रखकर दोनों पक्षों को कूटनीतिक संबंध सामान्य करने और 'ट्रंप रूट फॉर इंटरनेशनल पीस एंड प्रोस्परिटी' नामक रणनीतिक ट्रांजिट कॉरिडोर बनाने पर सहमत किया।
6. कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (डीआरसी) और रवांडा
पूर्वी कांगो में रवांडा समर्थित एम23 विद्रोहियों और कांगो सेना के बीच जारी हिंसा को रोकने के लिए ट्रंप ने दोनों देशों के राष्ट्रपतियों व विदेश मंत्रियों को वॉशिंगटन बुलाकर शांति समझौतों पर हस्ताक्षर कराए। इसमें उन्होंने आर्थिक प्रोत्साहन (जैसे खनिज संसाधन समझौते) और वित्तीय पाबंदियों की चेतावनी का इस्तेमाल किया।
7. सर्बिया और कोसोवो
ट्रंप ने दावा किया कि उन्होंने दोनों देशों के बीच फिर से शुरू होने वाले संभावित युद्ध को अमेरिका के साथ व्यापार रोकने की धमकी देकर टाल दिया।
नागोर्नो-काराबाख क्षेत्र को लेकर दशकों पुराने विवाद के बाद अगस्त 2025 में ट्रंप ने दोनों देशों के प्रमुखों को व्हाइट हाउस आमंत्रित किया। उन्होंने व्यापार समझौतों की शर्त रखकर दोनों पक्षों को कूटनीतिक संबंध सामान्य करने और 'ट्रंप रूट फॉर इंटरनेशनल पीस एंड प्रोस्परिटी' नामक रणनीतिक ट्रांजिट कॉरिडोर बनाने पर सहमत किया।
6. कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (डीआरसी) और रवांडा
पूर्वी कांगो में रवांडा समर्थित एम23 विद्रोहियों और कांगो सेना के बीच जारी हिंसा को रोकने के लिए ट्रंप ने दोनों देशों के राष्ट्रपतियों व विदेश मंत्रियों को वॉशिंगटन बुलाकर शांति समझौतों पर हस्ताक्षर कराए। इसमें उन्होंने आर्थिक प्रोत्साहन (जैसे खनिज संसाधन समझौते) और वित्तीय पाबंदियों की चेतावनी का इस्तेमाल किया।
7. सर्बिया और कोसोवो
ट्रंप ने दावा किया कि उन्होंने दोनों देशों के बीच फिर से शुरू होने वाले संभावित युद्ध को अमेरिका के साथ व्यापार रोकने की धमकी देकर टाल दिया।
ट्रंप का दुनियाभर में संघर्षों को रुकवाने का दावा।
- फोटो : अमर उजाला
8. मिस्र और इथियोपिया
नील नदी पर बने ग्रैंड इथियोपियन रेनेसां डैम को लेकर जारी जल विवाद को ट्रंप अपने सुलझाए गए मामलों में गिनवाते हैं। हालांकि, यहां कोई प्रत्यक्ष सैन्य युद्ध नहीं हुआ था और न ही कोई औपचारिक अंतिम समझौता हो पाया है।
9. इस्राइल और लेबनान
अप्रैल 2026 में हिजबुल्ला और इस्राइल के बीच सीमा पार सैन्य टकराव के बाद ट्रंप ने दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व से बातचीत कर ट्रुथ सोशल पर युद्धविराम कराने की घोषणा की।
नील नदी पर बने ग्रैंड इथियोपियन रेनेसां डैम को लेकर जारी जल विवाद को ट्रंप अपने सुलझाए गए मामलों में गिनवाते हैं। हालांकि, यहां कोई प्रत्यक्ष सैन्य युद्ध नहीं हुआ था और न ही कोई औपचारिक अंतिम समझौता हो पाया है।
9. इस्राइल और लेबनान
अप्रैल 2026 में हिजबुल्ला और इस्राइल के बीच सीमा पार सैन्य टकराव के बाद ट्रंप ने दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व से बातचीत कर ट्रुथ सोशल पर युद्धविराम कराने की घोषणा की।
नोबेल शांति पुरस्कार किसे और कैसे मिलता है?
नामांकन की प्रक्रिया- नोबेल शांति पुरस्कार के लिए सिर्फ निर्धारित मानदंडों को पूरा करने वाले व्यक्ति ही नामांकन भेज सकते हैं, जैसे- अलग-अलग राष्ट्रों के प्रमुख, सरकार के सदस्य, पूर्व नोबेल पुरस्कार विजेता और विश्वविद्यालयों के प्रोफेसर।
- किसी व्यक्ति का केवल नामित होना उसे नोबेल शांति पुरस्कार की दौड़ में शामिल नहीं कर देता। इसे लेकर नोबेल संस्था अलग से नाम चिह्नित करती है और उन पर ही विचार होता है। यह लिस्ट गोपनीय रहती है।
नामांकनों की समीक्षा
विजेता की घोषणा
ये भी पढ़ें: एक्सप्लेनर: कैसे मिलता है शांति का नोबेल? दौड़ में अंतरिक्ष स्टेशन, ईरान से जंग छेड़ने वाले ट्रंप, और भी नाम
- नामांकनों की समीक्षा नार्वे की संसद (स्टोर्टिंग) की ओर से नियुक्त पांच विशेषज्ञों की नॉर्विजियन नोबेल समिति करती है। समिति अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों की मदद से उम्मीदवारों की सूची को छोटा करती है और विश्लेषण करती है।
- पुरस्कार का निर्णय पूरी तरह स्वतंत्र होता है; इसमें सार्वजनिक वोट या किसी देश के राजनीतिक प्रभाव, जैसे- अमेरिकी या किसी अन्य देश की पसंद की कोई भूमिका नहीं होती।
विजेता की घोषणा
- विजेता के नाम की घोषणा ओस्लो में इस बार 8 अक्तूबर महीने में की जाती है और आधिकारिक पुरस्कार समारोह 10 दिसंबर को आयोजित होता है। एक बार विजेता का एलान हो जाने के बाद यह फैसला अंतिम होता है।
- नोबेल पुरस्कार को न तो कभी रद्द किया जा सकता है और न ही किसी और व्यक्ति को हस्तांतरित किया जा सकता है। हालांकि, विजेता पुरस्कार राशि को अपनी इच्छानुसार उपयोग करने के लिए स्वतंत्र होते हैं।
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ट्रंप का इस साल नोबेल पुरस्कार का दावा कितना मजबूत?
अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक विशेषज्ञों, विदेश नीति विश्लेषकों और तथ्य-जांचकर्ताओं के मुताबिक, डोनाल्ड ट्रंप का नोबेल शांति पुरस्कार की मांग का दावा काफी कमजोर है, लेकिन इसे बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है।1. दावे के पक्ष में तर्क (ट्रंप का पक्ष)
- ट्रंप का नोबेल शांति पुरस्कार के लिए दावे का एक मुख्य आधार यह है कि उनके प्रशासन ने इस्राइल-हमास, आर्मेनिया-अजरबैजान, और थाईलैंड-कंबोडिया जैसे संघर्षों में युद्धविराम या कूटनीतिक समझौते कराए हैं।
- इसके अलावा पाकिस्तान, इस्राइल, आर्मेनिया, अजरबैजान, कंबोडिया और रवांडा जैसे देशों के प्रमुखों ने उनके शांति प्रयासों के लिए नोबेल पुरस्कार में उनके नाम का प्रस्ताव या नामांकन किया है।
2. विशेषज्ञों का क्या तर्क
- विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रंप जिन मामलों में शांति का दावा करते हैं, वे स्थायी समाधान नहीं बल्कि अस्थायी युद्धविराम हैं। कांगो-रवांडा और थाईलैंड-कंबोडिया जैसे क्षेत्रों में समझौते के बाद भी हिंसा फिर से शुरू हुई या जारी रही।
- ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में पढ़ा चुकीं प्रोफेसर मार्गरेट मैकमिलन ने पिछले साल ही कहा था कि सर्बिया-कोसोवो और मिस्र-इथियोपिया के मामलों में सैन्य युद्ध था ही नहीं। ये देश एक-दूसरे पर गोलियां नहीं चला रहे थे, इसलिए यह खत्म करने के लिए कोई युद्ध ही नहीं था।"
डॉ. समीर पुरी।
- फोटो : अमर उजाला
- इतना ही नहीं बीते साल भारत-पाकिस्तान के बीच युद्ध रुकवाने में अपनी भूमिका का दावा करने वाले ट्रंप की नोबेल पाने की कोशिशों को तब झटका लगा, जब भारत के विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी व्यापारिक दबाव या मध्यस्थता के दावों को सीधे खारिज कर दिया था।
- नोबेल के संस्थापक आल्फ्रेड नोबेल की वसीयत के मुताबिक, "शांति पुरस्कार राष्ट्रों के बीच बंधुत्व-शांति बढ़ाने के लिए दिया जाता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, अमेरिका का अंतरराष्ट्रीय संगठनों, जैसे- विश्व स्वास्थ्य संगठन, पेरिस जलवायु समझौते से हटना इसके उलट कदम हैं।
- पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट ओस्लो की निदेशक नीना ग्रेगर के मुताबिक, "ट्रंप ने अपने पुराने सहयोगियों पर व्यापार युद्ध शुरू कर दिया... जब हम किसी शांतिप्रिय राष्ट्रपति की कल्पना करते हैं तो यह उसका उदाहरण नहीं है।"
- नॉर्विजियन नोबेल समिति के उपाध्यक्ष एस्ले तोजे पहले ही कह चुके हैं कि नोबेल पाने के लिए ट्रंप के दबाव और अभियानों की नीति सकारात्मक के बजाय नकारात्मक असर डालती है। कुछ उम्मीदवार इसके लिए बहुत जोर देते हैं और हम इसे पसंद नहीं करते।"