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नेपाल: त्रिशूली नदी के उफान में झूला पुल बहा, 400 परिवारों का रास्ता बंद; भारत की फॉरेंसिक टीम कैसे देगी मदद?
Sun, 30 Aug 2026 11:11 PM IST
निर्मल कांत
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडू
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडू
Published by: निर्मल कांत
Updated Sun, 30 Aug 2026 11:11 PM IST
नेपाल में त्रिशूली नदी में फिर आई बाढ़ में 130 मीटर लंबा घ्यालचोक-चरौंदी झूला पुल बह गया। इससे करीब 400 परिवारों का मुख्य मार्ग बंद हो गया और किसानों की उपज चरौंदी तक पहुंचाना मुश्किल हो गया। ऐसे में लोगों के सामने अब क्या विकल्प बचा है? पढ़िए रिपोर्ट
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नेपाल में बाढ़ (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
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विस्तार
नेपाल के मध्य हिस्से में रविवार सुबह त्रिशूली नदी में फिर बाढ़ आ गई। इस बाढ़ में एक सस्पेंशन ब्रिज यानी झूला पुल बह गया। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
यह पुल गंडकी प्रांत के गोरखा जिले की गंडकी ग्रामीण नगरपालिका-8 के घ्यालचोक को पृथ्वी राजमार्ग के पास स्थित चरौंदी से जोड़ता था। सुरक्षा अधिकारियों ने बताया कि बाढ़ करीब तीन घंटे तक रही। इस दौरान सुबह करीब साढ़े 11 बजे पुल बह गया। बाढ़ में पुल बह जाने के बाद गंडकी ग्रामीण नगरपालिका-7 और 8 के लोगों का पृथ्वी राजमार्ग से संपर्क टूट गया है।
400 परिवारों के लिए मुख्य रास्ता था पुल
130 मीटर लंबा घ्यालचोक-चरौंदी पुल करीब 400 परिवारों के लिए आने-जाने का मुख्य रास्ता था। घ्यालचोक के लोग इसी पुल से दूध से बने सामान और सब्जियां चरौंदी की कृषि सहकारी संस्था तक ले जाते थे। अब इस इलाके के किसान अपनी फसल और दूसरी उपज चरौंदी तक नहीं पहुंचा पाएंगे।
पहले भी बह चुका है एक पुल
इससे पहले 26 अगस्त को अचानक आई भयानक बाढ़ में धवाडीघाट का एक पुल बह गया था। वह पुल यहां से नदी के बहाव की दिशा में थोड़ी दूरी पर था। स्थानीय लोग धवाडीघाट पुल के विकल्प के रूप में घ्यालचोक-चरौंदी पुल का इस्तेमाल कर रहे थे।
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ये भी पढ़ें: नेपाल बाढ़ लाइव: त्रासदी में अब तक 788 की मौत; सुरंग से रेस्क्यू के लिए भारत की विशेष टीम का ज्वाइंट ऑपरेशन
अब तक कितने लोगों की मौत और कितने लापता?
नेपाल में अचानक आई बाढ़ से मरने वालों की संख्या शनिवार को बढ़कर 788 हो गई। अभी भी शव मिल रहे हैं। अधिकारियों ने भोटेकोशी नदी में जल स्तर बढ़ने की चेतावनी दी है। उन्होंने बाढ़ प्रभावित जिलों के लोगों और बचाव दल के कर्मचारियों से सतर्क रहने को कहा है।
राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, अभी भी ढाई हजार से ज्यादा लोग लापता हैं। वहीं, करीब 9,500 लोगों को बचाया जा चुका है।
भारतीय फॉरेंसिक टीम डीएनए सैंपल की जांच में करेगी मदद
नेपाल में बाढ़ के बाद भारत की 19 सदस्यीय विशेष फॉरेंसिक टीम रविवार से काठमांडू में काम करेगी। अधिकारियों ने बताया कि यह टीम डीएनए सैंपल की जांच में मदद करेगी। इससे बाढ़ में मारे गए लोगों के शवों की पहचान करने में मदद मिलेगी।
विदेश मंत्रालय (एमईए) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक्स पर एक पोस्ट में यह जानकारी साझा की। उन्होंने पोस्ट में एक बयान में कहा, आज चीन से नेपाल में सुरक्षित पहुंचने वाले भारतीय नागरिकों की संख्या 403 है। यह जानकारी चीन की तरफ स्थानीय सरकार के सूत्रों के अनुसार है। उन्होंने बयान में आगे कहा कि 500 भारतीय नागरिक अभी भी चीन की तरफ हैं। उन्होंने कहा कि वे सुरक्षित हैं।
जायसवाल ने अपनी पोस्ट में आज रात साढ़े नौ बजे तक नेपाल में भारतीय नागरिकों की स्थिति और भारत की ओर से चलाए जा रहे बचाव और राहत अभियान की जानकारी साझा की। बयान में उन्होंने नेपाल में तैनात भारतीय टनल रेस्क्यू टीम की भी जानकारी दी।
भारतीय टनल रेस्क्यू टीम भी नेपाल में तैनात
बयान में कहा गया, टनल रेस्क्यू ऑपरेशन टीम ने आज अपना काम जारी रखा। टीम ने चिलिमे और लांगटांग में पनबिजली परियोजनाओं के स्थानों पर नेपाली सेना के खोज और बचाव अभियान में भी मदद की। टीम लांगटांग हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट के पास एक सुरंग में जाने में सफल रही। खराब मौसम के बावजूद टीम ने वहां से एक व्यक्ति के शव को बाहर निकाला। यह टीम लांगटांग हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट के पास अपना मदद और बचाव अभियान जारी रखे हुए है।
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यह पुल गंडकी प्रांत के गोरखा जिले की गंडकी ग्रामीण नगरपालिका-8 के घ्यालचोक को पृथ्वी राजमार्ग के पास स्थित चरौंदी से जोड़ता था। सुरक्षा अधिकारियों ने बताया कि बाढ़ करीब तीन घंटे तक रही। इस दौरान सुबह करीब साढ़े 11 बजे पुल बह गया। बाढ़ में पुल बह जाने के बाद गंडकी ग्रामीण नगरपालिका-7 और 8 के लोगों का पृथ्वी राजमार्ग से संपर्क टूट गया है।
400 परिवारों के लिए मुख्य रास्ता था पुल
130 मीटर लंबा घ्यालचोक-चरौंदी पुल करीब 400 परिवारों के लिए आने-जाने का मुख्य रास्ता था। घ्यालचोक के लोग इसी पुल से दूध से बने सामान और सब्जियां चरौंदी की कृषि सहकारी संस्था तक ले जाते थे। अब इस इलाके के किसान अपनी फसल और दूसरी उपज चरौंदी तक नहीं पहुंचा पाएंगे।
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पहले भी बह चुका है एक पुल
इससे पहले 26 अगस्त को अचानक आई भयानक बाढ़ में धवाडीघाट का एक पुल बह गया था। वह पुल यहां से नदी के बहाव की दिशा में थोड़ी दूरी पर था। स्थानीय लोग धवाडीघाट पुल के विकल्प के रूप में घ्यालचोक-चरौंदी पुल का इस्तेमाल कर रहे थे।
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अब तक कितने लोगों की मौत और कितने लापता?
नेपाल में अचानक आई बाढ़ से मरने वालों की संख्या शनिवार को बढ़कर 788 हो गई। अभी भी शव मिल रहे हैं। अधिकारियों ने भोटेकोशी नदी में जल स्तर बढ़ने की चेतावनी दी है। उन्होंने बाढ़ प्रभावित जिलों के लोगों और बचाव दल के कर्मचारियों से सतर्क रहने को कहा है।
राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, अभी भी ढाई हजार से ज्यादा लोग लापता हैं। वहीं, करीब 9,500 लोगों को बचाया जा चुका है।
भारतीय फॉरेंसिक टीम डीएनए सैंपल की जांच में करेगी मदद
नेपाल में बाढ़ के बाद भारत की 19 सदस्यीय विशेष फॉरेंसिक टीम रविवार से काठमांडू में काम करेगी। अधिकारियों ने बताया कि यह टीम डीएनए सैंपल की जांच में मदद करेगी। इससे बाढ़ में मारे गए लोगों के शवों की पहचान करने में मदद मिलेगी।
विदेश मंत्रालय (एमईए) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक्स पर एक पोस्ट में यह जानकारी साझा की। उन्होंने पोस्ट में एक बयान में कहा, आज चीन से नेपाल में सुरक्षित पहुंचने वाले भारतीय नागरिकों की संख्या 403 है। यह जानकारी चीन की तरफ स्थानीय सरकार के सूत्रों के अनुसार है। उन्होंने बयान में आगे कहा कि 500 भारतीय नागरिक अभी भी चीन की तरफ हैं। उन्होंने कहा कि वे सुरक्षित हैं।
जायसवाल ने अपनी पोस्ट में आज रात साढ़े नौ बजे तक नेपाल में भारतीय नागरिकों की स्थिति और भारत की ओर से चलाए जा रहे बचाव और राहत अभियान की जानकारी साझा की। बयान में उन्होंने नेपाल में तैनात भारतीय टनल रेस्क्यू टीम की भी जानकारी दी।
भारतीय टनल रेस्क्यू टीम भी नेपाल में तैनात
बयान में कहा गया, टनल रेस्क्यू ऑपरेशन टीम ने आज अपना काम जारी रखा। टीम ने चिलिमे और लांगटांग में पनबिजली परियोजनाओं के स्थानों पर नेपाली सेना के खोज और बचाव अभियान में भी मदद की। टीम लांगटांग हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट के पास एक सुरंग में जाने में सफल रही। खराब मौसम के बावजूद टीम ने वहां से एक व्यक्ति के शव को बाहर निकाला। यह टीम लांगटांग हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट के पास अपना मदद और बचाव अभियान जारी रखे हुए है।