फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Kanpur News ›   Kanpur Resorting to injections for better performance patient numbers doubled at Hallet and Ursula

UP: 'बेहतर परफॉर्मेंस' के लिए इंजेक्शन का सहारा, हैलट-उर्सला में पांच साल में दोगुने हुए मरीज, खास रिपोर्ट

Sun, 07 Jun 2026 12:28 PM IST
Himanshu Awasthi हुमा आलम, अमर उजाला, कानपुर
हुमा आलम, अमर उजाला, कानपुर Published by: Himanshu Awasthi Updated Sun, 07 Jun 2026 12:28 PM IST
सार
Register For Event

Kanpur Health News: कानपुर में तनाव और बेहतर काम के दबाव में युवाओं में नशे के इंजेक्शन की लत तेजी से बढ़ रही है। अवैध रूप से मेडिकल स्टोरों पर मिल रहे ये इंजेक्शन युवाओं को मौत के मुहाने पर खड़ा कर रहे हैं, जिससे निपटने के लिए काउंसलिंग और परिवार के साथ की जरूरत है।

विज्ञापन
Kanpur Resorting to injections for better performance patient numbers doubled at Hallet and Ursula
सांकेतिक - फोटो : amar ujala

विस्तार

    विज्ञापन
  • केस-1: हिमाचल प्रदेश में बीटेक करने गया रावतपुर निवासी छात्र नशे के इंजेक्शन का लती हो चुका है। छात्र बहुत बुद्धिमान था और ऑनलाइन ट्रेडिंग से हर महीने दो से चार लाख रुपये कमाता है। पहले शौक में इंजेक्शन लिए और फिर यह आदत बन गया। अब वह बिना इंजेक्शन लगाए सो नहीं पाता। धीरे-धीरे उसने डोज इतनी बढ़ाई कि किसी भी तरह का नशा उस पर असर नहीं कर रहा है। 24 घंटे में दो घंटे ही मुश्किल सो पाता है। परेशान अभिभावक सेंटर पर दिखाने पहुंचे।
  • केस-2: सिंहपुर निवासी 21 वर्षीय युवा इंजेक्शन से नशा ले रहा था। उसने बताया कि उसकी प्रेमिका छोड़कर चली गई थी तो उसने नशे का सेवन करना शुरू कर दिया है। लड़का मध्यमवर्गीय परिवार से है और उसके पास अपनी गाड़ी घर सभी कुछ है। परिवार ने जब नशा नहीं छोड़ने पर घर से निकाल दिया तो वह नशे के लिए कूड़ा बीनने लगा और उसे बेचकर नशे के इंजेक्शन लगाना शुरू किया। परिवार को जब पता चला कि वह कूड़ा बीन रहा है तब सभी उसे लेकर सेंटर आए। अब उसे काफी हद तक फायदा मिला है।
  • विज्ञापन

बेहतर परफॉर्मेंस देने के लिए ले रहे थे इंजेक्शन
कानपुर शहर में नशे के इंजेक्शन की लत बहुत तेजी से पैर पसार रही है। हैलट, उर्सला के ओएसटी (ओपिओइड सब्स्टिट्यूशन थैरेपी) सेंटर में इन इंजेक्शन के लती 200 रोगी हर रोज पहुंच रहे हैं। पांच साल पहले यहां आने वाले रोगियों की संख्या सिर्फ 100 थी। चौंकाने वाली बात यह है कि रोगियों ने बताया कि ये शौक के लिए नहीं बल्कि तनाव और काम के दबाव में बेहतर परफॉर्मेंस देने के लिए इंजेक्शन ले रहे थे।

मेडिकल स्टोरों पर मिल जाते हैं इंजेक्शन के पैकेट
हैलट और उर्सला में आने वाले इन रोगियों का आयु वर्ग 20 से 60 वर्ष के बीच का है। इनमें 30 प्रतिशत महिलाएं हैं। इन रोगियों में करीब 35 फीसदी रोगी कल्याणपुर और सिंहपुर क्षेत्र के हैं। रोगियों ने बताया कि साकेतनगर, किदवईनगर, कल्याणपुर, सिंहपुर जैसे क्षेत्रों में आसानी से मेडिकल स्टोरों पर नशे के इंजेक्शन के पैकेट मिल जाते हैं। मेडिकल स्टोर वाले उन्हें ही यह पैकेट देते हैं, जो रोज लेने आते हैं।

विज्ञापन

एक पैकेट 250 रुपये का मिलता है
गोविंदनगर निवासी एक रोगी ने बताया कि अगर कोई भी व्यक्ति जाकर वहां पर नशे के इंजेक्शन मांगेगा, तो उसे नहीं मिलेगा। जो लोग इसका पहले से सेवन कर रहे हैं, उन्हें मेडिकल स्टोर संचालक पहचानते हैं और दे देते हैं। उसने बताया कि एक पैकेट 250 रुपये का मिलता है और इसमें एक डोज होती है। इनमें से कई रोगी ऐसे हैं जो पल्लेदार करते हैं। कम समय में ज्यादा बोझ उठाने के चक्कर में इनको इंजेक्शन की लत पड़ गई।

रोगियों के नशा करने का कारण भी बदला है
इसके अलावा उच्च वर्ग के छात्र और युवा फैशन के तौर पर इंजेक्शन लगाने की शुरुआत करते हैं और फिर उनको लत लग जाती है। पांच साल पहले तक मध्यम वर्गीय परिवारों में पुरुषों का तर्क रहता था कि घर और काम की परेशानियों से बचने के लिए वे नशे का सेवन करते थे, लेकिन अब उन्हीं लोगों का कहना है कि काम को बेहतर ढंग से करने के लिए वे नशा करते हैं। ओएसटी सेंटर के नोडल डॉ. अमित पोरवाल ने बताया कि सेंटर में आने वाले रोगियों के नशा करने का कारण भी बदला है।

नए कारण बता रहे हैं रोगी
काउंसलिंग के दौरान रोगी जब नए कारण बता रहे हैं, तो हैरानी होती है। श्रमिक भारती की प्रोजेक्ट मैनेजर संजय कुमारी नशे और एचआईवी रोकथाम के लिए काम करती हैं। उन्होंने बताया कि इस समय उच्च वर्ग के 15 प्रतिशत, निम्न वर्ग के 35 प्रतिशत और मध्यमवर्गीय परिवारों के 50 प्रतिशत लोग नशा कर रहे हैं। इसमें ड्राइवर, परिचालक, मैकेनिक, प्राइवेट कंपनियों में नौकरी करने वाले लोग शामिल हैं।

परिवार करे सहयोग, तो नशे की दलदल से निकला जा सकता बाहर
सेंटर की काउंसलर कविता आजाद ने बताया कि नशे की दलदल से बाहर निकलना नामुमकिन नहीं है बशर्ते परिवार का पूरा सहयोग हो। शुरुआत में रोगियों को इंजेक्शन और जरूरी दवाएं दी जाती हैं ताकि अचानक नशा छोड़ने पर शरीर में होने वाले असहनीय दर्द और तड़प को नियंत्रित किया जा सके। इसके बाद दवाओं की डोज को धीरे-धीरे घटाया जाता है और साथ में लगातार काउंसलिंग की जाती है।

ओएसटी सेंटर में आने वाले रोगियों की काउंसलिंग की जाती है। दवाओं से नशे की आदत को छुड़ाया जा रहा है। इसमें परिवार का सहयोग बहुत जरूरी होता है।  -डॉ. बीपी प्रियदर्शी, विभागाध्यक्ष

ऐसे बेचे जाते हैं इंजेक्शन
दो दिसंबर 2024 को ड्रग विभाग ने नशे की दवाएं बेचने की सूचना मिली तो मसवानपुर स्थित कामदगिरी मेडिकल एंड जनरल स्टोर पर छापा मारा था। मौके पर मेडिकल स्टोर संचालक भी नहीं मिला। सिर्फ एक कर्मचारी दीपक सिंह मिला जो बिल भी नहीं दिखा सका। मेडिकल स्टोर को सामने से जाली लगाकर बंद किया गया था। बस थोड़ी सी जगह छोड़ी गई थी। इससे मुट्ठी में पैसा लेकर हाथ अंदर डालते ही अंदर बैठा व्यक्ति इंजेक्शन का पैकेट पकड़ा देता था। पैकेट में इंजेक्शन, सीरिंज सब होते थे। मौके पर बरामद दवाओं के सैंपल जांच के लिए भेजे गए थे जिसमें ब्यूप्रेनोर्फिन इंजेक्शन की पुष्टि हुई थी जो कैंसर जैसी बीमारियों में होने वाले भीषण दर्द से छुटकारा पाने के लिए दिया जाता है। ये सीधे दिमाग पर असर करता है। कर्मचारी दीपक सिंह के खिलाफ एफआईआर भी ड्रग विभाग ने दर्ज कराई थी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed