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भारत-चीन व्यापार : 46 व्यापारियों को अब भी अनुमति का इंतजार
Mon, 24 Aug 2026 11:38 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Mon, 24 Aug 2026 11:38 PM IST
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धारचूला(पिथौरागढ़)। हमने तकलाकोट मंडी में अपनी दुकानें तैयार कर ली हैं। इनका किराया भी शुरू हो चुका है। सामान न होने से हमें खाली हाथ बैठे रहना पड़ रहा है। यदि समय पर सामान लाने की अनुमति नहीं मिली तो हमें नुकसान झेलना होगा। दुकानों का बगैर व्यापार के किराया चुकाना पड़ रहा है। यह संदेश भेजा है तकलाकोट मंडी में सामान ले जाने की अनुमति मिलने का इंतजार कर रहे भारतीय व्यापारियों ने।
सात साल बाद बमुश्किल शुरू हुए भारत-चीन व्यापार के लिए 62 व्यापारियों ने ट्रेड पास बनाए। चीन ने सिर्फ उन्हीं व्यापारियों को व्यापार की अनुमति दी जिनका पूर्व से तकलाकोट मंडी में सामान पड़ा है। ऐसे में 16 व्यापारी तकलाकोट जा सके हैं। अन्य 46 व्यापारियों को अब भी चीन की अनुमति का इंतजार है। चीन ने यह शर्त लगाई कि अन्य व्यापारियों को बुलाने के लिए बाद में निर्णय लिया जाएगा।
वहीं तलकोट में पुरानी मंडी में डंप पड़े सामान को व्यापारियों को नई मंडी में बेचना था। जब व्यापारी तकलाकोट पहुंचे तो सालों से रखा अधिकांश सामान खराब मिला जो व्यापार करने योग्य नहीं है। इन व्यापारियों ने सोशल मीडिया पर संदेश भेजकर कहा है कि नई मंडी में आवंटित दुकानें हमने तैयार कर ली हैं। एक दुकान का 1666 युआन यानी 25000 रुपये महीना किराया भी शुरू हो चुका है।
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चीनी प्रशासन से गुहार लगाई गई है कि पुराना सामान बेचने लायक नहीं होने से गुंजी में डंप नया सामान लाने की अनुमति चाहिए। अब तक व्यापारियों को इसकी अनुमति नहीं मिली है इससे उन्हें नुकसान झेलते हुए खाली हाथ बैठना पड़ रहा है। व्यापारियों ने कहा कि यदि जल्द ही भारत और चीन प्रशासन ने इस पर निर्णय नहीं लिया तो व्यापार का सीजन खत्म होने से उन्हें नुकसान झेलना होगा। उन्हें दुकानों का बगैर व्यापार के ही किराया चुकाकर खाली हाथ लौटना होगा।
एक महीने पहले गुंजी में पहुंचा दिया था सामान
लंबे समय बाद शुरू होने वाले भारत-चीन व्यापार को लेकर व्यापारियों में खासा उत्साह था। नतीजतन व्यापारियों ने ट्रेड पास हासिल करते ही गुड़, मिश्री, माचिस सहित अन्य जरूरी सामान गुंजी पहुंचा दिया था। चीन के संदेश से यह सामान गुंजी के गोदामों में ही डंप रहा गया है। चीन ने पुराने व्यापारियों को खाली हाथ बुलाया और व्यवस्थाएं परखने के बाद सामान लाने की अनुमति देने की बात कही। अब तक सभी व्यापारी अनुमति मिलने का इंतजार करने के लिए मजबूर हैं। भारतीय प्रशासन चीन को लगातार ईमेल भेजकर व्यापारियों को सामान ले जाने की अनुमति देने की बात कर रहा है। चिंताजनक बात यह है कि चीन की तरफ से अब तक कोई जवाब नहीं मिला है। ऐसे में व्यापारियों के साथ ही भारतीय प्रशासन हैरान भी है और परेशान भी।
बोले व्यापारी
तकलाकोट में नई मंडी में दुकानें तैयार कर ली हैं। इनका किराया भी शुरू हो चुका है। बेचने के लिए सामान नहीं है ऐसे में खाली हाथ बैठे हैं। यदि चीन और भारत ने संयुक्त रूप से सामान लाने की अनुमति नहीं दिलाई तो हमें नुकसान झेलना होगा।
-चक्र सिंह गर्खाल, कोषाध्यक्ष, भारत-चीन व्यापार समिति
व्यापार शुरू हो चुका है। नेपाल के व्यापारी व्यापार कर रहे हैं लेकिन हमारे पास सामान उपलब्ध नहीं है। दुकानों में सभी व्यवस्थाएं पूरी कर ली हैं। अब सामान मिलने का इंतजार है। यदि भारत से सामान लाने की अनुमति नहीं मिली तो हमारे लिए यह व्यापार घाटे का सौदा साबित होगा।
-दौलत सिंह रायपा, महासचिव, भारत-चीन व्यापार समिति
..............
भारतीय प्रशासन लगातार चीन को ईमेल कर रहा है जिसका अब तक जवाब नहीं मिल रहा है। बीते 10 अगस्त को भी चीन प्रशासन को ईमेल भेजा गया है। विदेश मंत्रालय को भी इसकी सूचना दी गई है। तकलाकोट सामान भेजने के लिए चीन की अनुमति जरूरी है।-आशीष जोशी, ट्रेड अधिकारी, धारचूला
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सात साल बाद बमुश्किल शुरू हुए भारत-चीन व्यापार के लिए 62 व्यापारियों ने ट्रेड पास बनाए। चीन ने सिर्फ उन्हीं व्यापारियों को व्यापार की अनुमति दी जिनका पूर्व से तकलाकोट मंडी में सामान पड़ा है। ऐसे में 16 व्यापारी तकलाकोट जा सके हैं। अन्य 46 व्यापारियों को अब भी चीन की अनुमति का इंतजार है। चीन ने यह शर्त लगाई कि अन्य व्यापारियों को बुलाने के लिए बाद में निर्णय लिया जाएगा।
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वहीं तलकोट में पुरानी मंडी में डंप पड़े सामान को व्यापारियों को नई मंडी में बेचना था। जब व्यापारी तकलाकोट पहुंचे तो सालों से रखा अधिकांश सामान खराब मिला जो व्यापार करने योग्य नहीं है। इन व्यापारियों ने सोशल मीडिया पर संदेश भेजकर कहा है कि नई मंडी में आवंटित दुकानें हमने तैयार कर ली हैं। एक दुकान का 1666 युआन यानी 25000 रुपये महीना किराया भी शुरू हो चुका है।
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चीनी प्रशासन से गुहार लगाई गई है कि पुराना सामान बेचने लायक नहीं होने से गुंजी में डंप नया सामान लाने की अनुमति चाहिए। अब तक व्यापारियों को इसकी अनुमति नहीं मिली है इससे उन्हें नुकसान झेलते हुए खाली हाथ बैठना पड़ रहा है। व्यापारियों ने कहा कि यदि जल्द ही भारत और चीन प्रशासन ने इस पर निर्णय नहीं लिया तो व्यापार का सीजन खत्म होने से उन्हें नुकसान झेलना होगा। उन्हें दुकानों का बगैर व्यापार के ही किराया चुकाकर खाली हाथ लौटना होगा।
एक महीने पहले गुंजी में पहुंचा दिया था सामान
लंबे समय बाद शुरू होने वाले भारत-चीन व्यापार को लेकर व्यापारियों में खासा उत्साह था। नतीजतन व्यापारियों ने ट्रेड पास हासिल करते ही गुड़, मिश्री, माचिस सहित अन्य जरूरी सामान गुंजी पहुंचा दिया था। चीन के संदेश से यह सामान गुंजी के गोदामों में ही डंप रहा गया है। चीन ने पुराने व्यापारियों को खाली हाथ बुलाया और व्यवस्थाएं परखने के बाद सामान लाने की अनुमति देने की बात कही। अब तक सभी व्यापारी अनुमति मिलने का इंतजार करने के लिए मजबूर हैं। भारतीय प्रशासन चीन को लगातार ईमेल भेजकर व्यापारियों को सामान ले जाने की अनुमति देने की बात कर रहा है। चिंताजनक बात यह है कि चीन की तरफ से अब तक कोई जवाब नहीं मिला है। ऐसे में व्यापारियों के साथ ही भारतीय प्रशासन हैरान भी है और परेशान भी।
बोले व्यापारी
तकलाकोट में नई मंडी में दुकानें तैयार कर ली हैं। इनका किराया भी शुरू हो चुका है। बेचने के लिए सामान नहीं है ऐसे में खाली हाथ बैठे हैं। यदि चीन और भारत ने संयुक्त रूप से सामान लाने की अनुमति नहीं दिलाई तो हमें नुकसान झेलना होगा।
-चक्र सिंह गर्खाल, कोषाध्यक्ष, भारत-चीन व्यापार समिति
व्यापार शुरू हो चुका है। नेपाल के व्यापारी व्यापार कर रहे हैं लेकिन हमारे पास सामान उपलब्ध नहीं है। दुकानों में सभी व्यवस्थाएं पूरी कर ली हैं। अब सामान मिलने का इंतजार है। यदि भारत से सामान लाने की अनुमति नहीं मिली तो हमारे लिए यह व्यापार घाटे का सौदा साबित होगा।
-दौलत सिंह रायपा, महासचिव, भारत-चीन व्यापार समिति
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भारतीय प्रशासन लगातार चीन को ईमेल कर रहा है जिसका अब तक जवाब नहीं मिल रहा है। बीते 10 अगस्त को भी चीन प्रशासन को ईमेल भेजा गया है। विदेश मंत्रालय को भी इसकी सूचना दी गई है। तकलाकोट सामान भेजने के लिए चीन की अनुमति जरूरी है।-आशीष जोशी, ट्रेड अधिकारी, धारचूला