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नेपाल जलप्रलय: मदद से पीछे हटे अमेरिका जैसे देश, ट्रंप के फैसले से राहत कार्यों को लगा बड़ा झटका
Thu, 10 Sep 2026 07:12 AM IST
नितिन गौतम
अनुप्रीता दास/ सजल प्रधान और बिनोद घिमरे, द न्यूयॉर्क टाइम्स
अनुप्रीता दास/ सजल प्रधान और बिनोद घिमरे, द न्यूयॉर्क टाइम्स
Published by: नितिन गौतम
Updated Thu, 10 Sep 2026 07:12 AM IST
नेपाल में आई भयानक त्रासदी और बड़ी संख्या में जान-माल की हानि के बावजूद दुनिया के कई देशों की तरफ से नेपाल को मामूली सहायता दी गई है। अमेरिका जैसी महाशक्ति ने भी मदद से हाथ खींच लिए हैं। आइए जानते हैं क्या है वजह...
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नेपाल बाढ़ त्रासदी
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
नेपाल में अगस्त के अंत में ग्लेशियर टूटने से आई सदी की सबसे भीषण बाढ़ और भूस्खलन के दो हफ्ते बाद भी राहत कार्यों में भारी लाचारी देखने को मिल रही है। नेपाल और पड़ोसी तिब्बत में 1,300 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और करीब 5,000 लोग अब भी लापता हैं। इस मानवीय संकट के बीच अमेरिकी विदेशी सहायता एजेंसी यूएस एजेंसी फॉर इंटरनेशनल डेवलपमेंट (यूएसएआईडी) का पूरी तरह गायब रहना राहत और बचाव कार्यों पर भारी पड़ रहा है।
ट्रंप प्रशासन ने पिछले साल की शुरुआत में यूएसएआईडी को बंद कर दिया था सीधा असर अब जमीन पर दिख रहा है। नेपाल में अमेरिकी फंड से चलने वाले कई गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) को अपने कार्यक्रम बंद करने पड़े थे, जिससे अचानक आई इस आपदा के समय वे त्वरित राहत सामग्री और संसाधन उपलब्ध कराने में असमर्थ साबित हो रहे हैं।
भारत ने भेजी राहत की 7वीं खेप सी-17 विमान ले गया 35 टन सामान
भारत ने बुधवार को विनाशकारी बाढ़ की मार झेल रहे नेपाल के लिए मानवीय सहायता की 7वीं खेप भेजी। भारतीय वायुसेना के विशेष सी-17 परिवहन विमान के जरिये 35 टन सामान और उपकरण भेजे गए हैं। भारत लगातार बाढ़ प्रभावित नेपाल को राहत सामग्री और आवश्यक दवाएं भेज रहा है।
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2015 के भूकंप और मौजूदा बाढ़ में मदद का अंतर
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ट्रंप प्रशासन ने पिछले साल की शुरुआत में यूएसएआईडी को बंद कर दिया था सीधा असर अब जमीन पर दिख रहा है। नेपाल में अमेरिकी फंड से चलने वाले कई गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) को अपने कार्यक्रम बंद करने पड़े थे, जिससे अचानक आई इस आपदा के समय वे त्वरित राहत सामग्री और संसाधन उपलब्ध कराने में असमर्थ साबित हो रहे हैं।
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भारत ने भेजी राहत की 7वीं खेप सी-17 विमान ले गया 35 टन सामान
भारत ने बुधवार को विनाशकारी बाढ़ की मार झेल रहे नेपाल के लिए मानवीय सहायता की 7वीं खेप भेजी। भारतीय वायुसेना के विशेष सी-17 परिवहन विमान के जरिये 35 टन सामान और उपकरण भेजे गए हैं। भारत लगातार बाढ़ प्रभावित नेपाल को राहत सामग्री और आवश्यक दवाएं भेज रहा है।
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2015 के भूकंप और मौजूदा बाढ़ में मदद का अंतर
- 2015 का भूकंप : भूकंप के 48 घंटे के भीतर अमेरिका ने 128 सदस्यीय विशेषज्ञ आपदा प्रतिक्रिया दल भेजा था और तुरंत 1 करोड़ डॉलर की मानवीय मदद का ऐलान किया था।
- 2026 की बाढ़ : इतनी बड़ी विभीषिका के बावजूद अमेरिका की ओर से केवल 10,000 परिवारों के भोजन के लिए मात्र 36 लाख डॉलर (करीब 30 करोड़ रुपये) की सीमित सहायता भेजी गई है।
- जापान : 2015 के भूकंप के समय जापान ने तत्काल 80 लाख डॉलर दिए थे, जबकि इस बार केवल 30 लाख डॉलर की मदद का वादा किया है।