UP: मच्छरों का दिमाग पढ़ेंगे आईआईटी कानपुर के वैज्ञानिक, इंसानी गंध और खून पीने के व्यवहार पर शुरू हुआ शोध
Kanpur News: रोबोटिक्स, ड्रोन, कम्युनिकेशन, साइबर और सुरक्षा तकनीक के क्षेत्र में शोध के बाद अब आईआईटी कानपुर के विशेषज्ञ मच्छरों के दिमाग और उनकी सूंघने की क्षमता को समझने में जुटे हैं।
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रोबोटिक्स, ड्रोन, कम्यूनिकेशन, साइबर और सुरक्षा तकनीक जैसे क्षेत्रों में अपनी धाक जमाने के बाद अब भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) कानपुर के विशेषज्ञ एक बिल्कुल अनूठे विषय पर शोध कर रहे हैं। संस्थान के वैज्ञानिक अब 'मच्छरों का दिमाग' पढ़ना चाह रहे हैं। वे इस बात का अध्ययन कर रहे हैं कि मच्छर किस तरह इंसानों की ओर आकर्षित होते हैं, खून पीने के बाद उनके मस्तिष्क में किस प्रकार के बदलाव आते हैं और उनका व्यवहार कैसा रहता है।
मेहता फैमिली सेंटर में चल रहा है विशेष शोध
ओडिशा के रहने वाले शोधार्थी कार्तिक राउत संस्थान के 'मेहता फैमिली सेंटर फॉर इंजीनियरिंग इन मेडिसिन' में प्रो. नितिन गुप्ता के मार्गदर्शन में मच्छरों के मस्तिष्क और उनकी सूंघने की क्षमता पर गहराई से रिसर्च कर रहे हैं। कार्तिक के इस शोध की प्रेरणा कोविड लॉकडाउन के दौरान मिली थी, जब वे मच्छरों को देखकर यह सोचने लगे कि आखिर ये जीव इंसानों तक कैसे पहुंच जाते हैं। उनकी यही जिज्ञासा उन्हें आईआईटी कानपुर तक ले आई।
डेंगू और चिकनगुनिया फैलाने वाली प्रजाति पर फोकस
उनका यह शोध मुख्य रूप से एडीज एजिप्टी प्रजाति के मच्छरों पर केंद्रित है। यही वे मच्छर हैं जो डेंगू, चिकनगुनिया और येलो फीवर जैसी गंभीर बीमारियों के प्रसार के लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार माने जाते हैं। इस अध्ययन के जरिए यह समझने का प्रयास किया जा रहा है कि मच्छर इंसानी गंध को कैसे पहचानते हैं तथा खून पीने से पहले और बाद में उनके मस्तिष्क की कार्यप्रणाली और न्यूरोलॉजिकल गतिविधियों में क्या-क्या बदलाव आते हैं। इस शोध के परिणाम भविष्य में मच्छरों से फैलने वाली बीमारियों की रोकथाम और उनके नियंत्रण के नए तरीके खोजने में बेहद मददगार साबित हो सकते हैं।