पीलीभीत: 'साढ़े नौ हजार दो, ड्राइविंग लाइसेंस बनवाओ', एआरटीओ कार्यालय के बाहर चल रहा सेटिंग का खेल
पीलीभीत के एआरटीओ कार्यालय में सेटिंग का खेल चल रहा है। पड़ताल में इसका खुलासा हुआ है। दफ्तर के बाहर दलालों का जमावड़ा रहता है, जो यहां आने वाले आवेदकों बिना टेस्ट के ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने का दावा करते हैं। इसके एवज में मोटी रकम वसूलते हैं।
विस्तार
पीलीभीत में दोपहिया और चार पहिया वाहन चलाना आता है या नहीं, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। जेब में नौ से साढ़े नौ हजार रुपये हैं तो स्थायी ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने का रास्ता निकल आएगा। यह स्थिति एआरटीओ कार्यालय के आसपास लाइव पड़ताल में सामने आई।
यहां सक्रिय दलालों व लाइसेंस बनवाने पहुंचे लोगों से बातचीत की तो लोगों ने नौ से साढ़े नौ हजार रुपये में सौदा तय होने की बात बताई। सरकारी फीस 200 रुपये से 1000 रुपये तक है, कार्यालय के काउंटरों के आसपास तक सक्रिय दलाल लोगों से हजारों रुपये तक की रकम वसूल रहे हैं।
15 मिनट की बातचीत में नौ से साढ़े नौ हजार के बीच अटका रहा सौदा
टीम जब एआरटीओ कार्यालय के बाहर पहुंची तो वहां कई लोग बैठे मिले। उनमें से एक के पास जाकर चार पहिया वाहन का लाइसेंस बनाने की बात की शुरू की गई। कहा गया कि कार चलाना नहीं आता, लाइसेंस बनना है। इस पर वह व्यक्ति खुलकर बोला कि ड्राइविंग सीट पर बैठकर सिर्फ गियर तो डाल सकते हो। ऐसा करने पर नौ हजार रुपये खर्च आएगा। अगर यह भी नहीं कर सकते तो साढ़े नौ हजार रुपये खर्च करने होंगे।
- पूरनपुर के जियालुउद्दीन ने बताया कि लाइसेंस का आवेदन पहले निरस्त हो गया। कार्यालय के बाहर बैठे एक युवक को बताया तो उसने लर्निंग लाइसेंस के लिए एक हजार और स्थायी डीएल के लिए साढ़े नौ हजार रुपये मांगे।
- अमरिया के हरस्वरूप ने बताया कि सरकारी प्रक्रिया से लाइसेंस बनवाने के लिए टेस्ट पास करना मुश्किल हो रहा है। बाहर के लोगों ने करीब साढ़े नौ हजार रुपये खर्च होने की बात बताई।
- बीसलपुर के रमेश ने बताया कि स्थायी लाइसेंस बनवाने के लिए उनका सौदा नौ हजार रुपये में तय हुआ है। वहीं, टिकरी के आलोक ने बताया कि उन्हें टेस्ट में फेल कर दिया गया। इसके बाद एक युवक ने साढ़े नौ हजार रुपये खर्च होने की बात कही।
- चार अलग-अलग स्थानों से आए इन लोगों के बयानों में स्थायी लाइसेंस बनवाने के लिए सरकारी फीस से कई गुना अधिक रकम वसूले जाने की बात सामने आई।
सरकारी फीस कम, लाइसेंस के नाम पर हजारों की रकम
ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने की निर्धारित फीस और आवेदकों को बताई जा रही रकम में जमीन-आसमान का अंतर है। सरकारी फीस पर नजर डालें तो बाइक के लर्निंग लाइसेंस की फीस 200 रुपये, बाइक-कार के लिए 350 रुपये है। वहीं, स्थायी लाइसेंस का शुल्क 1000 रुपये है। इसके बावजूद आवेदकों को लाइसेंस बनवाने के लिए नौ से साढ़े नौ हजार रुपये तक खर्च करने की बात बताई जा रही है। इस तरह निर्धारित शुल्क से कई गुना अधिक रकम वसूली जा रही है।
लाइव पड़ताल में सामने आया कि लाइसेंस बनवाने की प्रक्रिया में परेशानी आने के बाद कुछ आवेदक कार्यालय के बाहर सक्रिय लोगों के संपर्क में पहुंच रहे हैं। इसके बाद लर्निंग से लेकर स्थायी लाइसेंस तक बनवाने के लिए रकम बताई जा रही है। पूरा खेल किस स्तर पर संचालित हो रहा है और इसमें किन लोगों की भूमिका है, इसकी जांच जरूरी है।
काउंटरों के आसपास बाहरी लोगों की सक्रियता
एआरटीओ कार्यालय में सोमवार को लाइसेंस बनवाने आए आवेदकों की भीड़ के बीच काउंटरों के आसपास बाहरी लोगों की सक्रियता दिखाई दी। लाइसेंस बनवाने की प्रक्रिया में मदद के नाम पर आवेदक इन लोगों के संपर्क में पहुंचते नजर आए। ऐसे में सवाल उठता है कि विभागीय काउंटरों पर होने वाले काम के लिए आम लोगों को बाहर के लोगों पर निर्भरता की जरूरत ही क्या है।
ऑनलाइन प्रक्रिया अपनाकर दलालों से बचें : एआरटीओ
एआरटीओ सुशील कुमार मिश्र का कहना है कि विभाग की सारी प्रक्रिया ऑनलाइन है। आवेदक ऑनलाइन माध्यम से ही सभी कार्य करा सकते है। किसी बाहरी व्यक्ति के बहकावे में न आएं। कार्यालय में बाहरी लोगों की आवाजाही को नहीं रोका जा सकता है। यह कार्यालय पब्लिक के लिए बना हुआ है। जो लोग यहां पर गलत काम में सक्रिय रहते है आवेदक स्वयं ही उन लोगों के पास पहुंच रहे है, इसलिए उन्हें हम कैसे रोक सकते हैं।
हर दिन 50 से 60 लर्निंग लाइसेंस के आवेदन
लाइसेंस के लिए एआरटीओ कार्यालय में रोजाना करीब 50 से 60 लर्निंग लाइसेंस के आवेदन आते हैं, जबकि 25 से 30 लोग स्थायी डीएल बनवाने की प्रक्रिया में पहुंचते हैं। इतनी बड़ी संख्या में आवेदकों के आने के बावजूद यदि उन्हें प्रक्रिया पूरी कराने के लिए बिचौलियों का सहारा लेना पड़ रहा है तो यह व्यवस्था की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल है।
टेस्टिंग ट्रैक तैयार, संचालन शुरू नहीं
पूरनपुर हाईवे पर नया एआरटीओ कार्यालय बनाया गया है। यहां ड्राइविंग टेस्ट के लिए ट्रैक भी तैयार है, लेकिन उसका संचालन अब तक शुरू नहीं हो सका है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब टेस्टिंग ट्रैक बन चुका है तो उसे चालू करने में देरी क्यों हो रही है?
डीएम आलोक कुमार ने बताया कि एआरटीओ कार्यालय में यदि बाहरी लोगों की सक्रियता है और ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने या अन्य काम में लोगों से अवैध वसूली हो रही है तो इसकी जांच कराई जाएगी। जिसकी भी संलिप्तता मिलेगी उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।