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जी-20: विदेश मंत्रियों की बैठक में नहीं बनी सहमति, रूस-यूक्रेन समेत कई मुद्दों पर मतभेद से संयुक्त बयान टला
Sun, 01 Nov 2026 04:06 AM IST
अमन तिवारी
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
Published by: अमन तिवारी
Updated Sun, 01 Nov 2026 04:06 AM IST
अमेरिका के अटलांटा में जी-20 विदेश मंत्रियों की बैठक रूस-यूक्रेन युद्ध और अन्य वैश्विक मुद्दों पर मतभेदों के बीच बिना संयुक्त बयान के समाप्त हुई।
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अमेरिका में जी-20 विदेश मंत्रियों की बैठक बेनतीजा
- फोटो : एएनआई: X
विस्तार
दुनिया की 20 सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के समूह जी-20 के विदेश मंत्रियों की दो दिवसीय बैठक वैश्विक सुरक्षा से जुड़े कई अहम मुद्दों पर बिना किसी साझा सहमति के खत्म हो गई। रूस-यूक्रेन युद्ध समेत कई अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर देशों के बीच मतभेद बैठक के दौरान साफ नजर आए। इन मतभेदों का असर बैठक के नतीजों पर भी पड़ा। इसके चलते सदस्य देशों की ओर से कोई संयुक्त बयान जारी नहीं किया गया। इसके बजाय अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने बैठक के अध्यक्ष की ओर से एक बयान जारी किया, जिसमें चर्चा के दौरान सामने आई प्राथमिकताओं का उल्लेख किया गया।
इस बयान में किसी मुद्दे पर बनी सहमति या समझौते का जिक्र नहीं था। इसमें ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा से लेकर समुद्री रास्तों पर आवाजाही की स्वतंत्रता जैसे मुद्दों को प्राथमिकता बताया गया। बैठक के समापन पर पत्रकारों से बातचीत में रुबियो ने कहा कि इन समस्याओं के समाधान को लेकर सभी देशों के बीच आम सहमति बनने की स्थिति नहीं है। हालांकि, उन्होंने उम्मीद जताई कि जी-20 के कुछ देश सप्लाई चेन और महत्वपूर्ण खनिजों जैसे क्षेत्रों में मिलकर काम कर रहे हैं।
रुबियो ने शनिवार को भारत, ऑस्ट्रेलिया और जापान के विदेश मंत्रियों के साथ अलग से बातचीत भी की। इसके बाद उन्होंने जी-20 के अंतिम सत्र की अध्यक्षता की। इस सत्र में होर्मुज जलडमरूमध्य, लाल सागर, काला सागर और दक्षिण चीन सागर में समुद्री आवाजाही की स्वतंत्रता पर चर्चा हुई। रुबियो ने कहा कि सुरक्षित सप्लाई चेन आर्थिक विकास के लिए जरूरी है। महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक रास्ते खुले और सुरक्षित रहने चाहिए। साथ ही महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति व्यवस्था को भी मजबूत करना होगा।
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रूस की मौजूदगी पर यूरोपीय देशों को आपत्ति
बैठक शुरू होने से पहले ही रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव की मौजूदगी को लेकर यूरोपीय देशों ने आपत्ति जताई थी। अमेरिकी विदेश मंत्री रुबियो ने शुक्रवार को बैठक की शुरुआत एकजुटता की अपील के साथ की थी, लेकिन बाद में विदेश मंत्रियों की पारंपरिक सामूहिक तस्वीर खिंचवाने का कार्यक्रम रद्द कर दिया गया। यूरोपीय राजनयिकों ने लावरोव के साथ तस्वीर खिंचवाने पर आपत्ति जताई थी और इसका बहिष्कार करने की चेतावनी दी थी। पोलैंड के विदेश मंत्री रादोस्लाव सिकोरस्की ने कहा कि बैठक में आम सहमति नहीं बन पाना उनके लिए आश्चर्य की बात नहीं है। उन्होंने कहा कि जब युद्ध जारी हों और उनमें शामिल देश एक ही मेज पर बैठे हों, तो किसी साझा रुख पर सहमत होना मुश्किल होता है।
बैठक में शामिल कुछ राजनयिकों के मुताबिक, देशों ने मतभेदों को दूर करने और दिसंबर में फ्लोरिडा में होने वाले जी-20 नेताओं के शिखर सम्मेलन को सफल बनाने की कोशिश जारी रखने पर सहमति जताई। यह सम्मेलन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मेजबानी में होना है। राजनयिकों ने बताया कि रूस-यूक्रेन युद्ध, अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच युद्ध, अमेरिकी शुल्क और दक्षिण चीन सागर में चीन की गतिविधियों को लेकर मतभेद बने हुए हैं। इन मुद्दों से ईंधन की कीमतों और वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता भी बढ़ी है।
रूस-यूक्रेन युद्ध और ईरान का मुद्दा भी छाया रहा
बैठक में रूस के विदेश मंत्री लावरोव की मौजूदगी को लेकर भी चर्चा हुई। रुबियो ने रूस को आमंत्रित करने के फैसले का बचाव करते हुए कहा कि दोनों पक्षों से बातचीत किए बिना यूक्रेन संकट का शांतिपूर्ण समाधान संभव नहीं है। हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि फिलहाल यह कहना मुश्किल है कि बातचीत के जरिए यूक्रेन में शांति स्थापित हो पाएगी। लावरोव ने कहा कि रूस ऐसी स्थिति स्वीकार नहीं करेगा, जिसमें यूक्रेन उसके वैध सुरक्षा हितों के लिए सैन्य खतरा बने।
इस बीच अमेरिकी विदेश विभाग ने शुक्रवार को यूक्रेन के लिए 2.1 अरब डॉलर के पैट्रियट एयर डिफेंस इंटरसेप्टर बेचने के प्रस्ताव को मंजूरी दी। बैठक में ईरान को लेकर संभावित अमेरिकी सैन्य कार्रवाई का मुद्दा भी छाया रहा। इससे क्षेत्रीय देशों में चिंता है। रुबियो ने शुक्रवार को सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान और तुर्किये के विदेश मंत्री हाकान फिदान से भी मुलाकात की।
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इस बयान में किसी मुद्दे पर बनी सहमति या समझौते का जिक्र नहीं था। इसमें ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा से लेकर समुद्री रास्तों पर आवाजाही की स्वतंत्रता जैसे मुद्दों को प्राथमिकता बताया गया। बैठक के समापन पर पत्रकारों से बातचीत में रुबियो ने कहा कि इन समस्याओं के समाधान को लेकर सभी देशों के बीच आम सहमति बनने की स्थिति नहीं है। हालांकि, उन्होंने उम्मीद जताई कि जी-20 के कुछ देश सप्लाई चेन और महत्वपूर्ण खनिजों जैसे क्षेत्रों में मिलकर काम कर रहे हैं।
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रुबियो ने शनिवार को भारत, ऑस्ट्रेलिया और जापान के विदेश मंत्रियों के साथ अलग से बातचीत भी की। इसके बाद उन्होंने जी-20 के अंतिम सत्र की अध्यक्षता की। इस सत्र में होर्मुज जलडमरूमध्य, लाल सागर, काला सागर और दक्षिण चीन सागर में समुद्री आवाजाही की स्वतंत्रता पर चर्चा हुई। रुबियो ने कहा कि सुरक्षित सप्लाई चेन आर्थिक विकास के लिए जरूरी है। महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक रास्ते खुले और सुरक्षित रहने चाहिए। साथ ही महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति व्यवस्था को भी मजबूत करना होगा।
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रूस की मौजूदगी पर यूरोपीय देशों को आपत्ति
बैठक शुरू होने से पहले ही रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव की मौजूदगी को लेकर यूरोपीय देशों ने आपत्ति जताई थी। अमेरिकी विदेश मंत्री रुबियो ने शुक्रवार को बैठक की शुरुआत एकजुटता की अपील के साथ की थी, लेकिन बाद में विदेश मंत्रियों की पारंपरिक सामूहिक तस्वीर खिंचवाने का कार्यक्रम रद्द कर दिया गया। यूरोपीय राजनयिकों ने लावरोव के साथ तस्वीर खिंचवाने पर आपत्ति जताई थी और इसका बहिष्कार करने की चेतावनी दी थी। पोलैंड के विदेश मंत्री रादोस्लाव सिकोरस्की ने कहा कि बैठक में आम सहमति नहीं बन पाना उनके लिए आश्चर्य की बात नहीं है। उन्होंने कहा कि जब युद्ध जारी हों और उनमें शामिल देश एक ही मेज पर बैठे हों, तो किसी साझा रुख पर सहमत होना मुश्किल होता है।
बैठक में शामिल कुछ राजनयिकों के मुताबिक, देशों ने मतभेदों को दूर करने और दिसंबर में फ्लोरिडा में होने वाले जी-20 नेताओं के शिखर सम्मेलन को सफल बनाने की कोशिश जारी रखने पर सहमति जताई। यह सम्मेलन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मेजबानी में होना है। राजनयिकों ने बताया कि रूस-यूक्रेन युद्ध, अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच युद्ध, अमेरिकी शुल्क और दक्षिण चीन सागर में चीन की गतिविधियों को लेकर मतभेद बने हुए हैं। इन मुद्दों से ईंधन की कीमतों और वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता भी बढ़ी है।
रूस-यूक्रेन युद्ध और ईरान का मुद्दा भी छाया रहा
बैठक में रूस के विदेश मंत्री लावरोव की मौजूदगी को लेकर भी चर्चा हुई। रुबियो ने रूस को आमंत्रित करने के फैसले का बचाव करते हुए कहा कि दोनों पक्षों से बातचीत किए बिना यूक्रेन संकट का शांतिपूर्ण समाधान संभव नहीं है। हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि फिलहाल यह कहना मुश्किल है कि बातचीत के जरिए यूक्रेन में शांति स्थापित हो पाएगी। लावरोव ने कहा कि रूस ऐसी स्थिति स्वीकार नहीं करेगा, जिसमें यूक्रेन उसके वैध सुरक्षा हितों के लिए सैन्य खतरा बने।
इस बीच अमेरिकी विदेश विभाग ने शुक्रवार को यूक्रेन के लिए 2.1 अरब डॉलर के पैट्रियट एयर डिफेंस इंटरसेप्टर बेचने के प्रस्ताव को मंजूरी दी। बैठक में ईरान को लेकर संभावित अमेरिकी सैन्य कार्रवाई का मुद्दा भी छाया रहा। इससे क्षेत्रीय देशों में चिंता है। रुबियो ने शुक्रवार को सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान और तुर्किये के विदेश मंत्री हाकान फिदान से भी मुलाकात की।