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इमरान खान के इलाज पर फिर बवाल: निजी अस्पताल की जगह PIMS ले गई सरकार, बहन ने खोला मोर्चा; किस पर गिरेगी गाज?
Sat, 22 Aug 2026 04:28 PM IST
राकेश कुमार
पीटीआई, इस्लामाबाद।
पीटीआई, इस्लामाबाद।
Published by: राकेश कुमार
Updated Sat, 22 Aug 2026 04:28 PM IST
सुप्रीम कोर्ट ने इमरान खान को निजी अस्पताल ले जाने का आदेश दिया था, लेकिन उन्हें सरकारी पीआईएमएस अस्पताल ले जाया गया। अब उनकी बहन ने इसे अदालत के आदेश का उल्लंघन बताते हुए प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ समेत कई अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की मांग की है। दूसरी ओर, सरकार सुरक्षा कारणों का हवाला दे रही है और सुप्रीम कोर्ट के आदेश की समीक्षा भी चाहती है।
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इमरान खान के इलाज पर बवाल
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
पाकिस्तान के जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के इलाज को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। उनकी बहन उज्मा खान ने शनिवार को सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिका दायर की है। उज्मा खान का आरोप है कि सरकार और वरिष्ठ अधिकारियों ने सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश का जानबूझकर पालन नहीं किया, जिसमें इमरान खान को मेडिकल जांच और इलाज के लिए एक निजी अस्पताल ले जाने को कहा गया था। उन्होंने 18 अगस्त के सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन करने के आरोप में संबंधित लोगों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू करने की मांग की है।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या आदेश दिया था?
सुप्रीम कोर्ट ने 18 अगस्त को अधिकारियों को 73 वर्षीय इमरान खान को रावलपिंडी की अदियाला जेल से इस्लामाबाद के शिफा इंटरनेशनल अस्पताल ले जाने का निर्देश दिया था। अदालत ने इसके लिए दो दिन का समय दिया था। साथ ही कहा था कि इमरान खान को 16 सितंबर को होने वाली अगली सुनवाई तक अस्पताल में रखा जाए।
लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इमरान खान को 20 और 21 अगस्त की रात मेडिकल जांच और इलाज के लिए इस्लामाबाद के सरकारी पाकिस्तान इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज यानी पीआईएमएस ले जाया गया। जांच के बाद उन्हें वापस अदियाला जेल भेज दिया गया। इमरान खान के परिवार और उनकी पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के नेताओं ने इसे सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन बताया है।
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पीएम शहबाज समेत कई अधिकारी बने पक्षकार
उज्मा खान ने अपनी याचिका में प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, कानून मंत्री आजम नजीर तरार और सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार समेत कई लोगों को पक्षकार बनाया है। इनमें अदियाला जेल के अधीक्षक साजिद बेग समेत कई वरिष्ठ सरकारी अधिकारी भी शामिल हैं।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि संबंधित लोगों ने 18 अगस्त के आदेश की जानबूझकर और सोच-समझकर अवहेलना की। इसमें कहा गया है कि आदेश का पालन न करने और उसके खुले उल्लंघन के कारण सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा। याचिका के मुताबिक, संबंधित अधिकारियों की अपनी स्वीकारोक्ति से भी साफ है कि 18 अगस्त के आदेश में दिए गए निर्देशों का पालन नहीं हुआ। उज्मा खान ने कहा कि इमरान खान को शिफा इंटरनेशनल अस्पताल न भेजने से कोई संदेह नहीं रह जाता कि अधिकारियों ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अनदेखी करने का फैसला किया। याचिका में यह भी कहा गया है कि इस तरह के कदम से सुप्रीम कोर्ट के अधिकार और उसकी गरिमा को नुकसान पहुंचता है। इसलिए अदालत को इस मामले का संज्ञान लेना चाहिए।
नोटिस और कार्रवाई की मांग
उज्मा खान ने सुप्रीम कोर्ट से संबंधित लोगों को कारण बताओ नोटिस जारी करने की मांग की है। उन्होंने यह भी मांग की है कि सभी पक्षकारों को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने का निर्देश दिया जाए। याचिका में उनके खिलाफ उचित सजा देने और इमरान खान की मेडिकल जांच से जुड़े अदालत के निर्देशों को लागू कराने के लिए जरूरी कदम उठाने की भी मांग की गई है।
सरकार ने सुरक्षा का हवाला दिया
हालांकि, पाकिस्तान सरकार ने इमरान खान को शिफा इंटरनेशनल अस्पताल के बजाय पीआईएमएस ले जाने के फैसले का बचाव किया है। सरकार ने इसके पीछे सुरक्षा कारणों का हवाला दिया है। अस्पताल प्रशासन के अनुसार, शिफा इंटरनेशनल अस्पताल के दो विशेषज्ञ भी पीआईएमएस में इमरान खान की आंखों की जांच में शामिल हुए थे। वहीं, बाकी मेडिकल जांच पीआईएमएस के विशेषज्ञों ने की।
यह भी पढ़ें: 'न्याय-नॉमिक्स से ही बढ़ेगी अर्थव्यवस्था': सीजेआई सूर्यकांत का बयान, बोले- केवल भूगोल से नहीं मिलती तरक्की
सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश की समीक्षा भी मांगी
इस बीच पाकिस्तान सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर कर इमरान खान को निजी अस्पताल भेजने के आदेश की समीक्षा और उसे वापस लेने की मांग की है। सरकार का तर्क है कि यह आदेश केवल इमरान खान पर लागू होता है और इससे दूसरे कैदी भी निजी अस्पतालों में इलाज की मांग कर सकते हैं। सरकार ने कहा है कि ऐसा आदेश भेदभावपूर्ण है और इससे दूसरे कैदियों के लिए भी एक मिसाल बन सकती है।
आंखों की बीमारी को लेकर लंबे समय से चिंता
इमरान खान के परिवार और समर्थक पिछले कई महीनों से उनकी सेहत को लेकर चिंता जता रहे हैं। खासकर उनकी आंखों की बीमारी को लेकर सवाल उठते रहे हैं। इस साल जनवरी के आखिर में उनकी दाहिनी आंख में राइट सेंट्रल रेटिनल वेन ऑक्लूजन का पता चला था। इसके बाद उन्हें कई बार पीआईएमएस ले जाया गया। जेल अधिकारियों की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दाखिल एक रिपोर्ट में कहा गया है कि इमरान खान की आंखों की स्थिति में काफी सुधार हुआ है और उनकी दृष्टि लगभग सामान्य है। इमरान खान 2023 से रावलपिंडी की अदियाला जेल में बंद हैं। उनके खिलाफ कई मामले चल रहे हैं।
रावलपिंडी में पाकिस्तानी सेना की तैनाती
पाकिस्तान की संघीय सरकार ने पंजाब राज्य के गृह विभाग के अनुरोध पर रावलपिंडी में अगले छह महीनों के लिए पाकिस्तानी सेना को तैनात करने की मंजूरी दे दी है। गृह एवं मादक पदार्थ नियंत्रण मंत्रालय की ओर से जारी आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, संविधान के अनुच्छेद 245 के तहत सेना की तीन कंपनियों को संवेदनशील सुरक्षा कर्तव्यों के लिए तैनात किया गया है। सरकार का कहना है कि यह कदम जिला प्रशासन की मांग के अनुसार किसी भी अप्रिय या अनपेक्षित स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए उठाया गया है।
इमरान खान की पार्टी के नेता की गोलीबारी के बाद बढ़ा तनाव
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब कुछ ही दिन पहले पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ से जुड़े एक व्यक्ति ने सुरक्षा बलों पर गोलीबारी की थी, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई में वह मारा गया था। हालांकि, पीटीआई ने इस घटना से खुद को अलग करते हुए कहा है कि उसका आतंकवाद से कोई लेना-देना नहीं है।
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सुप्रीम कोर्ट ने क्या आदेश दिया था?
सुप्रीम कोर्ट ने 18 अगस्त को अधिकारियों को 73 वर्षीय इमरान खान को रावलपिंडी की अदियाला जेल से इस्लामाबाद के शिफा इंटरनेशनल अस्पताल ले जाने का निर्देश दिया था। अदालत ने इसके लिए दो दिन का समय दिया था। साथ ही कहा था कि इमरान खान को 16 सितंबर को होने वाली अगली सुनवाई तक अस्पताल में रखा जाए।
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लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इमरान खान को 20 और 21 अगस्त की रात मेडिकल जांच और इलाज के लिए इस्लामाबाद के सरकारी पाकिस्तान इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज यानी पीआईएमएस ले जाया गया। जांच के बाद उन्हें वापस अदियाला जेल भेज दिया गया। इमरान खान के परिवार और उनकी पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के नेताओं ने इसे सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन बताया है।
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पीएम शहबाज समेत कई अधिकारी बने पक्षकार
उज्मा खान ने अपनी याचिका में प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, कानून मंत्री आजम नजीर तरार और सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार समेत कई लोगों को पक्षकार बनाया है। इनमें अदियाला जेल के अधीक्षक साजिद बेग समेत कई वरिष्ठ सरकारी अधिकारी भी शामिल हैं।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि संबंधित लोगों ने 18 अगस्त के आदेश की जानबूझकर और सोच-समझकर अवहेलना की। इसमें कहा गया है कि आदेश का पालन न करने और उसके खुले उल्लंघन के कारण सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा। याचिका के मुताबिक, संबंधित अधिकारियों की अपनी स्वीकारोक्ति से भी साफ है कि 18 अगस्त के आदेश में दिए गए निर्देशों का पालन नहीं हुआ। उज्मा खान ने कहा कि इमरान खान को शिफा इंटरनेशनल अस्पताल न भेजने से कोई संदेह नहीं रह जाता कि अधिकारियों ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अनदेखी करने का फैसला किया। याचिका में यह भी कहा गया है कि इस तरह के कदम से सुप्रीम कोर्ट के अधिकार और उसकी गरिमा को नुकसान पहुंचता है। इसलिए अदालत को इस मामले का संज्ञान लेना चाहिए।
नोटिस और कार्रवाई की मांग
उज्मा खान ने सुप्रीम कोर्ट से संबंधित लोगों को कारण बताओ नोटिस जारी करने की मांग की है। उन्होंने यह भी मांग की है कि सभी पक्षकारों को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने का निर्देश दिया जाए। याचिका में उनके खिलाफ उचित सजा देने और इमरान खान की मेडिकल जांच से जुड़े अदालत के निर्देशों को लागू कराने के लिए जरूरी कदम उठाने की भी मांग की गई है।
सरकार ने सुरक्षा का हवाला दिया
हालांकि, पाकिस्तान सरकार ने इमरान खान को शिफा इंटरनेशनल अस्पताल के बजाय पीआईएमएस ले जाने के फैसले का बचाव किया है। सरकार ने इसके पीछे सुरक्षा कारणों का हवाला दिया है। अस्पताल प्रशासन के अनुसार, शिफा इंटरनेशनल अस्पताल के दो विशेषज्ञ भी पीआईएमएस में इमरान खान की आंखों की जांच में शामिल हुए थे। वहीं, बाकी मेडिकल जांच पीआईएमएस के विशेषज्ञों ने की।
यह भी पढ़ें: 'न्याय-नॉमिक्स से ही बढ़ेगी अर्थव्यवस्था': सीजेआई सूर्यकांत का बयान, बोले- केवल भूगोल से नहीं मिलती तरक्की
सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश की समीक्षा भी मांगी
इस बीच पाकिस्तान सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर कर इमरान खान को निजी अस्पताल भेजने के आदेश की समीक्षा और उसे वापस लेने की मांग की है। सरकार का तर्क है कि यह आदेश केवल इमरान खान पर लागू होता है और इससे दूसरे कैदी भी निजी अस्पतालों में इलाज की मांग कर सकते हैं। सरकार ने कहा है कि ऐसा आदेश भेदभावपूर्ण है और इससे दूसरे कैदियों के लिए भी एक मिसाल बन सकती है।
आंखों की बीमारी को लेकर लंबे समय से चिंता
इमरान खान के परिवार और समर्थक पिछले कई महीनों से उनकी सेहत को लेकर चिंता जता रहे हैं। खासकर उनकी आंखों की बीमारी को लेकर सवाल उठते रहे हैं। इस साल जनवरी के आखिर में उनकी दाहिनी आंख में राइट सेंट्रल रेटिनल वेन ऑक्लूजन का पता चला था। इसके बाद उन्हें कई बार पीआईएमएस ले जाया गया। जेल अधिकारियों की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दाखिल एक रिपोर्ट में कहा गया है कि इमरान खान की आंखों की स्थिति में काफी सुधार हुआ है और उनकी दृष्टि लगभग सामान्य है। इमरान खान 2023 से रावलपिंडी की अदियाला जेल में बंद हैं। उनके खिलाफ कई मामले चल रहे हैं।
रावलपिंडी में पाकिस्तानी सेना की तैनाती
पाकिस्तान की संघीय सरकार ने पंजाब राज्य के गृह विभाग के अनुरोध पर रावलपिंडी में अगले छह महीनों के लिए पाकिस्तानी सेना को तैनात करने की मंजूरी दे दी है। गृह एवं मादक पदार्थ नियंत्रण मंत्रालय की ओर से जारी आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, संविधान के अनुच्छेद 245 के तहत सेना की तीन कंपनियों को संवेदनशील सुरक्षा कर्तव्यों के लिए तैनात किया गया है। सरकार का कहना है कि यह कदम जिला प्रशासन की मांग के अनुसार किसी भी अप्रिय या अनपेक्षित स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए उठाया गया है।
इमरान खान की पार्टी के नेता की गोलीबारी के बाद बढ़ा तनाव
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब कुछ ही दिन पहले पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ से जुड़े एक व्यक्ति ने सुरक्षा बलों पर गोलीबारी की थी, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई में वह मारा गया था। हालांकि, पीटीआई ने इस घटना से खुद को अलग करते हुए कहा है कि उसका आतंकवाद से कोई लेना-देना नहीं है।