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बांग्लादेश को मिला 23वां राष्ट्रपति: मिर्जा फखरुल ने ली पद और गोपनीयता की शपथ, जानिए कितने वोटों से जीता चुनाव
Fri, 21 Aug 2026 09:01 PM IST
राकेश कुमार
पीटीआई, ढाका।
पीटीआई, ढाका।
Published by: राकेश कुमार
Updated Fri, 21 Aug 2026 09:01 PM IST
बांग्लादेश में 35 साल बाद हुए ऐतिहासिक राष्ट्रपति चुनाव के बाद मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर ने देश के 23वें राष्ट्रपति के रूप में कमान संभाल ली है। बीएनपी के दो-तिहाई बहुमत और नए सांविधानिक बदलावों की चर्चा के बीच, क्या यह बदलाव बांग्लादेश की राजनीति और शक्ति संतुलन को पूरी तरह बदल देगा?
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बांग्लादेश के नए राष्ट्रपति आलमगीर
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
वरिष्ठ राजनीतिज्ञ मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर ने शुक्रवार को बांग्लादेश के 23वें राष्ट्रपति के रूप में पद और गोपनीयता की शपथ ली। वे सत्तारूढ़ बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के लंबे समय तक महासचिव रह चुके हैं। ढाका स्थित राष्ट्रपति के आधिकारिक आवास-सह-कार्यालय, बंगभवन के दरबार हॉल में आयोजित समारोह में जातीय संसद के कार्यवाहक अध्यक्ष कायसर कमाल ने 78 वर्षीय आलमगीर को पद की शपथ दिलाई।
शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री तारिक रहमान, नेता प्रतिपक्ष शफीकुर रहमान, पूर्व मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस, कैबिनेट मंत्री, सेना के शीर्ष अधिकारी और कई अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
नई सरकार का मंत्रिमंडल विस्तार
राष्ट्रपति पद संभालने के तुरंत बाद आलमगीर ने मंत्रिमंडल में शामिल पांच नए सदस्यों को पद की शपथ दिलाई। इन नए मंत्रियों के शामिल होने के बाद अब प्रधानमंत्री सहित मंत्रिमंडल के सदस्यों की कुल संख्या 55 हो गई है। बीएनपी के शमीम कैंसर लिंकन और प्रधानमंत्री के विदेश मामलों के सलाहकार हुमायूं कबीर को राज्य मंत्री के रूप में शपथ दिलाई गई।
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नागरिक उड्डयन और पर्यटन राज्य मंत्री रशीदुज्जमां मिल्लाट को पदोन्नत कर पूर्ण मंत्री के रूप में शपथ दिलाई गई। इसके अलावा, बीएनपी की स्थायी समिति के सदस्य अब्दुल मोईन खान, बांग्लादेश जातीय पार्टी के अध्यक्ष अंदलीव रहमान और बीएनपी सांसद सा चिंग प्रू ने भी मंत्री पद की शपथ ली। शपथ ग्रहण समारोह से पहले मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर ने बीएनपी के संस्थापक जियाउर रहमान और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया की मजार पर जाकर श्रद्धांजलि अर्पित की और प्रार्थना की।
आलमगीर ने कर्नल ओली को हराया
गुरुवार को हुए राष्ट्रपति चुनाव में आलमगीर ने अपने एकमात्र प्रतिद्वंद्वी सेवानिवृत्त कर्नल ओली अहमद को हराया। ओली अहमद जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाले 11-दलीय विपक्षी गठबंधन के उम्मीदवार थे। पिछले 35 वर्षों में इस पद के लिए यह पहला प्रतिस्पर्धी चुनाव था। बीएनपी के दिग्गज नेता आलमगीर को 255 वोट मिले, जबकि ओली अहमद के पक्ष में 88 वोट पड़े।
बांग्लादेश में 1991 के बाद यह पहला मौका था जब राष्ट्रपति पद के लिए मतदान हुआ। हाल के दशकों में यह पद आमतौर पर आम सहमति और निर्विरोध निर्वाचन के जरिए भरा जाता रहा है। पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन के स्वास्थ्य कारणों से अपना पांच साल का कार्यकाल पूरा करने से पहले इस्तीफा देने के कारण यह चुनाव कराना अनिवार्य हुआ था। संविधान के अनुसार, राष्ट्रपति का पद रिक्त होने के 90 दिनों के भीतर नए राष्ट्रपति का चुनाव करना जरूरी होता है। शहाबुद्दीन के इस्तीफे के बाद संसदीय अध्यक्ष हाफिज उद्दीन अहमद ने कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में जिम्मेदारी संभाली थी।
12 फरवरी को हुए चुनावों में सत्ता में आई बीएनपी के पास इस समय संसद में दो-तिहाई बहुमत है। चुनाव से पहले आलमगीर ने वादा किया था कि वे देश की स्वतंत्रता और संप्रभुता से कभी समझौता नहीं करेंगे। वे दो दशकों से अधिक समय तक बीएनपी के प्रमुख नेताओं में शामिल रहे हैं। 2011 में कार्यवाहक महासचिव बनने के बाद उन्होंने 2016 में औपचारिक रूप से महासचिव पद की कमान संभाली थी। पूर्व प्रधानमंत्री जियाउर रहमान की जेल यात्रा और तारिक रहमान की विदेश में मौजूदगी के दौरान उन्होंने पार्टी का नेतृत्व करने में अहम भूमिका निभाई थी।
बांग्लादेश की संसदीय व्यवस्था में राष्ट्रपति का पद मुख्य रूप से औपचारिक होता है। हालांकि, प्रधानमंत्री और मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति जैसे महत्वपूर्ण सांविधानिक अधिकार राष्ट्रपति के पास होते हैं। राष्ट्रपति सशस्त्र बलों के सर्वोच्च कमांडर भी होते हैं, लेकिन इन शक्तियों का इस्तेमाल प्रधानमंत्री की सलाह पर ही किया जाता है।
यह भी पढ़ें: कौन हैं मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर?: छात्र नेता से बांग्लादेश के राष्ट्रपति तक; जानें पांच दशक का सियासी सफर
मिर्जा फखरुल का राजनीतिक सफर
पेशे से अर्थशास्त्री रहे आलमगीर ने छात्र जीवन में वामपंथी कार्यकर्ता के रूप में अपनी राजनीति की शुरुआत की थी, जब बांग्लादेश पूर्वी पाकिस्तान का हिस्सा था। 1971 में भारत की मदद से बांग्लादेश आजाद हुआ था। 90 के दशक की शुरुआत में बीएनपी में शामिल होने के बाद उन्होंने कृषि और नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री के रूप में कार्य किया। इस वर्ष 12 फरवरी के चुनावों में बीएनपी की वापसी के बाद उन्हें स्थानीय सरकार मंत्री बनाया गया था।
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शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री तारिक रहमान, नेता प्रतिपक्ष शफीकुर रहमान, पूर्व मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस, कैबिनेट मंत्री, सेना के शीर्ष अधिकारी और कई अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
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नई सरकार का मंत्रिमंडल विस्तार
राष्ट्रपति पद संभालने के तुरंत बाद आलमगीर ने मंत्रिमंडल में शामिल पांच नए सदस्यों को पद की शपथ दिलाई। इन नए मंत्रियों के शामिल होने के बाद अब प्रधानमंत्री सहित मंत्रिमंडल के सदस्यों की कुल संख्या 55 हो गई है। बीएनपी के शमीम कैंसर लिंकन और प्रधानमंत्री के विदेश मामलों के सलाहकार हुमायूं कबीर को राज्य मंत्री के रूप में शपथ दिलाई गई।
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नागरिक उड्डयन और पर्यटन राज्य मंत्री रशीदुज्जमां मिल्लाट को पदोन्नत कर पूर्ण मंत्री के रूप में शपथ दिलाई गई। इसके अलावा, बीएनपी की स्थायी समिति के सदस्य अब्दुल मोईन खान, बांग्लादेश जातीय पार्टी के अध्यक्ष अंदलीव रहमान और बीएनपी सांसद सा चिंग प्रू ने भी मंत्री पद की शपथ ली। शपथ ग्रहण समारोह से पहले मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर ने बीएनपी के संस्थापक जियाउर रहमान और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया की मजार पर जाकर श्रद्धांजलि अर्पित की और प्रार्थना की।
आलमगीर ने कर्नल ओली को हराया
गुरुवार को हुए राष्ट्रपति चुनाव में आलमगीर ने अपने एकमात्र प्रतिद्वंद्वी सेवानिवृत्त कर्नल ओली अहमद को हराया। ओली अहमद जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाले 11-दलीय विपक्षी गठबंधन के उम्मीदवार थे। पिछले 35 वर्षों में इस पद के लिए यह पहला प्रतिस्पर्धी चुनाव था। बीएनपी के दिग्गज नेता आलमगीर को 255 वोट मिले, जबकि ओली अहमद के पक्ष में 88 वोट पड़े।
बांग्लादेश में 1991 के बाद यह पहला मौका था जब राष्ट्रपति पद के लिए मतदान हुआ। हाल के दशकों में यह पद आमतौर पर आम सहमति और निर्विरोध निर्वाचन के जरिए भरा जाता रहा है। पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन के स्वास्थ्य कारणों से अपना पांच साल का कार्यकाल पूरा करने से पहले इस्तीफा देने के कारण यह चुनाव कराना अनिवार्य हुआ था। संविधान के अनुसार, राष्ट्रपति का पद रिक्त होने के 90 दिनों के भीतर नए राष्ट्रपति का चुनाव करना जरूरी होता है। शहाबुद्दीन के इस्तीफे के बाद संसदीय अध्यक्ष हाफिज उद्दीन अहमद ने कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में जिम्मेदारी संभाली थी।
12 फरवरी को हुए चुनावों में सत्ता में आई बीएनपी के पास इस समय संसद में दो-तिहाई बहुमत है। चुनाव से पहले आलमगीर ने वादा किया था कि वे देश की स्वतंत्रता और संप्रभुता से कभी समझौता नहीं करेंगे। वे दो दशकों से अधिक समय तक बीएनपी के प्रमुख नेताओं में शामिल रहे हैं। 2011 में कार्यवाहक महासचिव बनने के बाद उन्होंने 2016 में औपचारिक रूप से महासचिव पद की कमान संभाली थी। पूर्व प्रधानमंत्री जियाउर रहमान की जेल यात्रा और तारिक रहमान की विदेश में मौजूदगी के दौरान उन्होंने पार्टी का नेतृत्व करने में अहम भूमिका निभाई थी।
बांग्लादेश की संसदीय व्यवस्था में राष्ट्रपति का पद मुख्य रूप से औपचारिक होता है। हालांकि, प्रधानमंत्री और मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति जैसे महत्वपूर्ण सांविधानिक अधिकार राष्ट्रपति के पास होते हैं। राष्ट्रपति सशस्त्र बलों के सर्वोच्च कमांडर भी होते हैं, लेकिन इन शक्तियों का इस्तेमाल प्रधानमंत्री की सलाह पर ही किया जाता है।
यह भी पढ़ें: कौन हैं मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर?: छात्र नेता से बांग्लादेश के राष्ट्रपति तक; जानें पांच दशक का सियासी सफर
मिर्जा फखरुल का राजनीतिक सफर
पेशे से अर्थशास्त्री रहे आलमगीर ने छात्र जीवन में वामपंथी कार्यकर्ता के रूप में अपनी राजनीति की शुरुआत की थी, जब बांग्लादेश पूर्वी पाकिस्तान का हिस्सा था। 1971 में भारत की मदद से बांग्लादेश आजाद हुआ था। 90 के दशक की शुरुआत में बीएनपी में शामिल होने के बाद उन्होंने कृषि और नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री के रूप में कार्य किया। इस वर्ष 12 फरवरी के चुनावों में बीएनपी की वापसी के बाद उन्हें स्थानीय सरकार मंत्री बनाया गया था।