फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   ukraine-underground-schools-children-study-amid-russian-missile-drone-attacks

मिसाइलों के साए में पढ़ाई: यूक्रेन में जमीन के नीचे बने 74 स्कूल, बंकर में कैसे हो रही भविष्य की तैयारी?

Thu, 03 Sep 2026 04:13 AM IST
देवेश त्रिपाठी एंड्रयू ई. क्रेमर/इवेलिना रियाबेंको, द न्यूयॉर्क टाइम्स से साभार, जापोरिजिया
एंड्रयू ई. क्रेमर/इवेलिना रियाबेंको, द न्यूयॉर्क टाइम्स से साभार, जापोरिजिया Published by: देवेश त्रिपाठी Updated Thu, 03 Sep 2026 04:13 AM IST
सार
Register For Event

रूस के हमलों के बीच यूक्रेन ने बच्चों की शिक्षा जारी रखने के लिए भूमिगत स्कूलों का सहारा लिया है। जापोरिजिया में बने सुरक्षित परिसरों में विद्यार्थियों को हवाई हमलों के दौरान भी पढ़ाई का अवसर मिलता है। इन केंद्रों में हवा को साफ करने वाली व्यवस्था, बिजली आपूर्ति के वैकल्पिक इंतजाम और मजबूत सुरक्षा ढांचा मौजूद है।

विज्ञापन
ukraine-underground-schools-children-study-amid-russian-missile-drone-attacks
सायरन के बीच भी जारी रहती हैं कक्षाएं - फोटो : अमर उजाला प्रिंट

विस्तार

चार साल से लगातार बरसती मिसाइलों और लड़ाकू विमानों की गर्जना के बीच यूक्रेन के 74 स्कूल भविष्य की पीढी तैयारी करने में जुटे हैं। जमीन के ऊपर नजर डालें तो सिर्फ एक खुला खेल का मैदान या फुटबॉल का टर्फ नजर आता है। लेकिन कई मीटर गहरी मिट्टी और कंक्रीट की मजबूत दीवारों के नीचे उतरें, तो वहां नीले रंग की सुरंगों में सजी क्लासरूम्स, बेंचों पर झूलते छोटे-छोटे बच्चों के पैर और ब्लैकबोर्ड पर लिखे नए सत्र के सबक दिखाई देते हैं।
विज्ञापन


दक्षिणी यूक्रेन के औद्योगिक शहर जापोरिजिया में स्कूल के पहले दिन का नजारा किसी साइंस-फिक्शन फिल्म या दुनिया खत्म होने के बाद के दृश्य जैसा लग सकता है। लेकिन चार साल से ज्यादा समय से रूस के लगातार ड्रोन और मिसाइल हमलों का सामना कर रहे यूक्रेन के माता-पिता के लिए ये अंडरग्राउंड बंकर-स्कूल किसी अभिशाप नहीं, बल्कि सबसे बड़े सुकून का जरिया हैं। यूक्रेन में अब ऐसे 74 पूरी तरह से भूमिगत स्कूल संचालित हो रहे हैं।
विज्ञापन


पाताल में गए बिना बच्चों को कैसे पढ़ाएं?
किराने की दुकान चलाने वाले 39 वर्षीय ऑलेक्सांद्र लागिन, जिनके दो बेटे जमीन के नीचे पढ़ते हैं, साफ कहते हैं-ड्रोन और मिसाइलों के इस दौर में पाताल में गए बिना बच्चों को पढ़ाना नामुमकिन हो चुका है। हैरानी की बात यह है कि युद्ध के मोर्चे से महज 15 किमी दूर स्थित जापोरिजिया शहर राजधानी कीव की तुलना में बच्चों को निर्बाध शिक्षा देने के लिए बेहतर तैयार है।
विज्ञापन
विज्ञापन


सायरन बजने पर भी नहीं रुकतीं कक्षाएं
कीव में स्कूल के एक दिन में औसतन 158 मिनट तक हवाई सायरन बजते रहते हैं। सायरन बजते ही सभी क्लास के बच्चों को ठूंस-ठूंसकर सामान्य बेसमेंट में भर दिया जाता है, जहां पढ़ाई पूरी तरह ठप हो जाती है। जापोरिजिया में यूरोपीय फंडिंग से यहां 10 अत्याधुनिक भूमिगत स्कूल बनाए गए हैं। यहां सायरन बजने पर भी कक्षाएं एक पल के लिए नहीं रुकतीं।

स्कूलों को किस तरह किया गया महफूज?
  • अत्याधुनिक एयर डक्ट्स जो रेडिएशन व जहरीले धुएं को फिल्टर कर सकते हैं।
  • रूसी हमलों में ग्रिड ठप होने पर स्वतः चालू होने वाले हेवी-ड्यूटी डीजल जनरेटर।
  • बच्चे कंक्रीट की दीवारों के सहारे बने वेंटिलेशन पाइपों के नीचे खेलते हैं।
छात्र बोले-नहीं लगता डर
8वीं के छात्र डामिर कहते हैं-मुझे यहां पढ़ना अच्छा लगता है। डर नहीं लगता। जब फुटबॉल खेलते समय सायरन बजता है और खेल छोड़कर नीचे भागना पड़ता है, तो बुरा लगता है।

सैनिक पिता बोले- अब मैं मोर्चे पर बिना चिंता के गोली चला सकता हूं
कक्षा 8 में पढ़ने वाले 13 वर्षीय छात्र डैनिलो के पिता दिमित्रो सिजीख युद्ध के मोर्चे पर बंदूक थामे तैनात हैं। वे कहते हैं, मैं अपने बेटे की जान की परवाह किए बिना अपना फर्ज निभा पा रहा हूं।


एक पहलू यह भी...युद्ध के तनाव से गिर रहा बच्चों का टेस्ट स्कोर
कीव की रिसर्च संस्था 'सीडोस' की शिक्षा विश्लेषक टेटियाना झेरियोबकिना के अनुसार, युद्ध से पैदा हुए मानसिक तनाव और खौफ के कारण परीक्षाओं में बच्चों के स्कोर गिर रहे हैं। स्कूल की प्रिंसिपल हलीना वोल्कोवा गलियारे से गुजरते एक बच्चे को गले लगाते हुए कहती हैं, “हम इसे भयावह या कयामत का मंजर कहकर रोते नहीं हैं, क्योंकि यही अब हमारी जिंदगी का सच है।“
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed