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‘भारत रचनात्मक बातचीत करे’: सिंधु जल संधि पर पाकिस्तान ने फिर बढ़ाया हाथ; क्या है पूरा विवाद?
Wed, 02 Sep 2026 08:45 PM IST
राकेश कुमार
पीटीआई, इस्लामाबाद।
पीटीआई, इस्लामाबाद।
Published by: राकेश कुमार
Updated Wed, 02 Sep 2026 08:45 PM IST
पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने सिंधु जल संधि को स्थगित रखने का फैसला किया था। पाकिस्तान ने भारत के इस कदम को चुनौती देते हुए हेग स्थित स्थायी मध्यस्थता अदालत का रुख किया। भारत इस अदालत की कानूनी वैधता को ही स्वीकार नहीं करता। अब पाकिस्तान ने फिर भारत से संधि के ढांचे के भीतर रचनात्मक बातचीत करने और उसके प्रावधानों का पालन करने की अपील की है।
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सिंधु जल संधि
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
पाकिस्तान ने सिंधु जल संधि को लेकर एक बार फिर भारत से बातचीत की अपील की है। बुधवार को पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंदाराबी ने कहा कि भारत को दोनों देशों के बीच स्वीकार की गई सिंधु जल संधि के ढांचे के भीतर पाकिस्तान के साथ रचनात्मक तरीके से जुड़ना चाहिए।
पाकिस्तान का यह बयान ऐसे समय आया है, जब भारत ने स्थायी मध्यस्थता अदालत के उस आदेश को खारिज कर दिया है, जिसमें सिंधु जल संधि को लेकर भारत के फैसले पर सवाल उठा था। दोनों देशों के बीच इस संधि को लेकर पहले से तनाव बना हुआ है।
सिंधु जल संधि को लेकर विवाद शुरू कैसे हुआ?
इस पूरे विवाद की जड़ पिछले साल अप्रैल में हुए पहलगाम आतंकी हमले से जुड़ी है। इस हमले में 26 नागरिकों की मौत हुई थी। हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ कई कूटनीतिक और आर्थिक कदम उठाए थे। इन्हीं कदमों के तहत भारत ने पाकिस्तान के साथ सिंधु जल संधि को स्थगित रखने का फैसला किया था। इसके बाद से ही संधि को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच विवाद और बढ़ गया।
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पाकिस्तान ने भारत के फैसले को कहां चुनौती दी?
भारत के फैसले के बाद पाकिस्तान ने इस मामले को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाया। पाकिस्तान ने इसी साल मार्च में हेग स्थित स्थायी मध्यस्थता अदालत का रुख किया था। पाकिस्तान का मकसद संधि की मौजूदा स्थिति को स्पष्ट कराना था। उसने अदालत के सामने भारत के संधि को स्थगित रखने के फैसले को चुनौती दी।
भारत अदालत के फैसले को क्यों नहीं मानता?
भारत ने इस मामले में अपना रुख पहले से स्पष्ट रखा है। भारत स्थायी मध्यस्थता अदालत के इस मामले में अधिकार क्षेत्र और उसकी स्थापना को ही स्वीकार नहीं करता। भारत का कहना है कि यह अदालत कानूनी तौर पर अस्तित्व में नहीं है। भारत ने इसे ‘अवैध रूप से गठित और तथाकथित मध्यस्थता अदालत’ बताया है। भारत के मुताबिक, इस कथित मध्यस्थता निकाय की स्थापना ही सिंधु जल संधि का गंभीर उल्लंघन है। इसलिए पाकिस्तान जिस अदालत के फैसले को संधि के भविष्य से जोड़ रहा है, भारत उस अदालत की वैधता को ही चुनौती देता रहा है।
पाकिस्तान अब अदालत के फैसले को लेकर क्या कह रहा है?
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंदाराबी ने कहा कि अदालत ने यह दोहराया है कि सिंधु जल संधि पूरी तरह लागू है और दोनों देशों पर बाध्यकारी है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान अदालत के फैसले को पूरी तरह लागू कराने के लिए हर संभव कदम उठाएगा। पाकिस्तान का कहना है कि वह संधि की भाषा और उसके प्रावधानों के अनुसार उसका अक्षरशः पालन करने के लिए प्रतिबद्ध है।
भारत से पाकिस्तान आखिर क्या चाहता है?
पाकिस्तान की मौजूदा अपील का सबसे अहम हिस्सा भारत के साथ बातचीत को लेकर है। अंदाराबी ने कहा कि पाकिस्तान लगातार भारत से भी इसी तरह का रुख अपनाने का आग्रह करता रहेगा। उन्होंने कहा कि भारत को भी संधि को उसकी मूल भावना और पूरे कानूनी दस्तावेजी प्रावधानों के अनुसार बनाए रखना चाहिए। पाकिस्तान चाहता है कि भारत उसके साथ इसी आधार पर रचनात्मक तरीके से बातचीत करे।
भारत का रुख क्या है?
फिलहाल दोनों देशों के रुख में स्पष्ट अंतर दिखाई दे रहा है। पाकिस्तान सिंधु जल संधि को लागू और बाध्यकारी मानते हुए भारत से बातचीत की अपील कर रहा है। वहीं भारत स्थायी मध्यस्थता अदालत को ही कानूनी तौर पर मान्यता नहीं देता। ऐसे में पाकिस्तान का ताजा बयान बातचीत की इच्छा जरूर दिखाता है, लेकिन संधि की कानूनी स्थिति को लेकर दोनों देशों के बीच मतभेद अभी बने हुए हैं।
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पाकिस्तान का यह बयान ऐसे समय आया है, जब भारत ने स्थायी मध्यस्थता अदालत के उस आदेश को खारिज कर दिया है, जिसमें सिंधु जल संधि को लेकर भारत के फैसले पर सवाल उठा था। दोनों देशों के बीच इस संधि को लेकर पहले से तनाव बना हुआ है।
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सिंधु जल संधि को लेकर विवाद शुरू कैसे हुआ?
इस पूरे विवाद की जड़ पिछले साल अप्रैल में हुए पहलगाम आतंकी हमले से जुड़ी है। इस हमले में 26 नागरिकों की मौत हुई थी। हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ कई कूटनीतिक और आर्थिक कदम उठाए थे। इन्हीं कदमों के तहत भारत ने पाकिस्तान के साथ सिंधु जल संधि को स्थगित रखने का फैसला किया था। इसके बाद से ही संधि को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच विवाद और बढ़ गया।
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पाकिस्तान ने भारत के फैसले को कहां चुनौती दी?
भारत के फैसले के बाद पाकिस्तान ने इस मामले को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाया। पाकिस्तान ने इसी साल मार्च में हेग स्थित स्थायी मध्यस्थता अदालत का रुख किया था। पाकिस्तान का मकसद संधि की मौजूदा स्थिति को स्पष्ट कराना था। उसने अदालत के सामने भारत के संधि को स्थगित रखने के फैसले को चुनौती दी।
भारत अदालत के फैसले को क्यों नहीं मानता?
भारत ने इस मामले में अपना रुख पहले से स्पष्ट रखा है। भारत स्थायी मध्यस्थता अदालत के इस मामले में अधिकार क्षेत्र और उसकी स्थापना को ही स्वीकार नहीं करता। भारत का कहना है कि यह अदालत कानूनी तौर पर अस्तित्व में नहीं है। भारत ने इसे ‘अवैध रूप से गठित और तथाकथित मध्यस्थता अदालत’ बताया है। भारत के मुताबिक, इस कथित मध्यस्थता निकाय की स्थापना ही सिंधु जल संधि का गंभीर उल्लंघन है। इसलिए पाकिस्तान जिस अदालत के फैसले को संधि के भविष्य से जोड़ रहा है, भारत उस अदालत की वैधता को ही चुनौती देता रहा है।
पाकिस्तान अब अदालत के फैसले को लेकर क्या कह रहा है?
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंदाराबी ने कहा कि अदालत ने यह दोहराया है कि सिंधु जल संधि पूरी तरह लागू है और दोनों देशों पर बाध्यकारी है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान अदालत के फैसले को पूरी तरह लागू कराने के लिए हर संभव कदम उठाएगा। पाकिस्तान का कहना है कि वह संधि की भाषा और उसके प्रावधानों के अनुसार उसका अक्षरशः पालन करने के लिए प्रतिबद्ध है।
भारत से पाकिस्तान आखिर क्या चाहता है?
पाकिस्तान की मौजूदा अपील का सबसे अहम हिस्सा भारत के साथ बातचीत को लेकर है। अंदाराबी ने कहा कि पाकिस्तान लगातार भारत से भी इसी तरह का रुख अपनाने का आग्रह करता रहेगा। उन्होंने कहा कि भारत को भी संधि को उसकी मूल भावना और पूरे कानूनी दस्तावेजी प्रावधानों के अनुसार बनाए रखना चाहिए। पाकिस्तान चाहता है कि भारत उसके साथ इसी आधार पर रचनात्मक तरीके से बातचीत करे।
भारत का रुख क्या है?
- भारत ने पहलगाम आतंकी हमले के बाद सिंधु जल संधि को स्थगित रखने का फैसला किया।
- भारत स्थायी मध्यस्थता अदालत की कानूनी वैधता और उसके अधिकार क्षेत्र को स्वीकार नहीं करता।
- भारत का कहना है कि कथित मध्यस्थता निकाय की स्थापना ही संधि का गंभीर उल्लंघन है।
फिलहाल दोनों देशों के रुख में स्पष्ट अंतर दिखाई दे रहा है। पाकिस्तान सिंधु जल संधि को लागू और बाध्यकारी मानते हुए भारत से बातचीत की अपील कर रहा है। वहीं भारत स्थायी मध्यस्थता अदालत को ही कानूनी तौर पर मान्यता नहीं देता। ऐसे में पाकिस्तान का ताजा बयान बातचीत की इच्छा जरूर दिखाता है, लेकिन संधि की कानूनी स्थिति को लेकर दोनों देशों के बीच मतभेद अभी बने हुए हैं।