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Rishikesh News: बाघ के हमले के बाद हरकत में आया पार्क प्रशासन, गांव में बढ़ाई गश्त
Sat, 22 Aug 2026 06:35 PM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश
संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश
Updated Sat, 22 Aug 2026 06:35 PM IST
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- धमांद-चमनपुर में नेपाली श्रमिक पर हमले के बाद ट्रैप कैमरे लगाए, ग्रामीणों ने बाघ पकड़े जाने तक गांव में गश्त की मांग की
धमांद गांव पहुंचे राजाजी टाइगर रिजर्व के अधिकारी
- घटनास्थल के आसपास लगाए ट्रैप कैमरे
- पानी भरने भी पटाखे लेकर जा रहे ग्रामीण
यमकेश्वर। धमांद गांव में नेपाली मूल के श्रमिक बल बहादुर (34) पर बाघ के हमले के बाद राजाजी टाइगर रिजर्व प्रशासन ने निगरानी और गश्त बढ़ा दी है। गौहरी रेंज के वन क्षेत्राधिकारी राजेश चंद्र जोशी के नेतृत्व में पार्क प्रशासन की टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण किया। बाघ की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए घटनास्थल के आसपास ट्रैप कैमरे लगाए गए हैं। हालांकि, अब तक कैमरों में बाघ की कोई हलचल कैद नहीं हुई है। रेंजर राजेश जोशी ने बताया कि धमांद-चमनपुर गांव के बीच जिस स्थान पर श्रमिक पर बाघ ने हमला किया था, वहां शुक्रवार शाम को ही ट्रैप कैमरे लगा दिए गए थे। शनिवार को क्षेत्र के कुछ अन्य स्थानों पर भी कैमरे लगाए गए हैं। सुरक्षा को देखते हुए आने वाले दिनों में कैमरों की संख्या और बढ़ाई जाएगी। पार्क प्रशासन की टीम ने ग्रामीणों के साथ धमांद गांव में बैठक भी की। बैठक में ग्रामीणों ने बाघ की मौजूदगी को लेकर चिंता जताते हुए मांग की कि जब तक बाघ पकड़ा नहीं जाता या जंगल की ओर नहीं चला जाता, तब तक पार्क प्रशासन की टीमें गांव में ही तैनात रहें। ग्रामीणों ने रास्तों और गांव के आसपास लगातार गश्त किए जाने की भी मांग की। पार्क प्रशासन के अनुसार क्षेत्र में गश्त बढ़ा दी गई है और बाघ की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है। कैमरों से मिलने वाले फुटेज के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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वनकर्मियों के साथ स्कूल आएंगे-जाएंगे बच्चे
धमांद गांव में हुई बैठक के दौरान ग्रामीण सबसे ज्यादा स्कूली बच्चों की सुरक्षा के लिए चिंतित दिखे। बताया कि चमनपुर, धमांद और संयार के बच्चे इसी रास्ते से स्कूल जाते हैं। इन गांवों के बुजुर्ग ग्रामीण अस्पताल, बैंक, बाजार और डाकघर जाने के लिए इसी सड़क मार्ग का उपयोग करते हैं। ग्रामीणों की चिंता को देखते हुए वन विभाग ने आश्वासन दिया है कि यदि बच्चे पैदल स्कूल आएंगे जाएंगे तो वनकर्मी साथ चलकर उन्हें स्कूल तक छोड़ेंगे व घर पहुंचाएंगे। साथ ही धमांद से डोरण तक झाड़ी कटान का कार्य भी शुरू किया जाएगा, ताकि सड़क के आसपास बाघ को छिपने की जगह न मिल सके।
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पानी भरने भी पटाखे लेकर जा रहे ग्रामीण
बाघ के हमले के बाद क्षेत्र में दहशत का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि अब वे अकेले घर से बाहर निकलने से भी डर रहे हैं। स्थिति यह है कि पानी भरने के लिए प्राकृतिक स्रोतों पर जाते समय और पशुओं को चराने के लिए जंगल की ओर जाते वक्त ग्रामीण पटाखे जला रहे हैं, ताकि बाघ आसपास हो तो वहां से दूर चला जाए।
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घायल बल बहादुर का एम्स में इलाज जारी
ऋषिकेश। बाघ के हमले में घायल श्रमिक बल बहादुर का अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ऋषिकेश में इलाज चल रहा है। गौहरी रेंज की एक टीम एम्स में मौजूद है। लगातार घायल की स्थिति पर नजर रखे हुए है। पार्क प्रशासन की ओर से श्रमिक आर्थिक सहायता देने की प्रक्रिया पूरी की जा रही है। घायल नेपाली श्रमिक के साथियों का कहना है कि पहली बार ऐसी घटना देखी है। अपने बच्चों की सुरक्षा लेकर श्रमिक चिंतित हैं।
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धमांद गांव पहुंचे राजाजी टाइगर रिजर्व के अधिकारी
- घटनास्थल के आसपास लगाए ट्रैप कैमरे
- पानी भरने भी पटाखे लेकर जा रहे ग्रामीण
यमकेश्वर। धमांद गांव में नेपाली मूल के श्रमिक बल बहादुर (34) पर बाघ के हमले के बाद राजाजी टाइगर रिजर्व प्रशासन ने निगरानी और गश्त बढ़ा दी है। गौहरी रेंज के वन क्षेत्राधिकारी राजेश चंद्र जोशी के नेतृत्व में पार्क प्रशासन की टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण किया। बाघ की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए घटनास्थल के आसपास ट्रैप कैमरे लगाए गए हैं। हालांकि, अब तक कैमरों में बाघ की कोई हलचल कैद नहीं हुई है। रेंजर राजेश जोशी ने बताया कि धमांद-चमनपुर गांव के बीच जिस स्थान पर श्रमिक पर बाघ ने हमला किया था, वहां शुक्रवार शाम को ही ट्रैप कैमरे लगा दिए गए थे। शनिवार को क्षेत्र के कुछ अन्य स्थानों पर भी कैमरे लगाए गए हैं। सुरक्षा को देखते हुए आने वाले दिनों में कैमरों की संख्या और बढ़ाई जाएगी। पार्क प्रशासन की टीम ने ग्रामीणों के साथ धमांद गांव में बैठक भी की। बैठक में ग्रामीणों ने बाघ की मौजूदगी को लेकर चिंता जताते हुए मांग की कि जब तक बाघ पकड़ा नहीं जाता या जंगल की ओर नहीं चला जाता, तब तक पार्क प्रशासन की टीमें गांव में ही तैनात रहें। ग्रामीणों ने रास्तों और गांव के आसपास लगातार गश्त किए जाने की भी मांग की। पार्क प्रशासन के अनुसार क्षेत्र में गश्त बढ़ा दी गई है और बाघ की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है। कैमरों से मिलने वाले फुटेज के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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वनकर्मियों के साथ स्कूल आएंगे-जाएंगे बच्चे
धमांद गांव में हुई बैठक के दौरान ग्रामीण सबसे ज्यादा स्कूली बच्चों की सुरक्षा के लिए चिंतित दिखे। बताया कि चमनपुर, धमांद और संयार के बच्चे इसी रास्ते से स्कूल जाते हैं। इन गांवों के बुजुर्ग ग्रामीण अस्पताल, बैंक, बाजार और डाकघर जाने के लिए इसी सड़क मार्ग का उपयोग करते हैं। ग्रामीणों की चिंता को देखते हुए वन विभाग ने आश्वासन दिया है कि यदि बच्चे पैदल स्कूल आएंगे जाएंगे तो वनकर्मी साथ चलकर उन्हें स्कूल तक छोड़ेंगे व घर पहुंचाएंगे। साथ ही धमांद से डोरण तक झाड़ी कटान का कार्य भी शुरू किया जाएगा, ताकि सड़क के आसपास बाघ को छिपने की जगह न मिल सके।
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पानी भरने भी पटाखे लेकर जा रहे ग्रामीण
बाघ के हमले के बाद क्षेत्र में दहशत का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि अब वे अकेले घर से बाहर निकलने से भी डर रहे हैं। स्थिति यह है कि पानी भरने के लिए प्राकृतिक स्रोतों पर जाते समय और पशुओं को चराने के लिए जंगल की ओर जाते वक्त ग्रामीण पटाखे जला रहे हैं, ताकि बाघ आसपास हो तो वहां से दूर चला जाए।
घायल बल बहादुर का एम्स में इलाज जारी
ऋषिकेश। बाघ के हमले में घायल श्रमिक बल बहादुर का अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ऋषिकेश में इलाज चल रहा है। गौहरी रेंज की एक टीम एम्स में मौजूद है। लगातार घायल की स्थिति पर नजर रखे हुए है। पार्क प्रशासन की ओर से श्रमिक आर्थिक सहायता देने की प्रक्रिया पूरी की जा रही है। घायल नेपाली श्रमिक के साथियों का कहना है कि पहली बार ऐसी घटना देखी है। अपने बच्चों की सुरक्षा लेकर श्रमिक चिंतित हैं।